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उत्तराखंड का ‘डिजिटल’ धमाका: मत्स्य पालन क्षेत्र में CBDC लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना, जानें कैसे बदलेगी किसानों की किस्मत

देहरादून: उत्तराखंड अपनी देवतुल्य छवि के साथ-साथ अब आधुनिक तकनीक और प्रगतिशील नीतियों के मामले में भी देश के अग्रणी राज्यों की सूची में मजबूती से खड़ा हो गया है। समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनने के बाद, अब उत्तराखंड ने वित्तीय तकनीक (FinTech) के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के नेतृत्व में उत्तराखंड, सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को मत्स्य विभाग की योजनाओं में एकीकृत करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। इस क्रांतिकारी कदम के साथ ही राज्य ने ‘मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ के तहत अवसंरचनाओं और लाइवस्टॉक (मछलियों) के लिए देश की पहली बीमा योजना का भी शिलान्यास किया है।

डिजिटल क्रांति: क्या है प्रोग्रामेबल CBDC सिस्टम?

मंगलवार को देहरादून में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मत्स्य पालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने इस डिजिटल प्रणाली का शुभारंभ किया। उत्तराखंड मत्स्य विभाग ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के सहयोग से इस प्रोग्रामेबल सेंट्रल बैंकिंग डिजिटल करेंसी सिस्टम (PCBDC) को विकसित किया है।

RBI प्रतिनिधि स्वप्निल कुमार ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि यह प्रणाली ‘एसबीआई ई-रूपी’ (SBI e-Rupi) एप्लीकेशन के माध्यम से संचालित होगी। लाभार्थी अपने बैंक खाते से राशि डेबिट कर इस डिजिटल वॉलेट में रख सकेंगे और यूपीआई (UPI) की तरह ही इसका उपयोग कर सकेंगे।

लीकेज पर लगेगी लगाम: जिस काम के लिए पैसा, वहीं होगा खर्च

अभी तक सरकारी योजनाओं का लाभ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक खातों में भेजा जाता था। हालांकि DBT ने बिचौलियों को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई, लेकिन सरकार के पास यह सुनिश्चित करने का कोई जरिया नहीं था कि लाभार्थी उस पैसे का इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए कर रहा है या नहीं।

प्रोग्रामेबल CBDC की विशेषताएं:

  • उद्देश्य-आधारित भुगतान: सरकार द्वारा मत्स्य पालकों को ‘ट्राउट प्रोत्साहन योजना’ के तहत दिया जाने वाला अनुदान अब केवल उन्हीं वेंडर्स या मर्चेंट्स के पास खर्च किया जा सकेगा, जिन्हें विभाग ने इम्पैनल (सूचीबद्ध) किया है।

  • भ्रष्टाचार मुक्त पारदिर्शता: यदि पैसा बीज या चारे के लिए दिया गया है, तो वह केवल उन्हीं दुकानों पर डिजिटल वॉलेट के जरिए स्वाइप हो सकेगा। इससे सरकारी धन का दुरुपयोग पूरी तरह रुक जाएगा।

  • तत्काल भुगतान: लाभार्थियों के डिजिटल वॉलेट में पैसा बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के, सटीक और तत्काल पहुंचेगा।

मत्स्य संपदा बीमा योजना: जोखिम से सुरक्षा का नया कवच

डिजिटल तकनीक के साथ-साथ राज्य सरकार ने मत्स्य पालकों को प्रकृति की मार से बचाने के लिए ‘पशुधन एवं अवसंरचना बीमा योजना’ की शुरुआत की है। उत्तराखंड ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य है।

“मत्स्य पालन एक जोखिम भरा व्यवसाय है, जहाँ आपदा या बीमारी से पूरी फसल बर्बाद हो जाती थी। इस बीमा योजना के तहत प्रीमियम का 90% हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि किसान को मात्र 10% देना होगा।” – सौरभ बहुगुणा, मत्स्य मंत्री

इस योजना के तहत न केवल मछलियों (लाईस्टॉक) का बीमा होगा, बल्कि मत्स्य पालन के लिए बनाए गए तालाबों और अन्य बुनियादी ढांचों को भी कवर किया जाएगा। यह कदम पहाड़ी क्षेत्रों में अक्सर आने वाली आपदाओं को देखते हुए मील का पत्थर साबित होगा।

आपदा राहत: 43 लाख रुपये का मुआवजा वितरित

कार्यक्रम के दौरान मंत्री सौरभ बहुगुणा ने उन मत्स्य पालकों के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाई जिन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान प्राकृतिक आपदाओं के कारण भारी नुकसान झेला था। विभाग की ओर से प्रभावित किसानों को लगभग 43 लाख रुपये की मुआवजा राशि प्रदान की गई। यह सहायता राशि सीधे तौर पर किसानों को फिर से अपने व्यवसाय को खड़ा करने में संबल प्रदान करेगी।

उत्तराखंड का बढ़ता रसूख: ‘नवाचार’ बना पहचान

उत्तराखंड का मत्स्य विभाग जिस तरह से तकनीक (CBDC) और सामाजिक सुरक्षा (Insurance) का मेल कर रहा है, वह अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल पेश करता है। ‘प्रोग्रामेबल करेंसी’ का यह प्रयोग आने वाले समय में अन्य विभागों जैसे कृषि, उद्यान और समाज कल्याण में भी दोहराया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि CBDC का यह प्रयोग न केवल वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देगा बल्कि उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ‘डिजिटल इकोनॉमी’ की मुख्यधारा से जोड़ेगा। इससे राज्य की जीडीपी में मत्स्य पालन क्षेत्र का योगदान बढ़ने की प्रबल संभावनाएं हैं।

उत्तराखंड ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह “छोटा राज्य, बड़ी दृष्टि” के मंत्र पर चल रहा है। CBDC लागू करना और मत्स्य पालकों को व्यापक बीमा सुरक्षा देना, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘नीली क्रांति’ (Blue Revolution) के सपने को धरातल पर उतारने जैसा है।

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