देशफीचर्ड

Punjab Digital Revolution: दफ्तर नहीं, अब लोगों के घरों से चल रही है सरकार; मान सरकार ने 0.33% पेंडेंसी के साथ रचा नया प्रशासनिक इतिहास

चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने वर्ष 2025 तक राज्य के प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह डिजिटल और नागरिक-अनुकूल बनाकर एक वैश्विक मानक स्थापित कर दिया है। पंजाब आज देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है, जहां शासन का अर्थ केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आम आदमी की चौखट तक पहुंच चुका है। ‘सिफारिश और देरी’ की पुरानी संस्कृति को खत्म कर मान सरकार ने भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी शासन की नई परिभाषा लिखी है।

‘भगवंत मान सरकार तुहाड़े द्वार’: घर बैठे मिल रही हैं 437 सेवाएं

पंजाब के प्रशासनिक सुधार मंत्री अमन अरोड़ा ने राज्य की उपलब्धियों का ब्यौरा देते हुए बताया कि सरकार की दूरदर्शी नीतियों ने ‘ई-गवर्नेंस’ को ‘डोरस्टेप-गवर्नेंस’ में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना ‘भगवंत मान सरकार तुहाड़े द्वार’ इस डिजिटल क्रांति का आधार स्तंभ है।

  • उपलब्धि: अब तक 1.85 लाख से अधिक नागरिकों को उनके घर पर ही सरकारी सेवाओं का लाभ दिया गया है।

  • विस्तार: इस योजना के तहत 437 प्रकार की विभिन्न सेवाएं शामिल हैं, जिनमें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर पेंशन और राशन कार्ड तक शामिल हैं।

  • लाभ: यह सेवा विशेष रूप से बुजुर्गों, दिव्यांगों और ग्रामीण निवासियों के लिए वरदान साबित हुई है, जिन्हें अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।

राजस्व विभाग में बड़ा बदलाव: 12.46 लाख आवेदनों का ऑनलाइन निपटारा

प्रशासनिक सुधारों की सबसे बड़ी सफलता राजस्व विभाग में देखी गई है, जो पहले अपनी जटिल प्रक्रियाओं के लिए जाना जाता था। तकनीक के समावेश ने पटवारियों और तहसील कार्यालयों के कामकाज का चेहरा बदल दिया है:

  1. पेपरलेस प्रक्रिया: अब जमीन-जायदाद से जुड़े 12.46 लाख से अधिक आवेदनों का ऑनलाइन निपटारा किया गया है।

  2. QR-कोडेड डिजिटल सर्टिफिकेट: जालसाजी रोकने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रमाण पत्र अब क्यूआर-कोड के साथ डिजिटल रूप में जारी किए जा रहे हैं।

  3. बिचौलियों का अंत: ऑनलाइन सिस्टम ने बिचौलियों और भ्रष्टाचार की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म कर दिया है।


पेंडेंसी मात्र 0.33%: रियल-टाइम मॉनिटरिंग का कमाल

पंजाब की इस सफलता का राज ‘डिजिटल डैशबोर्ड’ है। इस अत्याधुनिक सिस्टम के माध्यम से मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्री स्वयं सभी विभागों की फाइलों और आवेदनों की निगरानी करते हैं।

“मुख्यमंत्री भगवंत मान का स्पष्ट निर्देश है कि जनता का काम बिना किसी बाधा के समय सीमा के भीतर होना चाहिए। आज इसी मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम है कि राज्य में लंबित मामलों (Pending Cases) की दर गिरकर मात्र 0.33% रह गई है, जो पंजाब के इतिहास में अब तक का सबसे निचला स्तर है।”अमन अरोड़ा, प्रशासनिक सुधार मंत्री

तकनीक और पारदर्शिता का संगम

पंजाब सरकार ने तकनीक का उपयोग न केवल गति बढ़ाने के लिए किया है, बल्कि जवाबदेही तय करने के लिए भी किया है। ‘डिजिटल पंजाब’ के इस मॉडल ने यह साबित कर दिया है कि यदि मंशा साफ हो, तो सरकारी व्यवस्था को पूरी तरह से जनता के प्रति समर्पित बनाया जा सकता है।

विकसित पंजाब की ओर बढ़ते कदम

प्रशासनिक सुधारों की इस लहर ने पंजाब को निवेश और विकास के लिए एक अनुकूल राज्य बना दिया है। ‘सरकार दफ्तरों से नहीं, लोगों के घरों से’ का नारा अब पंजाब की जमीनी हकीकत है। आने वाले समय में अन्य विभाग भी इसी डिजिटल मॉडल को अपनाकर पंजाब को पूर्णतः ‘पेपरलेस स्टेट’ बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button