देहरादूनफीचर्ड

असहायों के लिए वरदान बना देहरादून प्रशासन का “राइफल क्लब फंड”: अब तक 15 लाख की मदद, 43 जरूरतमंद हुए लाभान्वित

देहरादून | 29 नवंबर 2025: देहरादून जिला प्रशासन का राइफल क्लब फंड आज प्रदेश में मानवीय सहयोग का प्रतीक बन गया है। जिस फंड का उपयोग कभी केवल लग्ज़री कैटेगरी के ट्रांजेक्शन—जैसे हथियार लाइसेंस, नवीनीकरण और एनओसी—के लिए होता था, उसे जिलाधिकारी सविन बंसल ने पहली बार असहाय, निर्बल और निर्धन लोगों की सहायता के लिए एक प्रभावी सामाजिक हथियार में बदल दिया है। परिणाम यह है कि अब तक जिले के 43 पात्र लोगों को कुल 15 लाख रुपये की आर्थिक सहायता सीधे इसी फंड से प्रदान की जा चुकी है।

शनिवार को जिलाधिकारी ने राइफल क्लब फंड से 7 नए लाभार्थियों को 1.75 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की। प्रत्येक लाभार्थी को 25-25 हजार रुपये के चेक उपलब्ध कराए गए। यह सहायता विशेष रूप से उन लोगों को दी गई है जो आर्थिक तंगी, बीमारी या पारिवारिक संकट से जूझ रहे हैं।


कैंसर पीड़ित महिलाओं को नई उम्मीद की किरण

आज वितरित की गई सहायता में दो कैंसर पीड़ित महिलाएँ—रेनू सिंह और जुनतारा देवी—शामिल हैं, जिन्हें उपचार के लिए 25-25 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक मदद दी गई। दोनों महिलाएँ लंबे समय से बीमारी से जूझ रही थीं और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उपचार में कठिनाइयों का सामना कर रही थीं।

डीएम बंसल ने कहा कि “ऐसे मामलों में छोटी-सी आर्थिक सहायता भी जीवन बचाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।”


राइफल फंड: लग्ज़री ट्रांजेक्शन से लेकर मानवीय सेवा तक का सफर

राइफल क्लब फंड 1959 से संचालित है और सामान्यतः इसका उपयोग निम्न कार्यों के लिए किया जाता था:

  • नए शस्त्र लाइसेंस जारी करना
  • लाइसेंस पंजीकरण और नवीनीकरण
  • गन लाइसेंस के लिए एनओसी
  • शस्त्र श्रेणी परिवर्तन
  • समयावधि विस्तार
  • शस्त्र क्रय अनुमति

इस फंड को डीएम सविन बंसल ने जनहित में एक अभिनव मॉडल के रूप में उपयोग करना शुरू किया है। उनकी पहल है कि सरकारी योजनाओं से वंचित, निर्धन और संकटग्रस्त लोगों को इस फंड के माध्यम से तत्काल सहायता प्रदान की जाए।

जिलाधिकारी की इसी दूरदर्शी पहल के कारण यह फंड आज CSR जैसी सामाजिक सहायता गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रमुख माध्यम बन गया है।


नए लाभार्थी: संकट से उबरने का सहारा

शनिवार को आर्थिक सहायता पाने वाले अन्य लाभार्थियों में शामिल हैं:

1. शोभा रावत — दिव्यांग पुत्र की जिम्मेदारी

मोथरोवाला निवासी विधवा शोभा रावत के पति का देहांत हो चुका है और वे दिव्यांग पुत्र के अकेले सहारे हैं। स्वरोजगार शुरू करने के लिए उन्हें 25,000 रुपये की सहायता दी गई।

2. सुशीला देवी — वृद्ध, एकाकी, सहारे की आवश्यकता

लोहिया नगर निवासी सुशीला देवी वृद्ध और विधवा हैं। उनके एक पुत्र की भी मृत्यु हो चुकी है। आर्थिक रूप से पूरी तरह असहाय सुशीला देवी को भरण-पोषण हेतु 25,000 रुपये प्रदान किए गए।

