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Reading: Project Nanda-Sunanda: बेटियों की शिक्षा से महका नववर्ष का पहला दिन; DM सविन बंसल ने 93 बालिकाओं के सपनों को दी नई उड़ान
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The Hill India > Blog > देहरादून > Project Nanda-Sunanda: बेटियों की शिक्षा से महका नववर्ष का पहला दिन; DM सविन बंसल ने 93 बालिकाओं के सपनों को दी नई उड़ान
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Project Nanda-Sunanda: बेटियों की शिक्षा से महका नववर्ष का पहला दिन; DM सविन बंसल ने 93 बालिकाओं के सपनों को दी नई उड़ान

The Hill India News
Last updated: January 1, 2026 1:38 pm
The Hill India News
Published: January 1, 2026
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देहरादून: साल 2026 के पहले सूरज की पहली किरण के साथ ही देहरादून जिला प्रशासन ने समाज के प्रति अपनी संवेदनशीलता का एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। जहां लोग नए साल का जश्न मना रहे थे, वहीं जिलाधिकारी सविन बंसल ने कलेक्ट्रेट सभागार में ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के तहत उन मेधावी बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित किया, जिनकी पढ़ाई गरीबी और पारिवारिक त्रासदियों के कारण रुकने की कगार पर थी।

Contents
शिक्षा ही सच्ची पूजा: ₹1.55 लाख से संवरा 4 बेटियों का भविष्यप्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा: अब तक ₹33.50 लाख की मदददर्द की दास्तां और प्रशासन का सहारा: भावुक कर देने वाली कहानियांDM का मंत्र: “सक्षम बनो और फिर दूसरों का हाथ थामो”प्रशासनिक टीम की उपस्थितिसुशासन और संवेदनशीलता का संगम

शिक्षा ही सच्ची पूजा: ₹1.55 लाख से संवरा 4 बेटियों का भविष्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन ‘अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की सेवा’ को धरातल पर उतारते हुए जिला प्रशासन ने इस प्रोजेक्ट के 11वें संस्करण में 4 और बालिकाओं को ₹1.55 लाख की वित्तीय सहायता के चेक वितरित किए। डीएम सविन बंसल ने इस अवसर पर कहा:

“हम अक्सर वर्ष की शुरुआत पूजा-अर्चना से करते हैं, लेकिन जरूरतमंद बेटियों की शिक्षा रूपी पूजा से बेहतर शुरुआत और कुछ नहीं हो सकती। निर्धनता या विपरीत परिस्थितियां अब किसी भी मेधावी बेटी की राह का रोड़ा नहीं बनेंगी।”

प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा: अब तक ₹33.50 लाख की मदद

जिलाधिकारी ने अवगत कराया कि इस नवाचारी प्रोजेक्ट के माध्यम से अब तक 93 बालिकाओं की बाधित हो चुकी शिक्षा को ₹33.50 लाख की सहायता राशि से पुनः सुचारू किया गया है। यह प्रोजेक्ट उन बालिकाओं के लिए एक ‘संजीवनी’ बनकर उभरा है जिनके सिर से पिता का साया उठ गया या जिनके अभिभावक गंभीर बीमारियों/दिव्यांगता से जूझ रहे हैं।


दर्द की दास्तां और प्रशासन का सहारा: भावुक कर देने वाली कहानियां

कार्यक्रम के दौरान जब लाभार्थी बालिकाओं ने अपनी व्यथा सुनाई, तो सभागार में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं:

  • जीविका अंथवाल (दून विवि): स्नातक की छात्रा जीविका ने बताया कि उनके पिता आईसीयू में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। घर में आर्थिक संकट इतना गहरा गया कि कॉलेज की फीस भरना नामुमकिन था। प्रशासन ने जीविका की उच्च शिक्षा का जिम्मा उठाकर उसे टूटने से बचा लिया।

  • नंदनी राजपूत: वर्ष 2018 में एक दुर्घटना में पिता को खोने वाली नंदनी की मां सिलाई करके तीन बहनों को पाल रही हैं। 11वीं की फीस न भर पाने के कारण उनकी पढ़ाई छूट रही थी, जिसे अब जिला प्रशासन ने पुनर्जीवित किया।

  • दिव्या और आकांशी: दिव्या के पिता दिव्यांग होने के कारण 18 महीने से बेड पर हैं, वहीं आकांशी के परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय थी। दोनों ही मेधावी छात्राएं अब स्कूल लौट सकेंगी।

  • नव्या नैनवाल: पिता की मृत्यु के बाद शिक्षा का बोझ परिजनों के लिए असहनीय हो गया था, जिसे प्रशासन ने संवेदनशीलता के साथ दूर किया।


DM का मंत्र: “सक्षम बनो और फिर दूसरों का हाथ थामो”

जिलाधिकारी सविन बंसल ने बालिकाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन हों, साहस और संकल्प के साथ लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने एक विशेष अपेक्षा भी की कि जब ये बालिकाएं भविष्य में आत्मनिर्भर और सक्षम बनेंगी, तो वे समाज के अन्य जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आएंगी।

प्रशासनिक टीम की उपस्थिति

इस मानवीय पहल के दौरान मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अभिनव शाह, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेंद्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट और जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती सहित कई अधिकारी एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां उपस्थित रहीं।


सुशासन और संवेदनशीलता का संगम

‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन सपनों को बचाने का अभियान है जो अभावों की भेंट चढ़ सकते थे। देहरादून जिला प्रशासन का यह मॉडल आज पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणा है।

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