उत्तराखंडफीचर्ड

एलपीजी आपूर्ति पर उत्तराखंड सरकार सख्त: मुख्य सचिव बोले- प्रदेश में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं, अफवाह फैलाई तो होगी जेल

देहरादून: मध्य पूर्व (इजरायल-ईरान) में उपजे युद्ध के हालातों के बीच उत्तराखंड में ईंधन और एलपीजी की आपूर्ति को लेकर मचे घमासान पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। बुधवार को मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में शासन और पुलिस के उच्चाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। मुख्य सचिव ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि प्रदेश में घरेलू गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गैस संकट के नाम पर अफवाह फैलाने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव ने सुरक्षा और सुचारू वितरण के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए।

तहसील स्तर पर QRT गठित करने के निर्देश

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी, अवैध भंडारण (Hoarding) और व्यावसायिक उपयोग के लिए डायवर्जन पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी (SDM) की अध्यक्षता में एक क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) का गठन किया जाए।

QRT की मुख्य भूमिकाएँ:

  • गैस एजेंसियों और गोदामों पर औचक छापेमारी करना।

  • घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग (जैसे होटल/रेस्टोरेंट) को रोकना।

  • कालाबाजारी में लिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करना।

अस्पतालों और हॉस्टलों को मिलेगी प्राथमिकता

वाणिज्यिक (Commercial) गैस सिलेंडर की सीमित आपूर्ति को देखते हुए सरकार ने प्राथमिकताएं तय कर दी हैं। बैठक में निर्णय लिया गया कि उपलब्ध कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई सबसे पहले अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, शिक्षण संस्थानों और हॉस्टलों को की जाएगी। होटल, ढाबों और अन्य गैर-जरूरी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए आपूर्ति फिलहाल सीमित रहेगी ताकि आवश्यक सेवाएं प्रभावित न हों।

ऑयल कंपनियों ने दिया ‘पर्याप्त स्टॉक’ का भरोसा

बैठक में मौजूद इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर कृष्ण कुमार गुप्ता और स्वर्ण सिंह ने आंकड़ों के साथ राज्य की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में घरेलू गैस सिलेंडर का स्टॉक पूरी तरह सामान्य है और बैकएंड से सप्लाई चैन में कोई व्यवधान नहीं है। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे पैनिक बुकिंग न करें, क्योंकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की उपलब्धता पर्याप्त है।

सोशल मीडिया पर ‘डिजिटल’ नजर

मुख्य सचिव ने पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेठ को निर्देश दिए कि सोशल मीडिया पर एलपीजी की किल्लत को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक संदेशों की निगरानी की जाए। भ्रामक खबरें साझा करने वाले पोर्टल्स और व्यक्तियों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम और संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करने को कहा गया है।

जनता तक सही जानकारी पहुँचाने के लिए मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि जिलाधिकारी और खाद्य आपूर्ति आयुक्त प्रतिदिन ‘प्रेस ब्रीफिंग’ करेंगे, ताकि जनता को वास्तविकता का पता रहे और वे किसी के बहकावे में न आएं।

कंट्रोल रूम और जिला प्रशासन की सक्रियता

राज्य और जिला स्तरीय आपदा कंट्रोल रूम को 24×7 सक्रिय रहने के आदेश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि जिलों के जिलाधिकारी सीधे ऑयल कंपनियों के संपर्क में रहें और वितरण व्यवस्था में आने वाली किसी भी तकनीकी बाधा को तुरंत शासन स्तर पर साझा करें।

बैठक में शामिल मुख्य अधिकारी:

  • दीपम सेठ: पुलिस महानिदेशक (DGP)

  • एल. फैनई: प्रमुख सचिव, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति

  • शैलेश बगौली: सचिव, गृह

  • आनंद स्वरूप: सचिव/आयुक्त, खाद्य

  • बंशीधर तिवारी: महानिदेशक, सूचना

पैनिक की नहीं, सतर्कता की जरूरत

मध्य पूर्व के तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा क्षेत्र में दबाव जरूर है, लेकिन उत्तराखंड सरकार ने समय रहते रणनीतिक कदम उठा लिए हैं। घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति को सुरक्षित रखना सरकार की पहली प्राथमिकता है। मुख्य सचिव की इस उच्चस्तरीय बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में संसाधनों से ज्यादा ‘अफवाहों का प्रबंधन’ चुनौती बना हुआ है, जिससे निपटने के लिए प्रशासन अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button