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Bollywood News: करिश्मा कपूर की बेटी की हाई कोर्ट में अपील: “दो महीने से नहीं मिली विश्वविद्यालय की फीस”, परिवारिक विवाद फिर सुर्खियों में

The Hill India News
Last updated: November 15, 2025 2:58 am
The Hill India News
Published: November 15, 2025
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नई दिल्ली, 15 नवंबर। बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर और उनके पूर्व पति संजय कपूर के बीच लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद ने शुक्रवार को एक नया मोड़ ले लिया। दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान उनकी बेटी—जो इस समय एक अमेरिकी विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं—ने यह दावा किया कि उनकी दो महीने की विश्वविद्यालय फीस का भुगतान रुका हुआ है, जिसके चलते उनकी पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।

Contents
न्यायालय की कड़ी टिप्पणी: “सुनवाई को नाटकीय न बनाएं”शिक्षा शुल्क पर सवाल क्यों उठा? पारिवारिक विवाद की पृष्ठभूमिविदेश में पढ़ रही छात्रा के लिए फीस रुकना कितना बड़ा संकट?प्रिया कपूर की तरफ़ से क्या कहा गया?करिश्मा कपूर का पक्ष: शिक्षा में व्यवधान “अनुचित दबाव”अदालत ने शिक्षा शुल्क और भरण-पोषण को केस से अलग रखने पर जोर दियापहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों में उठ चुका है शिक्षा खर्च का सवालअगली सुनवाई में अदालत मांगेगी स्पष्ट स्थितिकानूनी लड़ाई के बीच शिक्षा को प्राथमिकता

यह दावा न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की अदालत में किया गया, जहां सुनवाई के दौरान बच्ची और उसके पक्ष के वकीलों ने यह मुद्दा उठाया। लड़की ने कहा कि उनके शैक्षणिक संस्थान को लगातार दो महीनों से फीस प्राप्त नहीं हुई, जिससे न केवल प्रशासनिक मुश्किलें खड़ी हो गई हैं बल्कि उनके कोर्स रजिस्ट्रेशन और शैक्षणिक प्रगति पर भी असर पड़ने की आशंका है।


न्यायालय की कड़ी टिप्पणी: “सुनवाई को नाटकीय न बनाएं”

मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने दोनों पक्षों को यह स्पष्ट निर्देश दिया कि अदालत इस मामले को अनावश्यक विवाद का रंग नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा:

“मैं नहीं चाहती कि यह सुनवाई नाटकीय बने। शिक्षा से जुड़े मामलों पर समय पर ध्यान दिया जाना चाहिए। ऐसी बातों को अदालत के बाहर ही हल किया जाना चाहिए।”

जज ने प्रिया कपूर (दिवंगत संजय कपूर की पत्नी) के वकील से विशेष रूप से कहा कि फीस भुगतान जैसे संवेदनशील और प्राथमिक मामलों को तुरंत संबोधित किया जाए ताकि अगली सुनवाई में इस तरह का मुद्दा दोबारा अदालत के सामने न आए।


शिक्षा शुल्क पर सवाल क्यों उठा? पारिवारिक विवाद की पृष्ठभूमि

करिश्मा कपूर और संजय कपूर के बीच के विवाद किसी से छिपे नहीं हैं। वर्षों से दोनों पक्ष—

  • कस्टडी,
  • वित्तीय दायित्व,
  • अलिमोनी
  • और बच्चों के खर्च

को लेकर अदालत में अलग-अलग मुकदमों में उलझे हैं।

संजय कपूर के निधन के बाद उनकी संपत्ति, चल-अचल धन, और बच्चों के भरण-पोषण से जुड़े मामले और जटिल हो गए। इसी प्रक्रिया के बीच, शिक्षा शुल्क का यह नया मुद्दा सामने आया है, जो बताता है कि विवाद का असर सीधे बच्चे की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ रहा है, जिसे अदालत ने गंभीरता से लिया।


विदेश में पढ़ रही छात्रा के लिए फीस रुकना कितना बड़ा संकट?

अमेरिका के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे विदेशी छात्रों के लिए किसी भी प्रकार की फीस बकाया—

  • कोर्स पंजीकरण रोक सकता है
  • कक्षाओं में भागीदारी बाधित कर सकता है
  • छात्रावास और लाइब्रेरी सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं
  • और यदि समस्या लंबे समय तक चली, तो वीज़ा स्थिति पर भी असर पड़ सकता है

इसी दृष्टिकोण से अदालत ने इस मुद्दे को “शिक्षा से जुड़ा संवेदनशील विषय” माना और तत्काल समाधान पर जोर दिया।


प्रिया कपूर की तरफ़ से क्या कहा गया?

