
नैनीताल: उत्तराखंड के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में शुमार ‘छात्रवृत्ति घोटाले’ (Scholarship Scam) मामले में नैनीताल हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। प्रदेश के कई निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के नाम पर करोड़ों रुपए की छात्रवृत्ति हड़पने के इस मामले ने अब कानूनी तूल पकड़ लिया है। मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ इस मामले की जांच महालेखाकार (AG) से कराए जाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।
कोर्ट की कार्यवाही: समाज कल्याण विभाग का पक्ष
आज, यानी 5 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के समाज कल्याण विभाग ने कोर्ट में अपना शपथ पत्र पेश किया। विभाग ने अदालत को अवगत कराया कि घोटाले की जांच वर्तमान में सक्रिय रूप से चल रही है और अब तक हुई प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष रखी जा चुकी है।
अदालत ने याचिकाकर्ता ‘इंटरनेशनल पब्लिक वेलफेयर सोसायटी’ को निर्देश दिया है कि वे समाज कल्याण विभाग द्वारा दाखिल किए गए इस शपथ पत्र का अध्ययन करें और अपनी प्रतिक्रिया कोर्ट में शपथ पत्र के माध्यम से पेश करें।
क्या है पूरा घोटाला? (The Genesis of the Scam)
यह मामला केंद्र सरकार द्वारा संचालित उस योजना से जुड़ा है, जिसके तहत समाज कल्याण विभाग के माध्यम से SC/ST छात्रों को निजी कॉलेजों में उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति दी जाती है।
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फर्जी नामांकन: याचिका के अनुसार, कई निजी कॉलेजों ने अपने रिकॉर्ड में भारी संख्या में ‘फर्जी छात्र’ दिखाए।
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गबन का तरीका: इन काल्पनिक छात्रों के नाम पर सरकार से छात्रवृत्ति की राशि डकार ली गई, जबकि पात्र छात्रों तक मदद पहुंची ही नहीं।
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कानूनी स्थिति: अब तक इस घोटाले में 156 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं, लेकिन याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन मामलों में ठोस कार्रवाई और सुनवाई की गति बेहद धीमी है।
महालेखाकार (AG) के ऑडिट पर सवाल
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और महालेखाकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। जब कोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता से ऑडिट के बारे में पूछा, तो यह तथ्य सामने आया कि अभी तक इस मामले का ऑडिट नहीं कराया गया है। इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने पूर्व में 10 दिन के भीतर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए थे।
ED का शिकंजा और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच
यह घोटाला केवल स्थानीय पुलिस जांच तक सीमित नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से जांच कर रहा है।
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पिछले साल 19 नवंबर को ED ने देहरादून स्थित DIT यूनिवर्सिटी को नोटिस भेजकर चेयरमैन से जवाब तलब किया था।
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ED अब तक इस घोटाले में शामिल कई बड़े शिक्षण संस्थानों की करोड़ों की संपत्ति अटैच (Seize) कर चुका है।
आगे क्या?
हाईकोर्ट ने अब गेंद याचिकाकर्ता के पाले में डाल दी है। समाज कल्याण विभाग के जवाब पर याचिकाकर्ता की प्रतिक्रिया आने के बाद कोर्ट यह तय करेगा कि क्या इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच और ऑडिट भारत सरकार के महालेखाकार से कराई जानी चाहिए या नहीं। यदि ऑडिट का आदेश होता है, तो कई सफेदपोश चेहरे और कॉलेज प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।



