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उत्तराखण्ड : चारधाम यात्रा के दौरान आपदाओं से निपटने के लिए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने ली बैठक

The Hill India News
Last updated: March 23, 2025 2:21 pm
The Hill India News
Published: March 23, 2025
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देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण ने आगामी चारधाम यात्रा को लेकर अपनी तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण और उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण द्वारा संयुक्त रूप से चारधाम यात्रा के दौरान संभावित आपदाओं का प्रभावी तरीके से सामना करने और चारधाम यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अप्रैल माह में मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा। सचिव आपदा प्रबन्धन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने मॉक ड्रिल के आयोजन को लेकर यूएसडीएमए, यूएलएमएमसी तथा यू-प्रिपेयर के विशेषज्ञों के साथ विभागीय बैठक कर सभी पहलुओं पर चर्चा की।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि चार धामयात्रा के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग तथा यूएसडीएमए के स्तर पर लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एनडीएमए से चारधाम यात्रा के दौरान आपदा केंद्रित मॉक ड्रिल को लेकर टेंटेटिव शेड्यूल प्राप्त हुआ है, उसे देखते हुए यूएसडीएमए ने अपनी तैयारियां प्रारंभ कर दी है। उन्होंने बताया कि जल्द ही इस संबंध में विभिन्न जनपदों तथा रेखीय विभागों के साथ भी बैठक कर मॉक ड्रिल की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

सुमन ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन एवं कुशल नेतृत्व में उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण सुरक्षित चारधाम यात्रा के लिए प्रतिबद्ध है तथा किसी भी आपदा की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा को हर हाल में सुनिश्चित करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान किसी भी आपदा की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पर्यटन विभाग, ट्रैफिक पुलिस, स्थानीय प्रशासन, पुलिस प्रशासन, परिवहन विभाग, यूकाडा, लोक निर्माण विभाग, बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन आदि विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

यूएसडीएमए का प्रयास है कि सभी विभागों के बीच आपसी समन्वय इतना मजबूत हो कि चारधाम यात्रा के दौरान किसी भी आपदा के समय बहुत कम समय में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि आपदाओं के दौरान रिस्पांस टाइम को कम किया जा रहा है और उत्तराखण्ड में रिस्पांस टाइम लगातार बेहतर हो रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी एनडीएमए और यूएसडीएमए द्वारा चारधाम यात्रा के सफल संचालन तथा आपदा के दौरान यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया था। पिछली बार मॉक ड्रिल में जो कमियां रह गई थी, इस बार उन्हें दूर किया जाएगा तथा एनडीएमए से गत वर्ष प्राप्त सुझावों को शामिल करते हुए सफल मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा।

उन्होंने यूएसडीएमए के विशेषज्ञों को मॉक ड्रिल के लिए जल्द से जल्द विभिन्न समितियां गठित करने तथा विभिन्न रेखीय विभागों की चारधाम यात्रा के दौरान क्या भूमिका है, इसे स्पष्ट करते हुए संबंधित विभागों को सूचित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न रेखीय विभागों तथा उनके अधिकारियों को यह जानकारी दी जाएगी कि आईआरएस प्रणाली के तहत आपदाओं का प्रभावी तरीके से सामना करने में किस विभाग तथा किस अधिकारी की क्या भूमिका है।

बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन श्री आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, वित्त नियंत्रक श्री अभिषेक आनंद, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, यूएलएमएमसी के निदेशक श्री शांतनु सरकार तथा यूएसडीएमए, यूएलएमएमसी और यू प्रिपेयर के विशेषज्ञ मौजूद रहे।

प्रत्येक धाम का बनेगा डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान-स्वरूप
देहरादून। बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी-प्रशासन श्री आनंद स्वरूप ने चारधाम यात्रा के दौरान किसी भी आपदा का प्रभावी तरीके से सामना करने के लिए प्रत्येक धाम का डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यदि आपदा प्रबंधन की दृष्टि से प्रत्येक धाम का ठोस आपदा प्रबंधन प्लान होगा तो विभिन्न प्रकार की आपदाओं का सामना बेहतर ढंग से किया जा सकेगा। साथ ही उन्होंने चार धाम यात्रा से संबंधित सभी जनपदों की एसओपी बनाने की बात कही। सचिव आपदा प्रबन्धन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि विभिन्न जनपदों के साथ आगामी बैठक में इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

पिछले साल के अनुभवों से सीख जरूरी-नेगी
देहरादून। अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी ने यूएसडीएमए के विशेषज्ञों को निर्देश दिए कि गत वर्षों चार धाम यात्रा के दौरान क्या-क्या आपदा आई हैं, कितने लोग इससे प्रभावित हुए, कितनी जनहानि हुईं, कहां-कहां पर मार्ग बंद हुए, भीड़ की स्थिति कैसी रही, किन-किन जगहों पर अत्यधिक जाम लगा, इन सबका विश्लेषण करने के निर्देश दिए ताकि इस बार उन क्षेत्रों में प्रभावी तरीके से काम किया जा सके। उन्होंने कहा कि गत वर्ष के अनुभवों का लाभ लेने की पूरी कोशिश की जाएगी।

तीन मुख्य जिले, चार ट्रांजिट जनपद
देहरादून। बता दें कि चारधाम यात्रा को लेकर उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग मुख्य जनपद हैं, जबकि टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार और देहरादून ट्रांजिट जिलों की श्रेणी में आते हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के टेंटेटिव शेड्यूल के अनुसार 14 अप्रैल को ओरिएंटेशन एवं कोऑर्डिनेशन कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जाएगा। 22 अप्रैल को टेबल टॉप एक्सरसाइज तथा 24 अप्रैल को मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी।

जिले बताएंगे, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कैसे की जाएगी
देहरादून। मॉक ड्रिल के दौरान विभिन्न रेखीय विभागों की चार धाम यात्रा प्रबंधन को लेकर तैयारियों को परखा जाएगा। इसके साथ ही यदि चारधाम यात्रा के दौरान भीड़ बढ़ने पर भगदड़ की स्थिति होती है, अतिवृष्टि के कारण भूस्खलन होता है और मार्ग बंद होते हैं, ट्रैफिक के दबाव के कारण सड़कों तथा बाजारों में जाम लगता है तो विभिन्न विभाग यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या-क्या करेंगे, इसकी रिहर्सल की जाएगी।
जनपदों को यह भी बताना होगा कि विभिन्न संसाधन जैसे हॉस्पिटल, हेलीपैड, वैकल्पिक मार्ग आदि कहां-कहां पर हैं तथा उनकी जीआईएस लोकेशन यूएसडीएमए के साथ साझा करनी होगी। मॉक ड्रिल में विभिन्न जनपदों के ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान को धरातल पर परखा जाएगा। भीड़ प्रबंधन को लेकर जिलों की क्या तैयारी है, इनका भी धरातलीय परीक्षण किया जाएगा।
यदि किसी प्रकार की आपदा तथा मार्ग बंद होने की स्थिति में यात्रियों को रोकना पड़े तो, उनकी सुरक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जाएगी तथा उन्हें सुरक्षित ठहराने के क्या-क्या इंतजाम किए जाएंगे, इस पर भी मॉक ड्रिल के दौरान न सिर्फ चर्चा की जाएगी बल्कि जनपदों को ग्राउंड जीरो पर यह सब करके भी दिखाना होगा। साथ ही भीड़ बढ़ने, मार्ग बंद होने तथा ट्रैफिक का दबाव अधिक होने पर रूट डायवर्जन प्लान भी जनपदों को बनाकर मॉक ड्रिल के दौरान उसके प्रभावशीलता का प्रदर्शन भी करना होगा।

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