
चमोली (उत्तराखंड) | डेस्क रिपोर्ट
उत्तराखंड के चमोली जिले से एक बड़े हादसे की खबर सामने आ रही है। पीपलकोटी में स्थित टिहरी हाइड्रो डेवलेपमेंट कॉर्पोरेशन (THDC) की निर्माणाधीन सुरंग के भीतर मजदूरों को ले जा रही दो लोको ट्रेनें (Loco Trains) आपस में टकरा गईं। इस भीषण भिड़ंत में कम से कम 70 मजदूर घायल हुए हैं। हादसा मंगलवार रात करीब 10 बजे उस समय हुआ, जब सुरंग के भीतर शिफ्ट बदली जा रही थी।
कैसे हुआ यह भीषण हादसा?
मिली जानकारी के अनुसार, THDC के विष्णुगाड़ पीपलकोटी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की सुरंग के भीतर मजदूरों को लाने और ले जाने का काम लोको ट्रेनों के जरिए किया जाता है। मंगलवार रात जब शिफ्ट चेंज हो रही थी, तब दोनों ट्रेनों में कुल मिलाकर 108 मजदूर सवार थे।
शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि किसी तकनीकी खराबी (Technical Glitch) के कारण पीछे से आ रही एक ट्रेन ने आगे खड़ी दूसरी ट्रेन को जोरदार टक्कर मार दी। सुरंग के अंधेरे और संकरे हिस्से में हुई इस टक्कर के बाद मजदूरों को संभलने का मौका नहीं मिला, जिससे अंदर चीख-पुकार मच गई।
राहत और बचाव कार्य: अस्पताल में भर्ती 47 मजदूर
हादसे के तुरंत बाद प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और स्थानीय प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। अंधेरी सुरंग से घायलों को बाहर निकालना एक बड़ी चुनौती थी।
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गोपेश्वर जिला अस्पताल: वर्तमान में 47 मजदूरों का इलाज यहाँ चल रहा है।
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पीपलकोटी अस्पताल: यहाँ 17 मजदूरों को भर्ती कराया गया है।
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कुल घायल: जिला प्रशासन ने लगभग 70 मजदूरों के घायल होने की पुष्टि की है।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, अधिकांश मजदूरों को मामूली चोटें आई हैं, लेकिन कुछ की स्थिति गंभीर बनी हुई है जिन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।
झारखंड और ओडिशा के हैं अधिकांश मजदूर
हादसे का शिकार हुए ज्यादातर श्रमिक झारखंड और ओडिशा राज्यों के रहने वाले हैं। चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने देर रात जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना। प्रशासन ने संबंधित राज्यों को भी सूचित कर दिया है ताकि घायल मजदूरों के परिजनों तक जानकारी पहुंचाई जा सके।
THDC प्रोजेक्ट और सुरक्षा पर सवाल
विष्णुगाड़ पीपलकोटी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट उत्तराखंड के महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में से एक है। हालांकि, सुरंग के भीतर दो ट्रेनों का एक ही ट्रैक पर टकराना सुरक्षा प्रोटोकॉल (Safety Protocols) की बड़ी चूक मानी जा रही है।
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क्या ट्रेनों में सिग्नलिंग सिस्टम फेल था?
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क्या सुरंग के भीतर संचार की कमी थी?
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शिफ्ट चेंज के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया?
इन सभी सवालों के जवाब के लिए प्रशासन ने विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
उत्तराखंड के पहाड़ों में टनल प्रोजेक्ट्स हमेशा से ही चुनौतियों भरे रहे हैं। चमोली का यह हादसा एक बार फिर निर्माणाधीन सुरंगों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा पर गंभीर बहस छेड़ सकता है। फिलहाल, प्राथमिकता घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने की है।



