
देहरादून, उत्तराखंड | उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर अपनी मानवीय संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय क्षमता और लोकसेवा के प्रति अटूट समर्पण का परिचय दिया है। मुख्यमंत्री ने कोटद्वार (जिला पौड़ी गढ़वाल) की रहने वाली प्रीति नेगी से दूरभाष पर बातचीत कर उनके 12 वर्षीय पुत्र सुशांत नेगी, जो ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उसके उपचार में हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।
पत्र का लिया त्वरित संज्ञान
प्रीति नेगी ने हाल ही में मुख्यमंत्री कार्यालय को एक पत्र भेजकर अपने पुत्र के उपचार में सहायता की अपील की थी। पत्र प्राप्त होते ही मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से मामले का संज्ञान लिया और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए स्वयं नेगी से दूरभाष पर बात की। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने बालक सुशांत की बीमारी, अब तक हुए उपचार और आगे की चिकित्सा संबंधी आवश्यकताओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हर जरूरतमंद नागरिक के साथ खड़ी है और किसी भी परिवार को कठिन समय में अकेला महसूस नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने श्रीमती नेगी को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार सुशांत के उपचार में पूर्ण सहयोग करेगी और प्रशासनिक स्तर पर सभी जरूरी कदम तत्काल उठाए जाएंगे।
अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बालक के उपचार के लिए आर्थिक सहायता और अन्य आवश्यक सहयोग शीघ्र उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी योजनाओं या मुख्यमंत्री सहायता कोष से मिलने वाली हर संभव मदद समय पर प्रदान की जाए, ताकि बालक के उपचार में किसी प्रकार की बाधा या विलंब न हो।
मुख्यमंत्री कार्यालय से इस संबंध में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, चिकित्सा विभाग और जिला प्रशासन को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री धामी की संवेदनशीलता का एक और उदाहरण
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने कार्यकाल के दौरान कई बार मानवीय संवेदनशीलता और जनता के प्रति समर्पण का परिचय दे चुके हैं। चाहे आपदा प्रबंधन की स्थिति हो, किसी गरीब परिवार की मदद का मामला हो या किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे नागरिक की सहायता — मुख्यमंत्री ने हर बार व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप कर उदाहरण प्रस्तुत किया है।
बीते महीनों में भी उन्होंने राज्य के कई जिलों से आने वाले जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए स्वयं फोन पर वार्ता की और त्वरित सहायता उपलब्ध कराई। यही कारण है कि जनमानस के बीच मुख्यमंत्री धामी की छवि एक “सुलभ, संवेदनशील और सक्रिय जननेता” के रूप में स्थापित हुई है।
“सरकार जनता की है, जनता के लिए है”
बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि “सरकार का दायित्व केवल नीतियां बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर नागरिक तक सरकार की संवेदना और सहयोग पहुँचे। किसी भी असहाय व्यक्ति को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि वह अकेला है।”
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार का प्रयास है कि मानवता आधारित शासन प्रणाली को व्यवहारिक रूप में लागू किया जाए, जिसमें हर वर्ग की पीड़ा को समझकर उसका समाधान किया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि इस प्रकार के मामलों में त्वरित और मानवीय दृष्टिकोण से निर्णय लें।
जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे निर्णय लिए हैं, जिनका सीधा लाभ आम नागरिकों को मिला है। मुख्यमंत्री सहायता कोष, दीनदयाल उपाध्याय सहारा योजना, मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना और विभिन्न स्वास्थ्य सहायता योजनाओं के माध्यम से सरकार ने हजारों जरूरतमंद परिवारों को राहत पहुँचाई है।
इसी कड़ी में ब्लड कैंसर पीड़ित बालक सुशांत नेगी के उपचार के लिए मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया सहयोग का भरोसा न केवल एक परिवार के लिए राहत की किरण है, बल्कि यह पूरे राज्य के लिए संदेश है कि सरकार जनता की है, जनता के लिए है और जनता के बीच है।
जनता में बढ़ा विश्वास
मुख्यमंत्री के इस कदम से कोटद्वार क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में लोगों ने राहत और विश्वास व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता की सराहना की है। कई नागरिकों ने लिखा कि यह पहल केवल एक परिवार की सहायता नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की झलक है जो जनता की पीड़ा को अपना दर्द समझती है।
स्थानीय समाजसेवी संगठनों ने भी मुख्यमंत्री की पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार की संवेदनशीलता ही लोकतंत्र को जीवंत बनाती है।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह कदम एक बार फिर यह सिद्ध करता है कि उत्तराखंड सरकार का उद्देश्य केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं, बल्कि हर नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। सुशांत नेगी जैसे असहाय बालक के उपचार के लिए आगे बढ़ाया गया यह सहयोग राज्य में मानवीय शासन के नए मानक स्थापित करता है।
यह घटना न केवल एक संवेदनशील मुख्यमंत्री की कार्यशैली को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि सच्चे अर्थों में लोकसेवा वही है — जहाँ शासन का हर निर्णय मानवता की भावना से प्रेरित हो।



