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The Hill India > Blog > देश > वाम दलों ने लाल किला धमाके में हुई जनहानि पर जताया दुख, गहन जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
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वाम दलों ने लाल किला धमाके में हुई जनहानि पर जताया दुख, गहन जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

The Hill India News
Last updated: November 11, 2025 2:46 am
The Hill India News
Published: November 11, 2025
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नई दिल्ली, 11 नवंबर: देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास रविवार शाम हुए कार धमाके में नौ लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने की घटना पर देशभर में राजनीतिक दलों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। वामपंथी दलों ने इस हादसे को “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी” बताते हुए घटना की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

Contents
माकपा महासचिव एम ए बेबी ने जताया गहरा दुखभाकपा ने भी जताया रोष, कहा — “सुरक्षा एजेंसियों की विफलता”वाम दलों ने एकजुट होकर जांच की मांग दोहराईघटना के राजनीतिक प्रभाव पर चर्चाजांच एजेंसियां कर रही हैं सघन पड़तालशोक और एकजुटता का माहौलवाम दलों ने शांति बनाए रखने की अपील कीराजनीतिक एकजुटता और जवाबदेही की मांग

धमाका रविवार शाम उस समय हुआ जब लाल किले के पास भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में एक कार में अचानक विस्फोट हो गया। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास खड़ी कई गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त हो गईं और क्षेत्र में अफरातफरी मच गई। जांच एजेंसियों के अनुसार, धमाके के पीछे आतंकी साजिश की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।


माकपा महासचिव एम ए बेबी ने जताया गहरा दुख

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम ए बेबी ने सोमवार को ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा,

“लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास कार धमाके की खबर से गहरा सदमा लगा है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं। यह एक बेहद गंभीर घटना है, जिसकी गहन जांच कर दोषियों को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए।”

बेबी ने कहा कि राजधानी के एक प्रमुख ऐतिहासिक स्थल के निकट इस तरह का विस्फोट न केवल दिल्ली, बल्कि पूरे देश की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि आतंकवाद और हिंसा की ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए खुफिया तंत्र को और अधिक मज़बूत किया जाए।


भाकपा ने भी जताया रोष, कहा — “सुरक्षा एजेंसियों की विफलता”

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के वरिष्ठ नेता डी. राजा ने एक बयान में कहा कि लाल किले जैसे ऐतिहासिक और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में विस्फोट होना ‘‘गंभीर सुरक्षा विफलता’’ है।

उन्होंने कहा,

“देश की राजधानी में इस तरह का विस्फोट बेहद चिंताजनक है। यह न केवल हमारी सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय की कमी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आतंकवादी ताकतें अभी भी सक्रिय हैं। सरकार को इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच करानी चाहिए और जनता के बीच विश्वास बहाल करना चाहिए।”

डी. राजा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह इस मामले में सभी तथ्यों को सार्वजनिक करे और जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करे।


वाम दलों ने एकजुट होकर जांच की मांग दोहराई

वाम दलों के साझा बयान में कहा गया है कि यह घटना “आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए गहरी चिंता का विषय” है और इसे किसी भी रूप में हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। बयान में कहा गया,

“दिल्ली में लाल किले जैसे संरक्षित स्थल के बाहर धमाका होना राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत गंभीर मामला है। यह आवश्यक है कि सभी एजेंसियां मिलकर जांच करें और यह पता लगाएं कि विस्फोटक सामग्री राजधानी तक कैसे पहुंची।”

वाम दलों ने केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों से यह भी मांग की है कि आतंकवाद की किसी भी संभावित साजिश को रोकने के लिए राज्य और केंद्र स्तर पर इंटेलिजेंस साझा तंत्र को और अधिक मज़बूत बनाया जाए।


घटना के राजनीतिक प्रभाव पर चर्चा

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पहले से ही सुरक्षा एजेंसियाँ कई आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर चुकी हैं। कुछ दिन पहले ही फरीदाबाद में 2,900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किया गया था, जिससे जुड़े कुछ संदिग्धों के नाम जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले से सामने आए थे।

विश्लेषकों के अनुसार, लाल किले धमाका और फरीदाबाद बरामदगी के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल जरूरी है, क्योंकि इससे आतंकी नेटवर्क की गहराई और उसकी पहुंच का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।


जांच एजेंसियां कर रही हैं सघन पड़ताल

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा और खुफिया ब्यूरो (आईबी) इस मामले की संयुक्त जांच कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच में विस्फोटक के नमूनों से संकेत मिले हैं कि इसमें उच्च क्षमता वाले सैन्य ग्रेड विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था।

एनआईए सूत्रों के अनुसार, कार का रजिस्ट्रेशन पुलवामा निवासी तारिक अहमद के नाम पर है, जिसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इस घटना के पीछे कथित रूप से जैश-ए-मोहम्मद के मॉड्यूल का हाथ होने की संभावना जताई गई है।


शोक और एकजुटता का माहौल

वाम दलों के अलावा कई अन्य राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। दिल्ली प्रदेश भाकपा सचिवालय ने कहा कि “दु:ख की इस घड़ी में पार्टी पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और हर स्तर पर सहायता की मांग करती है।”

माकपा नेता बृंदा करात ने एक बयान में कहा कि ‘‘आतंकवाद किसी भी रूप में समाज की शांति और सद्भाव के लिए घातक है। इसे किसी धर्म, समुदाय या क्षेत्र से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। सरकार को चाहिए कि वह दोषियों को कठोर सजा दिलाने के साथ-साथ नागरिकों में एकता और विश्वास बनाए रखे।”


वाम दलों ने शांति बनाए रखने की अपील की

वामपंथी नेताओं ने जनता से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें। उन्होंने कहा कि ‘‘ऐसी घटनाओं का उद्देश्य समाज में भय और विभाजन फैलाना होता है, जिसे नागरिकों की सजगता और एकता से ही विफल किया जा सकता है।”


राजनीतिक एकजुटता और जवाबदेही की मांग

लाल किला धमाके की गूंज सिर्फ सुरक्षा हलकों में ही नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी महसूस की जा रही है। वाम दलों ने इस घटना को ‘‘लोकतंत्र और नागरिक सुरक्षा के लिए खतरा’’ बताते हुए यह स्पष्ट किया है कि जांच में पारदर्शिता, जवाबदेही और त्वरित न्याय आवश्यक है।

राजधानी दिल्ली में हुए इस धमाके ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या देश का सुरक्षा ढांचा आतंकी साजिशों का समय रहते पता लगाने में पर्याप्त सक्षम है।

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