
देहरादून। उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है, जिससे समूचे प्रदेश में ठिठुरन लौट आई है। मार्च के महीने में जहां चिलचिलाती धूप की उम्मीद की जा रही थी, वहीं पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की सक्रियता के चलते पहाड़ों से लेकर मैदानों तक मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश के छह संवेदनशील जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है, जिसमें भारी बारिश के साथ-साथ तीव्र आंधी-तूफान की चेतावनी दी गई है।
इन 6 जिलों में ‘ऑरेंज अलर्ट’, प्रशासन मुस्तैद
मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड के छह प्रमुख जिलों— देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में अगले 24 से 48 घंटे बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश और ओलावृष्टि की प्रबल संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झक्कड़ (तेज हवाएं) चल सकती हैं। कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली की लाइनों को इससे नुकसान पहुँचने की आशंका है, जिसके मद्देनजर जिला प्रशासनों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मैदानी इलाकों में ‘येलो अलर्ट’ और बदलता तापमान
पहाड़ों में मूसलाधार बारिश के बीच प्रदेश के अन्य हिस्सों और मैदानी इलाकों में ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है। हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल के मैदानी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ धूल भरी आंधी चलने के आसार हैं। गुरुवार को राजधानी देहरादून में दिनभर बादलों और धूप के बीच लुकाछिपी चलती रही, लेकिन शाम होते-होते तेज हवाओं के साथ शुरू हुई बूंदाबांदी ने फिजा बदल दी। देर रात हुई बारिश के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
तापमान का गणित: कहां कितनी रही ठंड?
गुरुवार को दर्ज किए गए आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के प्रमुख शहरों के तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आई है। नीचे दी गई तालिका वर्तमान स्थिति को स्पष्ट करती है:
| शहर | अधिकतम तापमान (°C) | न्यूनतम तापमान (°C) |
| देहरादून | 28.5 | 16.8 |
| पंतनगर | 31.8 | 18.6 |
| मुक्तेश्वर | 19.9 | 6.5 |
| नई टिहरी | 18.0 | 6.2 |
नई टिहरी और मुक्तेश्वर जैसे पहाड़ी इलाकों में न्यूनतम तापमान 6 डिग्री के आसपास पहुँचने से कड़ाके की ठंड महसूस की जा रही है।
चारधाम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी
केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम सहित राज्य के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ताजा हिमपात हुआ है। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ की ऊंची चोटियों पर बिछी सफेद चादर ने निचले इलाकों में ठंडी हवाओं का प्रवाह बढ़ा दिया है। बर्फबारी और ओलावृष्टि के इस दौर ने चारधाम यात्रा की तैयारियों में जुटे श्रमिकों और स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
25 मार्च तक राहत के आसार नहीं
मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक के अनुसार, उत्तराखंड में मौसम का यह मिजाज 25 मार्च 2026 तक इसी तरह बना रह सकता है। आने वाले तीन-चार दिनों तक रुक-रुक कर बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर जारी रहेगा। इसके चलते लोगों ने संदूक में रखे गरम कपड़े और जैकेट एक बार फिर बाहर निकाल लिए हैं। मार्च के अंत में लौटकर आई इस ठंड ने बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति चिंता बढ़ा दी है।
पर्यटकों और यात्रियों के लिए विशेष परामर्श
यदि आप इस सप्ताहांत उत्तराखंड की वादियों का रुख कर रहे हैं, तो मौसम विभाग की इन सावधानियों पर गौर जरूर करें:
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भूस्खलन का खतरा: भारी बारिश के कारण संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन (Landslides) हो सकता है। यात्रा के दौरान सतर्क रहें।
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सुरक्षित स्थान: तेज आंधी के दौरान पेड़ों या अस्थाई ढांचों के नीचे शरण न लें।
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गर्म कपड़े: पहाड़ी क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड को देखते हुए पर्याप्त ऊनी कपड़े साथ रखें।
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चारधाम मार्ग: केदारनाथ और बद्रीनाथ मार्ग पर फिसलन और ठंड के प्रति विशेष सावधानी बरतें।
खेती-किसानी पर असर
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने उत्तराखंड के काश्तकारों की भी चिंता बढ़ा दी है। इस समय आम, लीची और सेब के बगीचों में बौर (फूल) आने का समय है। तेज हवाओं और ओलों के कारण फसल को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
उत्तराखंड में कुदरत के बदलते रंग ने जनजीवन को प्रभावित किया है। जहां एक ओर यह बारिश वनों की आग (Forest Fire) को बुझाने में मददगार साबित हो रही है, वहीं दूसरी ओर आम जनता के लिए ठंड और यातायात की बाधाएं लेकर आई है। अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं, इसलिए स्थानीय प्रशासन की गाइडलाइंस का पालन करना ही समझदारी है।



