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77वां गणतंत्र दिवस: CM धामी ने फहराया तिरंगा; ‘विकसित भारत’ के लिए दिलाई संविधान की शपथ, बोले- ‘कर्तव्य पथ पर बढ़ रहा उत्तराखंड’

देहरादून | 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर समूचा उत्तराखंड देशभक्ति के रंग में सराबोर है। देवभूमि के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सुबह देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास पर गरिमामय समारोह के बीच राष्ट्रीय ध्वज फहराया। तिरंगे को सलामी देने के बाद मुख्यमंत्री ने वहां उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रदेशवासियों को भारतीय संविधान की ‘उद्देशिका’ (Preamble) की शपथ दिलाई और लोकतांत्रिक मूल्यों को अक्षुण्ण रखने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘अंत्योदय’ का सपना हो रहा साकार

ध्वजारोहण के पश्चात अपने संबोधन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आज देश प्रधानमंत्री के ओजस्वी नेतृत्व में ‘सांस्कृतिक पुनरुत्थान’ और ‘आर्थिक सशक्तिकरण’ के नए युग में प्रवेश कर चुका है।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, “प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समाज के हर वर्ग—चाहे वह गरीब हो, युवा हो, महिला हो या किसान—सभी के उत्थान के लिए योजनाएं धरातल पर उतर रही हैं। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का मंत्र आज वैश्विक पटल पर भारत की नई पहचान बना रहा है।”


सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन के दौरान ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने कहा कि एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए केवल सरकार के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इसमें हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।

मुख्यमंत्री के संबोधन के मुख्य बिंदु:

  • दायित्वों का निर्वहन: मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी को अपने-अपने क्षेत्रों में ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा, यही राष्ट्र के प्रति सच्ची सेवा है।

  • आत्मनिर्भर उत्तराखंड: राज्य सरकार ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने के लिए ‘विकसित उत्तराखंड’ की अवधारणा पर तेजी से काम कर रही है।

  • समग्र विकास: शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और पर्यटन के क्षेत्र में राज्य नई ऊंचाइयों को छू रहा है।


देवभूमि में विकास की नई इबारत: ‘रजत दशक’ की ओर बढ़ते कदम

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि उत्तराखंड सरकार प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य के समग्र विकास के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने के लिए सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के सिद्धांत पर चल रही है।

अमृत काल का लक्ष्य: गणतंत्र दिवस के इस अवसर पर सीएम धामी ने उत्तराखंड के ‘रजत दशक’ (25वें वर्ष) के लक्ष्यों की चर्चा करते हुए कहा कि कनेक्टिविटी (सड़क, रेल और हवाई मार्ग) के सुधार से राज्य में निवेश के नए अवसर खुले हैं। उन्होंने विशेष रूप से ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) जैसे ऐतिहासिक कदमों का भी जिक्र किया, जो राज्य में सामाजिक समरसता और समानता को बढ़ावा दे रहे हैं।


संविधान की शपथ: लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षण

मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में जब मुख्यमंत्री ने संविधान की उद्देशिका पढ़ी, तो पूरा परिसर “भारत माता की जय” के नारों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान हमें अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी बोध कराता है। 77वें गणतंत्र दिवस का यह अवसर हमें याद दिलाता है कि हमारे पूर्वजों ने जिस लोकतंत्र का सपना देखा था, उसे संरक्षित करना हमारी जिम्मेदारी है।


युवा शक्ति और विकास का संगम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह संबोधन राज्य की युवा शक्ति को प्रेरित करने वाला रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन बनाकर ही सतत विकास हासिल किया जा सकता है। गणतंत्र दिवस के इस समारोह ने न केवल गौरवशाली अतीत को याद किया, बल्कि एक स्वर्णिम भविष्य का रोडमैप भी जनता के सामने रखा। समारोह के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए सुख-समृद्धि की कामना की।

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