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Uttarakhand Pension Update: मुख्यमंत्री धामी ने 9.43 लाख लाभार्थियों को दिया तोहफा, खातों में ट्रांसफर किए 140 करोड़ रुपये; अब 59 की उम्र से ही शुरू होगा ‘चिन्हीकरण’

देहरादून | उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने नए साल के पहले रविवार को राज्य के लाखों वृद्धजनों, विधवाओं और दिव्यांगजनों को बड़ी आर्थिक राहत दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से एक क्लिक के माध्यम से समाज कल्याण विभाग की विभिन्न पेंशन योजनाओं की दिसंबर माह की किश्त जारी कर दी।

कुल 9 लाख 43 हजार 964 लाभार्थियों के बैंक खातों में 140 करोड़ 26 लाख 97 हजार रुपये की धनराशि सीधे डी.बी.टी. (Direct Benefit Transfer) प्रणाली के माध्यम से हस्तांतरित की गई। मुख्यमंत्री ने इस दौरान स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का लक्ष्य ‘अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति’ को बिना किसी बाधा के सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

वृद्धावस्था पेंशन को लेकर सीएम का बड़ा फैसला

पेंशन वितरण के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने समाज कल्याण विभाग को एक बेहद महत्वपूर्ण निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि वृद्धावस्था पेंशन के लिए पात्र व्यक्तियों को 60 साल की उम्र होते ही भटकना न पड़े, इसके लिए विभाग 59 साल की उम्र से ही चिन्हीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दे।

“जैसे ही कोई नागरिक 60 वर्ष की पात्रता श्रेणी में आए, उसे तुरंत पेंशन मिलनी शुरू हो जानी चाहिए। इसके लिए प्री-आइडेंटिफिकेशन (59 वर्ष की आयु में) बहुत जरूरी है ताकि दस्तावेजी प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

DBT से पारदर्शिता: बिचौलियों पर लगाम

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में पारदर्शी शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी प्रकार के सरकारी भुगतानों को अब सीधे लाभार्थियों के खातों से जोड़ा गया है। डी.बी.टी. प्रणाली ने न केवल समय की बचत की है, बल्कि भ्रष्टाचार की गुंजाइश को भी खत्म कर दिया है। वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग और निराश्रित पेंशन की राशि अब बिना किसी देरी के सीधे जरूरतमंदों के हाथों में पहुंच रही है।

पेंशन वितरण का लेखा-जोखा:

विवरण आंकड़े
कुल लाभार्थी संख्या 9,43,964
कुल वितरित धनराशि ₹140,26,97,000
भुगतान का माध्यम डी.बी.टी. (DBT)
महीना दिसंबर 2025

सत्यापन और निगरानी पर जोर

मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि कोई भी पात्र व्यक्ति पेंशन योजना के लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए उन्होंने नियमित सत्यायन (Verification) और कड़ी निगरानी की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी मशीनरी को इतना संवेदनशील होना चाहिए कि पात्र व्यक्ति को कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।

इस अवसर पर समाज कल्याण निदेशक डॉ. संदीप तिवारी, अपर सचिव प्रकाश चन्द्र सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि पेंशन योजनाओं के सरलीकरण और डिजिटलीकरण पर तेजी से काम किया जा रहा है।

जनहित के प्रति प्रतिबद्धता

यह कदम धामी सरकार की ‘प्रो-पीपल’ गवर्नेंस की नीति को दर्शाता है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार लगातार सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि 59 साल की उम्र से ही चिन्हीकरण शुरू करने का आदेश एक गेम-चेंजर साबित होगा, जिससे बुजुर्गों को सरकारी दफ्तरों की जटिलताओं से मुक्ति मिलेगी।

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