दिवंगत संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर की तरफ से पेश हुए वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि वे इस मामले में जल्द ही स्पष्ट स्थिति प्रस्तुत करेंगे और फीस भुगतान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

अदालत ने कहा कि—

“भले ही परिवारिक विवाद चल रहा हो, लेकिन बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।”

न्यायाधीश ने यह भी संकेत दिया कि अदालत ऐसे मामलों में कठोर रुख अपना सकती है, अगर यह पाया गया कि विवाद के चलते बच्चे की शिक्षा जानबूझकर प्रभावित की जा रही है।


करिश्मा कपूर का पक्ष: शिक्षा में व्यवधान “अनुचित दबाव”

करिश्मा कपूर के कानूनी प्रतिनिधियों ने कहा कि बच्चे की शिक्षा से जुड़ी ज़िम्मेदारियों को पूरा करने में हो रही देरी एक अनावश्यक और अनुचित दबाव है।

उन्होंने कहा कि—

  • यह फीस पहले नियमित रूप से दी जाती थी,
  • और अदालत के आदेशों में भी बच्चों के खर्च को प्राथमिकता देने की व्यवस्था है।

उनके अनुसार, खेल-तमाशों, कानूनी उलझनों या संपत्ति विवादों से बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित करना “कानूनी और नैतिक, दोनों रूप से गलत” है।


अदालत ने शिक्षा शुल्क और भरण-पोषण को केस से अलग रखने पर जोर दिया

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि परिवारिक विवादों को लेकर कई मुद्दे अदालत में आते हैं, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और बच्चों की सुरक्षा जैसी चीजों को न्यायिक संघर्ष से अलग-अलग और गंभीर श्रेणी में देखा जाना चाहिए।

जज ज्योति सिंह ने कहा कि ऐसे मुद्दों पर अदालत अपना समय खर्च नहीं करना चाहती, क्योंकि यह मामला कानूनी विवाद की तुलना में अधिक सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी से जुड़ा है।


पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों में उठ चुका है शिक्षा खर्च का सवाल

यह पहली बार नहीं है कि किसी हाई-प्रोफाइल परिवारिक विवाद में शिक्षा खर्च को लेकर मतभेद सामने आए हों।
इससे पहले भी—

  • तलाक,
  • कस्टडी,
  • भरण-पोषण,
  • और संपत्ति विभाजन

से जुड़े कई मामलों में बच्चों की फीस, विदेश में पढ़ाई और अन्य खर्चों पर अदालत को दखल देना पड़ा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाई-प्रोफाइल मामलों में अक्सर—

  • आर्थिक जिम्मेदारियों का बंटवारा,
  • संपत्ति विवाद
  • और पारिवारिक मतभेद

इस कदर उलझ जाते हैं कि बच्चों की बुनियादी जरूरतें भी प्रभावित हो जाती हैं।


अगली सुनवाई में अदालत मांगेगी स्पष्ट स्थिति

अदालत ने प्रिया कपूर के वकील को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक यह सुनिश्चित किया जाए कि फीस के भुगतान को लेकर कोई देरी न हो और स्थिति स्पष्ट रूप से अदालत के सामने रखी जाए।

न्यायालय का मकसद यह है कि फीस भुगतान को लेकर जो अस्थिरता है, वह दूर हो और छात्रा की पढ़ाई पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक असर न पड़े।


कानूनी लड़ाई के बीच शिक्षा को प्राथमिकता

करिश्मा कपूर की बेटी द्वारा उठाया गया यह मुद्दा सिर्फ एक हाई-प्रोफाइल परिवार का मामला नहीं है, बल्कि यह उन सैकड़ों परिवारों की वास्तविकता को दर्शाता है, जिनमें तलाक या संपत्ति विवाद के दौरान बच्चों की पढ़ाई अक्सर सबसे पहले प्रभावित होती है।

दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख साफ दर्शाता है कि—
“कानूनी विवाद बाद में, शिक्षा पहले।”

अदालत ने संकेत दे दिया है कि शिक्षा से जुड़े मामलों को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब देखना यह है कि अगली सुनवाई तक फीस भुगतान और वित्तीय दायित्वों को लेकर दोनों पक्ष अदालत के निर्देशों का पालन किस तरह करते हैं।

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