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The Hill India > Blog > देश > शीतकालीन सत्र से पहले सियासी पारा चरम पर — SIR, सुरक्षा और ‘वंदे मातरम्’ पर तूफ़ानी टकराव के संकेत
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शीतकालीन सत्र से पहले सियासी पारा चरम पर — SIR, सुरक्षा और ‘वंदे मातरम्’ पर तूफ़ानी टकराव के संकेत

The Hill India News
Last updated: November 30, 2025 2:11 am
The Hill India News
Published: November 30, 2025
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 नई दिल्ली: संसद का शीतकालीन सत्र इस बार शुरू होने से पहले ही राजनीतिक उथल-पुथल के केंद्र में आ चुका है। सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का ऐसा माहौल बन गया है कि सत्र के पहले ही दिन से सदन में भारी हंगामे की संभावनाएँ जताई जा रही हैं। यह सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा, लेकिन राजनीतिक संकेत बता रहे हैं कि हर दिन तीखे आरोप–प्रत्यारोप, वॉकआउट, नारेबाज़ी और गरमागरम बहस का गवाह बनेगा।

Contents
1️⃣ राज्यसभा बिजनेस एडवाइजरी कमेटी – शाम 4 बजे2️⃣ लोकसभा BAC – शाम 5 बजे3️⃣ कांग्रेस संसदीय रणनीति समूह – शाम 5 बजे, 10 जनपथ1. दिल्ली ब्लास्ट2. बढ़ता प्रदूषण संकट3. वोट चोरी और चुनावी अनियमितताएँ4. बीएलओ की आत्महत्या

सत्र की सुचारू शुरुआत सुनिश्चित करने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने सोमवार सुबह 11 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है। उन्होंने साफ कहा है कि सरकार सभी दलों की बात सुनेगी, लेकिन संसदीय शिष्टाचार के नियम—जिन्हें हर सदस्य जानता है—का पालन जरूरी है। बैठक में सरकार लोकसभा और राज्यसभा के संचालन में सहयोग के लिए सभी पार्टियों से अपील करेगी।

इसके बावजूद, माहौल में तनाव साफ झलक रहा है। विपक्ष SIR (मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण), दिल्ली ब्लास्ट, बढ़ते प्रदूषण और बीएलओ आत्महत्या जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए तैयार बैठा है। वहीं सरकार विकासवादी एजेंडे और राष्ट्रवादी विमर्श के सहारे विपक्ष की घेराबंदी को कमजोर करने की रणनीति बना रही है।


10 बड़े विधेयकों से हिलेगा सदन का एजेंडा

शीतकालीन सत्र में सरकार लगभग 10 अहम विधेयक लाने जा रही है। इनमें शामिल हैं —

  • परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा देने वाले सुधार
  • उच्च शिक्षा ढांचा सुधार विधेयक, जिसे देश के विश्वविद्यालय ढांचे में बड़ा बदलाव माना जा रहा है
  • कॉरपोरेट एवं शेयर बाज़ार विनियमन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव

सरकार का कहना है कि ये विधेयक विकास, पारदर्शिता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिहाज से आवश्यक हैं।
लेकिन विपक्ष का आरोप है कि सरकार जल्दबाज़ी में कानून पास कर मजबूर और कमज़ोर बहस कराने की कोशिश करती है। ऐसे में सत्र के दौरान इन विधेयकों पर भी भारी गरमाहट देखने को मिल सकती है।


SIR: सत्र का सबसे विस्फोटक मुद्दा

बंगाल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे चुनावी राज्यों में SIR (Special Revision of Electoral Roll) पर राजनीतिक तूफ़ान पहले ही उठ चुका है। विपक्ष का आरोप है कि SIR के नाम पर मतदाता सूची में गड़बड़ी कराई जा रही है—कहीं नाम गायब, कहीं संदिग्ध जोड़, कहीं राजनीतिक लाभ के लिए हेरफेर।

विपक्ष संसद में इस मुद्दे को केंद्र में रखकर सरकार पर तीखे हमले की तैयारी कर चुका है।

लेकिन सरकार का तर्क है—

  • SIR का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है
  • चुनाव आयोग पूर्णतः संवैधानिक संस्था है
  • उसकी जवाबदेही संसद निर्धारित नहीं कर सकती

सरकार स्पष्ट संकेत दे रही है कि SIR पर सीधी बहस नहीं होगी।
हालांकि उसने यह भी कहा है कि यदि विपक्ष चुनाव सुधारों पर व्यापक बहस का प्रस्ताव लाए, तो उस पर विचार किया जा सकता है।

