
नई दिल्ली/लखनऊ/सहारनपुर: फरीदाबाद आतंकी मॉड्यूल मामले में उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) को बड़ी सफलता हाथ लगी है। सहारनपुर से गिरफ्तार आरोपी डॉक्टर आदिल अहमद डार के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में एजेंसियों को कई नए सुराग मिले हैं, जो संभावित हनी ट्रैप मॉड्यूल और उसके नेटवर्क को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी के फोन से कई कश्मीरी लड़कियों के फोटोग्राफ और वीडियोज बरामद हुए हैं। जांच एजेंसियां आशंका जता रही हैं कि आदिल अन्य डॉक्टरों और प्रभावशाली लोगों को हनी ट्रैप करने की तैयारी में था, ताकि उन्हें ब्लैकमेल कर आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा सके।
ATS अब इस पूरे एंगल की बारीकी से जांच कर रही है।
क्या किसी को पहले ही हनी ट्रैप किया गया था?
जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि:
- क्या आदिल ने पहले से किसी को अपने जाल में फंसाया था?
- क्या मिलने वाले फोटो-वीडियो किसी विशिष्ट योजना का हिस्सा थे?
- क्या इस नेटवर्क में अन्य लोग भी जुड़े हुए थे?
जानकारी यह भी मिली है कि आदिल सहारनपुर शहर के बाहरी इलाकों में जमीन खरीदने की कोशिश कर रहा था, ताकि वहां “आतंक की फैक्ट्री” जैसा ठिकाना स्थापित किया जा सके। इसीलिए उसे प्रभावशाली लोगों तक पहुंचने की जरूरत थी, जिससे हनी ट्रैप मॉडल उसके लिए एक हथियार बन सकता था।
लखनऊ में एक और डॉक्टर से पूछताछ—डॉक्टर शाहीन बनी जांच का मुख्य केंद्र
जांच में एक और अहम कड़ी डॉक्टर शाहीन के रूप में सामने आई है, जिसे फरीदाबाद आतंकी मॉड्यूल की मुख्य किरदार बताया जा रहा है। डॉक्टर शाहीन और उसके भाई डॉक्टर परवेज की भूमिका को लेकर ATS कई कोणों से जांच कर रही है।
लखनऊ के एरा मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के एक डॉक्टर से भी ATS ने फोन पर पूछताछ की है। यह डॉक्टर कानपुर के उसी मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई कर चुका है, जहां डॉक्टर शाहीन पढ़ाया करती थी। एजेंसी जानना चाहती है कि दोनों के बीच किस प्रकार का संपर्क था और यह संपर्क कब तक जारी रहा।
डॉक्टर परवेज की भूमिका भी जांच के घेरे में
सूत्रों के अनुसार:
- डॉक्टर शाहीन का भाई डॉक्टर परवेज भी कानपुर के उसी मेडिकल कॉलेज से कुछ कोर्स कर चुका है।
- इसी वजह से ATS ने एरा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर से डॉक्टर परवेज के संभावित संपर्क, गतिविधियों और व्यवहार से जुड़ी जानकारियां जुटाई हैं।
ATS की जांच यह भी समझने की कोशिश कर रही है कि डॉक्टर शाहीन और डॉक्टर परवेज दोनों आदिल अहमद डार के मॉड्यूल से किस प्रकार जुड़े हुए थे—क्या वे केवल परिचित थे या आतंकी गतिविधियों में कोई सक्रिय भूमिका निभा रहे थे?
आगे की जांच: डिजिटल सबूतों पर फोकस
एजेंसी अब:
- मोबाइल फोन में मिले फोटो-वीडियो के मेटाडाटा
- कॉल रिकॉर्ड
- चैट इतिहास
- डिजिटल भुगतान व लोकेशन ट्रेल
की फॉरेंसिक जांच पर जोर दे रही है। ATS यह भी समझने की कोशिश कर रही है कि यह मॉड्यूल स्थानीय नेटवर्क तैयार कर रहा था या किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन के निर्देश पर काम कर रहा था।
पूरे मॉड्यूल के उजागर होने की संभावना
जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल सबूतों के आधार पर नई गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। फरीदाबाद मॉड्यूल सिर्फ एक हिस्सा था और उसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका है।



