
नई दिल्ली | 27 नवंबर: दिल्ली-एनसीआर एक बार फिर जहरीली हवा की गिरफ्त में है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार ‘‘गंभीर’’ श्रेणी में दर्ज हो रहा है, जिससे लोगों के दैनिक जीवन और स्वास्थ्य पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। ताज़ा सर्वेक्षण में सामने आया है कि राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में रहने वाले 80 प्रतिशत से अधिक नागरिक किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं, जबकि 68 प्रतिशत लोगों को प्रदूषण के कारण चिकित्सकीय सहायता लेनी पड़ी है।
यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि दिल्ली-एनसीआर की हवा, देश में प्रदूषण पर चल रहे बहस के बावजूद, लगातार खतरनाक स्तर पर बनी हुई है।
तेजी से बिगड़ रही हवा, लेकिन सुधार के संकेत नहीं
नवंबर के अंतिम सप्ताह में तापमान में गिरावट, हवा की कम रफ़्तार वाउंड इनवर्ज़न (हवा का नीचे फंस जाना) जैसे कारणों से प्रदूषण का स्तर तेज़ी से बढ़ा है। सोमवार और मंगलवार को दिल्ली का औसत AQI 400 के पार रहा, जबकि कई इलाकों—जैसे आनंद विहार, आज़ादपुर, पंजाबी बाग, नोएडा सेक्टर-62 और फरीदाबाद एनआईटी—में PM2.5 का स्तर 500 से ऊपर दर्ज किया गया। विशेषज्ञ इसे ‘‘आपातकालीन’’ स्थिति करार दे रहे हैं।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) के अनुसार, इस स्तर की हवा को कुछ घंटों तक भी सांस में लेना शरीर के लिए हानिकारक है, जबकि दिल्ली-एनसीआर के लाखों लोग इसे रोज़ झेल रहे हैं।
सर्वेक्षण में लोगों ने बताए लगातार परेशान करने वाले लक्षण
सर्वे के अनुसार, जिन नागरिकों ने स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत की, उनमें निम्न लक्षण प्रमुख रहे—
- लगातार और सूखी खांसी
- गले में जलन और खराश
- सांस लेने में तकलीफ़, खासकर अस्थमा रोगियों में
- आंखों में लालपन, खुजली व पानी आना
- सिरदर्द और माइग्रेन
- कमजोरी और थकान
- नींद पूरी न होना
- बच्चों में एलर्जिक प्रतिक्रिया और तेज़ खांसी
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि PM2.5 और PM10 के छोटे-छोटे कण शरीर में गहराई तक पहुंचकर फेफड़ों के ऊतकों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे न केवल अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के मामले बढ़ रहे हैं, बल्कि लंबे समय में हार्ट डिसीज़ का खतरा भी बढ़ सकता है।
68% नागरिकों को डॉक्टर के पास जाना पड़ा
यह सर्वेक्षण बताता है कि हर 10 में से 7 लोग पिछले कुछ हफ्तों के भीतर डॉक्टर से परामर्श लेने को मजबूर हुए।
अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों—एलएनजेपी, जीटीबी, सफदरजंग—ने बताया है कि बीते 10 दिनों में श्वसन संबंधी मामलों में 30–40% वृद्धि दर्ज की गई है।
कई निजी अस्पतालों और क्लीनिकों ने यह भी पुष्टि की है कि:
- इनहेलर और स्टेरॉयड आधारित दवाइयों की मांग बढ़ी है
- एलर्जी और फेफड़ों की सूजन जैसी समस्याओं के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं
- बच्चों में ब्रोंकोस्पाज्म के लक्षण अधिक देखने को मिल रहे हैं
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि प्रदूषित हवा का असर कुछ लोगों में तुरंत दिख जाता है, जबकि कुछ लोगों में यह समस्या धीरे-धीरे गंभीर बनती है।
बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे अधिक असर
स्कूल प्रशासन ने कई जगह आउटडोर गतिविधियों पर रोक लगा दी है। कुछ निजी स्कूलों ने एक बार फिर ऑनलाइन क्लास की व्यवस्था भी शुरू की है।
विशेष रूप से बच्चों में:
- एलर्जी
- अस्थमा
- खांसी
- सर्दी-जुखाम
जैसे लक्षण तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
बुजुर्गों में COPD, हार्ट डिज़ीज़ और ब्लड प्रेशर के मरीज प्रभावित हुए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जिन मरीजों को पहले हल्की समस्या होती थी, अब उनमें गंभीर लक्षण देखने को मिल रहे हैं।
लोग अपने स्तर पर उठा रहे हैं ये कदम
सर्वे के अनुसार दिल्ली-एनसीआर के लोगों ने बचाव के लिए यह कदम उठाए:
- घरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल
- N95 और N99 मास्क का नियमित उपयोग
- सुबह-सुबह बाहर निकलने से परहेज
- दवाइयों, कफ-सीरप और भाप लेने की प्रवृत्ति बढ़ना
- बच्चों व बुजुर्गों की मूवमेंट सीमित करना
- बंद कमरे में रहने से भी परेशानियाँ बढ़ने पर वेंटिलेशन का ध्यान रखना
हालांकि नागरिकों का कहना है कि ये उपाय केवल अस्थायी राहत दे रहे हैं।
सरकार और एजेंसियों ने बढ़ाई सख्ती, लेकिन राहत अभी दूर
दिल्ली सरकार ने पिछले सप्ताह GRAP (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) के तहत कई प्रतिबंध लागू किए हैं। इनमें शामिल हैं:
- निर्माण एवं तोड़फोड़ गतिविधियों पर रोक
- कोयला आधारित उद्योगों की मॉनिटरिंग
- ट्रैफिक के दबाव को कम करने पर जोर
- डीजल जनरेटर बंद
- स्कूलों में संवेदनशील बच्चों के लिए विशेष निर्देश
पर्यावरण मंत्रालय का कहना है कि हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए पड़ोसी राज्यों—हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब—की ओर से भी कड़े कदम जरूरी हैं, क्योंकि यह क्षेत्र एक ही एयर-शेड में आता है।
लोगों की चिंता: “हर साल वही हालात, कोई स्थायी समाधान नहीं”
नागरिकों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि दिल्ली-एनसीआर में हवा की समस्या अब मौसमी मुसीबत बन चुकी है।
लोगों का कहना है:
- पराली जलने का मुद्दा वर्षों से जस का तस
- सर्दियों में निर्माण रोकना भी हर बार अस्थायी उपाय
- वाहनों का बढ़ता दबाव
- औद्योगिक उत्सर्जन पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं
कुछ लोग कहते हैं कि साफ हवा अब ‘‘लग्जरी’’ बनती जा रही है, जबकि स्वास्थ्य पर इसका असर व्यापक स्तर पर दिखाई दे रहा है।
अगले कुछ दिनों में राहत की संभावना?
मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि अगले 72 घंटों में हवा की रफ्तार थोड़ी बढ़ सकती है, जिससे स्थिति में मामूली सुधार संभव है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक बड़े स्तर पर समाधान नहीं लागू किए जाते, तब तक दिल्ली-एनसीआर को इस जहरीली हवा से जल्द राहत मिलना मुश्किल है।