यह सियासी पैंतरा बताता है कि सरकार मुद्दे को टालकर विपक्ष के कांग्रेस-केंद्रित आक्रामक रुख को कमज़ोर करना चाहती है।


आज होंगी तीन बड़ी बैठकें: दिनभर की राजनीति में हलचल

1️⃣ राज्यसभा बिजनेस एडवाइजरी कमेटी – शाम 4 बजे

यह बैठक पहले सप्ताह के एजेंडे को अंतिम रूप देगी। सबसे बड़े टकराव SIR को लेकर होने की संभावना है।
विपक्ष की प्राथमिक मांग: ‘पहले SIR पर बहस, फिर बाकी काम।’

2️⃣ लोकसभा BAC – शाम 5 बजे

लोकसभा का एजेंडा इस बैठक में तय होगा।
चूंकि लोकसभा में विपक्ष संख्या में कमज़ोर है, वह रणनीति के जरिए सदन की कार्यवाही को प्रभावित करना चाहता है।

3️⃣ कांग्रेस संसदीय रणनीति समूह – शाम 5 बजे, 10 जनपथ

सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी में कांग्रेस अपनी ‘मोदी सरकार पर निर्णायक हमला’ रणनीति को अंतिम रूप देगी।
कर्नाटक की राजनीति पर भी डीप चर्चा होने की उम्मीद है।

इन बैठकों के फैसले ही तय करेंगे कि सत्र की शुरुआत कितनी गर्म और कितनी टकरावपूर्ण होगी।


विपक्ष के पास मुद्दों की लंबी सूची — सरकार के लिए बड़ी चुनौती

1. दिल्ली ब्लास्ट

हालिया धमाके पर विपक्ष सरकार से जवाब मांगने वाला है।
सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय पर सवाल उठेंगे।

2. बढ़ता प्रदूषण संकट

दिल्ली–NCR में AQI ‘Severe’ स्तर पर।
विपक्ष का आरोप: केंद्र व राज्य सरकारें एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रही हैं।

3. वोट चोरी और चुनावी अनियमितताएँ

SIR ने पहले ही इस मुद्दे को नेशनल डिबेट बना दिया है।
विपक्ष इसे ‘लोकतंत्र पर हमला’ करार देगा।

4. बीएलओ की आत्महत्या

बीएलओ की आत्महत्या के मामले में विपक्ष सरकार पर ‘अत्यधिक कार्यभार और दबाव’ का आरोप लगाएगा। सदन में इन मुद्दों पर भावनात्मक और तीखी बहस की पूरी संभावना है।


सरकार का ‘राष्ट्रवाद कार्ड’: वंदे मातरम पर विशेष बहस का विचार

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार सरकार सदन में
“वंदे मातरम्” पर एक विशेष बहस
लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार—

  • यह बहस विपक्ष, खासकर कांग्रेस, को रक्षित या रक्षात्मक स्थिति में धकेल देगी
  • सरकार राष्ट्रवाद के जरिए विपक्ष की तीखी आलोचनाओं को कमज़ोर करना चाहती है

यदि ऐसा होता है, तो सदन का वातावरण एकदम नए मोड़ पर जा सकता है।


निष्कर्ष: शीतकालीन सत्र होगा ‘राजनीतिक संघर्ष का अखाड़ा’

सत्र शुरू होने से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ऐसे तल्ख रिश्ते शायद ही पहले दिखे हों। जहाँ सरकार अपने 10 बड़े विधेयकों और राष्ट्रवादी एजेंडे पर आगे बढ़ने को तैयार है, वहीं विपक्ष SIR, सुरक्षा, प्रदूषण और मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों के सहारे सरकार पर सीधा हमला बोलने को तैयार बैठा है।

कांग्रेस अपने रणनीतिक समूह में आक्रामक योजना बना रही है, जबकि सरकार भी विपक्ष के बाणों को रोकने के लिए नए ‘राजनीतिक ढाल’ तैयार कर चुकी है।

अब निगाहें टिकी हैं सोमवार की सर्वदलीय बैठक और पहले दिन की कार्यवाही पर— क्या सदन सुचारू चलेगा, या हंगामे के बीच टकराव ही सत्र की पहचान बनेगा? यह स्पष्ट है कि आने वाले 20 दिन भारतीय संसदीय राजनीति के लिए बेहद अहम और ऐतिहासिक होने वाले हैं।

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