
नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव में उम्मीद के अनुरूप प्रदर्शन न कर पाने के बाद कांग्रेस आलाकमान ने सोमवार को दिल्ली में पार्टी नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। बैठक का उद्देश्य चुनावी रणनीति, टिकट वितरण और प्रदर्शन में कमियों की समीक्षा करना था। इस बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी की भी संभावना थी। लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही माहौल गर्म हो गया और कांग्रेसी नेताओं के बीच जोरदार बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते गंभीर विवाद में बदल गई।
सूत्रों का दावा—टिकट वितरण को लेकर दो नेताओं में तीखी नोकझोंक
सूत्रों के अनुसार बैठक शुरू होने से पहले ही बिहार चुनाव में “बाहरी उम्मीदवारों” को टिकट दिए जाने को लेकर नेताओं के बीच आरोप-प्रत आरोप शुरू हो गए। बहस इतनी बढ़ी कि दो नेताओं के बीच गाली-गलौज हुई और मामला धमकियों तक पहुंच गया। बताया जा रहा है कि पूरा विवाद तेजी से इतना बिगड़ गया कि एक नेता ने दूसरे को “गोली मारने” तक की धमकी दे दी।
वैशाली के उम्मीदवार बनाम पूर्णिया के प्रत्याशी
सूत्रों की मानें तो यह विवाद कांग्रेस के वैशाली से उम्मीदवार संजीव सिंह और पूर्णिया से प्रत्याशी रहे जितेंद्र यादव के बीच हुआ। दोनों नेता बैठक से पहले एक ही टेबल पर बैठे थे और बिहार चुनाव में टिकट चयन को लेकर बहस शुरू हो गई। कुछ ही मिनटों में यह बहस तीखी झड़प में बदल गई। इसी दौरान संजीव सिंह ने कथित रूप से जितेंद्र यादव को गोली मारने की धमकी दी, जिसके बाद कुछ वरिष्ठ नेताओं ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला।
पप्पू यादव ने दिया विवाद से इंकार
घटना को लेकर जब जन अधिकारी पार्टी के प्रमुख और कांग्रेस के सहयोगी नेता पप्पू यादव से सवाल किया गया तो उन्होंने ऐसी किसी घटना से ही इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया में चल रही खबरें “अतिरंजित” हो सकती हैं और बैठक शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित की गई थी।
संजीव सिंह ने भी आरोपों को बताया निराधार
विवाद में नाम आने के बाद कांग्रेस नेता संजीव सिंह ने भी सफाई दी और कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा:
“मीडिया में चल रही खबरें कि मैंने किसी को जान से मारने की धमकी दी है—पूरी तरह झूठी हैं। कांग्रेस कार्यालय सुरक्षित है और बैठक में ऐसा कोई विवाद नहीं हुआ। इन अफवाहों पर ध्यान न दें।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका किसी से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है और पार्टी कार्यालय में अनुशासन हमेशा बरकरार रहता है।
बैठक का उद्देश्य हुआ पीछे, विवाद बना सुर्खी
कांग्रेस नेतृत्व बिहार में चुनावी कमजोरियों की समीक्षा करना चाहता था, लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही हुए विवाद ने पूरे सत्र का फोकस बदल दिया। पार्टी सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के पहुंचने तक स्थिति को शांत कर दिया गया, लेकिन यह घटना बैठक का मुख्य चर्चा बिंदु बन गई।
आलाकमान सख्त—जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव
बताया जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। पार्टी आंतरिक अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपना सकती है और मामले की जांच के बाद संबंधित नेताओं पर कार्रवाई भी संभव है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि बिहार चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के बाद कांग्रेस किसी भी तरह की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करना चाहती।



