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विपक्षी दलों ने न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन को हटाने के लिए, लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा नोटिस

The Hill India News
Last updated: December 9, 2025 2:54 pm
The Hill India News
Published: December 9, 2025
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नई दिल्ली, 9 दिसंबर | कांग्रेस, द्रमुक, समाजवादी पार्टी सहित कई विपक्षी दलों ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक औपचारिक नोटिस सौंपा, जिसमें मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन को उनके पद से हटाने का प्रस्ताव लाने की मांग की गई है।

Contents
प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और टी.आर. बालू पहुंचे लोकसभा अध्यक्ष से मिलनेसंविधान के तहत प्रक्रियाविपक्ष के आरोपसरकार की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं

विपक्षी दलों का आरोप है कि ‘कार्तिगई दीपम’ मामले में न्यायमूर्ति स्वामीनाथन द्वारा दिए गए फैसले ने न्यायपालिका की निष्पक्षता, पारदर्शिता और धर्मनिरपेक्ष कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और टी.आर. बालू पहुंचे लोकसभा अध्यक्ष से मिलने

नोटिस सौंपने के लिए

  • कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा,
  • समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव,
  • द्रमुक नेता टी.आर. बालू
    सहित कई विपक्षी नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की।

नेताओं का दावा है कि न्यायमूर्ति स्वामीनाथन का आचरण संविधान की उन मूल भावना से विचलित प्रतीत होता है, जो एक जज से पूरी तरह निष्पक्ष और धर्मनिरपेक्ष आचरण की अपेक्षा करती है।

संविधान के तहत प्रक्रिया

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(4) और 217 के तहत किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए संसद के किसी भी सदन में विशेष बहुमत से महाभियोग प्रस्ताव पारित होना आवश्यक होता है। प्रस्ताव स्वीकार होने पर जांच समिति गठित की जाती है, जिसके निष्कर्षों के बाद ही जज को पद से हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

विपक्ष के आरोप

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि ‘कार्तिगई दीपम’ मामले में न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने न्यायिक मर्यादा और धर्मनिरपेक्ष भावना के विपरीत टिप्पणियाँ कीं, जिससे एक स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका की छवि प्रभावित होती है।

विपक्ष का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक निर्णय का नहीं, बल्कि उन सिद्धांतों का है जो भारतीय न्यायिक व्यवस्था की नींव हैं।

सरकार की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं

इस विषय पर केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। संसद में सत्र जारी रहते हुए यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और अधिक तीखा हो सकता है।

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