3. सुरभि शर्मा — बच्चों के लालन-पालन की चुनौती

संस्कृति लोक कॉलोनी निवासी विधवा सुरभि शर्मा घर चलाने में असमर्थ थीं। बच्चों की शिक्षा और लालन-पालन की जिम्मेदारी अकेले संभालते हुए उन्हें स्वरोजगार हेतु 25,000 रुपये की सहायता मिली।

4. पूजा देवी — जीवन की दोहरी क्षति के बाद सहारा

नालापानी निवासी पूजा देवी के पति और पुत्र दोनों का देहांत हो चुका है। ग़रीबी और शारीरिक-मानसिक संकट से जूझ रहीं पूजा को जीवन यापन के लिए 25,000 रुपये दिए गए।

5. शकुंतला देवी — कठिन आर्थिक स्थिति से संघर्ष

साईं वाटिका, चंदाताल की शकुंतला देवी खराब आर्थिक स्थिति के कारण बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं कर पा रही थीं। उन्हें भी 25,000 रुपये की सहायता प्रदान की गई।


राइफल फंड से पहले ही कई लोगों को मिली मदद

जिले में अब तक राइफल क्लब फंड से जिन 43 लाभार्थियों को सहायता मिली है, उनमें शामिल हैं:

  • बाला बाड़ी मरम्मत (प्रेमनगर झुग्गी बस्ती) – ₹1,30,000
  • नीतू दुर्गा देवी (त्यूनी) — बिजली बिल चुकाने हेतु ₹18,000
  • अनाथ अदिति — पिता के ऋण भुगतान हेतु ₹50,000
  • शमीमा (भगत सिंह कालोनी) — स्वरोजगार सहायता ₹30,000
  • सरस्वती शिशु मंदिर प्रबंध समिति, भोगपुर — बच्चों के लिए वाहन खरीद हेतु ₹5,73,950

इन सबके अलावा भी कई आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को छोटे और मध्यम स्तर की सहायता प्रदान की गई है।


“असहाय को मुख्यधारा से जोड़ना ही लक्ष्य”—जिलाधिकारी

कार्यक्रम में मौजूद सभी लाभार्थियों को चेक प्रदान करते हुए जिलाधिकारी ने कहा: “हम जानते हैं कि यह धनराशि बड़ी समस्याओं का पूर्ण समाधान नहीं है, लेकिन आर्थिक सहयोग से पीड़ा कम करने की हमारी कोशिश जरूर सफल हो सकती है। हमारा लक्ष्य है कि समाज का कोई भी व्यक्ति अकेला या असहाय महसूस न करे।”

डीएम ने उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी और तहसील टीम की विशेष सराहना की, जिन्होंने लाभार्थियों का सही तरीके से चिन्हिकरण कर सहायता सुनिश्चित की।


मुख्यमंत्री के संकल्प को आगे बढ़ाती पहल

जिलाधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार समाज के वंचित वर्गों की पहचान कर उन्हें उपलब्ध सरकारी योजनाओं के साथ-साथ वैकल्पिक फंड (जैसे राइफल फंड) से भी सहयोग दिया जा रहा है।

सरकार की नीति है कि—“कोई भी गरीब, असहाय या दुर्बल व्यक्ति आवश्यकता पड़ने पर सहायता से वंचित न रहे।” राइफल क्लब फंड इसी संकल्प का वास्तविक रूप बनता दिख रहा है।


अंत में

राइफल क्लब फंड का यह मानवीय उपयोग देहरादून में एक सामाजिक बदलाव का उदाहरण बनकर उभरा है। जिस साधन का कभी सीमित प्रशासनिक उपयोग था, उसे जनसेवा के प्रभावी माध्यम के रूप में परिवर्तित कर जिला प्रशासन ने नई मिसाल पेश की है। इससे न केवल निर्धनों की सहायता हुई है, बल्कि समाज में प्रशासन की संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व की भावना भी मजबूत हुई है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button