
नैनीताल: देवभूमि उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से न्यायपालिका को निशाना बनाने की साजिशों ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। जिला न्यायालयों के बाद अब प्रदेश के सबसे बड़े न्याय मंदिर, उत्तराखंड हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की सनसनीखेज धमकी मिली है। इस धमकी भरे ई-मेल के बाद नैनीताल समेत पूरे प्रदेश के न्यायालय परिसरों में हड़कंप मचा हुआ है। खतरे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने हाईकोर्ट की सुरक्षा को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया है और एन्टी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) को तैनात कर दिया गया है।
ईमेल में ‘ड्रोन हमले’ का जिक्र, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर
आईजी रिद्धिम अग्रवाल ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि उत्तराखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय को एक ई-मेल प्राप्त हुआ, जिसमें न्यायालय परिसर को बम धमाकों से दहलाने की बात कही गई है। इस बार की धमकी ने सुरक्षा विशेषज्ञों को इसलिए ज्यादा चिंतित कर दिया है क्योंकि इसमें ड्रोन के माध्यम से हमले की साजिश का जिक्र किया गया है।
सूचना मिलते ही बम निरोधक दस्ता (BDS) और डॉग स्क्वाड ने पूरे नैनीताल हाईकोर्ट परिसर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सघन तलाशी अभियान चलाया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि प्रारंभिक जांच में कोई भी संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है, लेकिन एहतियातन सुरक्षा घेरा और कड़ा कर दिया गया है।
विदेशी धरती से रची जा रही साजिश? जांच में जुटी STF
इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला खुलासा ई-मेल के स्रोत को लेकर हुआ है। आईजी रिद्धिम अग्रवाल के अनुसार, शुरुआती जांच में विदेशी आईपी एड्रेस (IP Address) के संकेत मिले हैं। इसका अर्थ है कि ई-मेल भेजने वाले की लोकेशन भारत से बाहर की हो सकती है।
“एसटीएफ और केंद्रीय एजेंसियां मिलकर इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं। विदेशी कनेक्शन सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। ई-मेल भेजने वाले की सटीक लोकेशन और पहचान सुनिश्चित करने के प्रयास युद्ध स्तर पर जारी हैं।” – रिद्धिम अग्रवाल, आईजी
छावनी में तब्दील हुए न्यायालय परिसर
लगातार मिल रही धमकियों के बाद नैनीताल जिला जज प्रशांत जोशी ने स्वयं कोर्ट परिसर और जज चैंबर का निरीक्षण किया। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत अब न्यायालय में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की मेटल डिटेक्टर से गहन जांच की जा रही है। बाहरी व्यक्तियों और संदिग्ध वाहनों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
एसपी क्राइम डॉ. जगदीश चंद्रा ने बताया कि मल्लीताल कोतवाली में अज्ञात हमलावरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351, 66F और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
पिछले चार दिनों से जारी है धमकियों का सिलसिला
उत्तराखंड में यह पहली बार नहीं है जब न्यायालयों को इस तरह की धमकी मिली हो। पिछले चार दिनों से प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे उत्तरकाशी, टिहरी, रुद्रप्रयाग और नैनीताल की जिला अदालतों को भी इसी तरह के धमकी भरे ई-मेल मिल रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है या प्रदेश की शांति व्यवस्था को भंग करने का सुनियोजित प्रयास।
क्या हैं सुरक्षा के इंतजाम?
-
एटीएस की तैनाती: हाईकोर्ट जैसे संवेदनशील प्रतिष्ठान की सुरक्षा के लिए कमांडो तैनात किए गए हैं।
-
सघन चेकिंग: कोर्ट के सभी प्रवेश द्वारों पर पुलिस बल के साथ सीसीटीवी कैमरों से मॉनिटरिंग की जा रही है।
-
ड्रोन वॉच: ईमेल में ड्रोन हमले का जिक्र होने के कारण आकाश से होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
-
एजेंसियों का समन्वय: उत्तराखंड पुलिस, एसटीएफ और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां पल-पल की जानकारी साझा कर रही हैं।
न्यायपालिका पर इस तरह के हमले की धमकी सीधे तौर पर लोकतंत्र और कानून व्यवस्था को चुनौती है। हालांकि उत्तराखंड पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी, लेकिन बार-बार मिल रही इन धमकियों ने देवभूमि के शांत वातावरण में तनाव पैदा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि एसटीएफ कब तक इन ‘डिजिटल आतंकियों’ के गिरेबान तक पहुँच पाती है।


