
देहरादून: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य निर्माण के नायकों और उनके परिवारों के लिए अपना खजाना खोल दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को दी जाने वाली मासिक पेंशन में उल्लेखनीय वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस कदम को राज्य आंदोलन के दौरान अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले आंदोलनकारियों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता के रूप में देखा जा रहा है।
राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान में धामी सरकार का कदम
उत्तराखंड राज्य के गठन की नींव रखने वाले आंदोलनकारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर मुहर लगाते हुए सीएम धामी ने पेंशन राशि बढ़ाने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, पेंशन की अलग-अलग श्रेणियों में 1,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक की मासिक वृद्धि की गई है। इस निर्णय से राज्य के हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।
पेंशन वृद्धि का पूरा गणित: किसे कितना मिलेगा लाभ?
सरकार ने आंदोलनकारियों की सक्रियता और उनके संघर्ष की गंभीरता के आधार पर पेंशन को चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया है:
1. जेल गए और घायल आंदोलनकारी
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान जो आंदोलनकारी कम से कम सात दिन जेल में रहे या पुलिसिया कार्रवाई में घायल हुए, उनकी पेंशन अब 6,000 रुपये से बढ़ाकर 7,000 रुपये कर दी गई है। यह उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जिन्होंने राज्य निर्माण की लड़ाई में अग्रिम पंक्ति में रहकर संघर्ष किया।
2. अन्य श्रेणी के आंदोलनकारी
आंदोलन में सक्रिय रहने वाले ऐसे आंदोलनकारी जो जेल या घायल श्रेणी में नहीं आते थे, उन्हें अब तक 4,500 रुपये प्रतिमाह मिलते थे। सरकार ने इस राशि में 1,000 रुपये की बढ़ोतरी करते हुए अब इसे 5,500 रुपये प्रतिमाह कर दिया है।
3. पूर्णतः शय्याग्रस्त (बेडरिडन) आंदोलनकारी
धामी सरकार ने सबसे संवेदनशील निर्णय उन आंदोलनकारियों के लिए लिया है जो आंदोलन के दौरान गंभीर रूप से घायल होकर दिव्यांग हो गए और अब बिस्तर पर हैं। उनकी पेंशन में 10,000 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई है। अब उन्हें 20,000 रुपये के स्थान पर 30,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलेगी, ताकि वे अपनी चिकित्सा और देखभाल बेहतर तरीके से कर सकें।
4. शहीद आंदोलनकारियों के आश्रित
राज्य निर्माण के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए सरकार ने उनके आश्रितों की पेंशन को लगभग दोगुना कर दिया है। पहले शहीद के आश्रितों को 3,000 रुपये प्रतिमाह मिलते थे, जिसे अब बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री धामी: “आंदोलनकारियों का त्याग सदैव स्मरणीय रहेगा”
इस ऐतिहासिक निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का अस्तित्व उन अनगिनत संघर्षों, लाठियों और बलिदानों का परिणाम है जो हमारे आंदोलनकारियों ने झेले। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार राज्य आंदोलनकारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। यह पेंशन वृद्धि केवल एक आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि राज्य निर्माण के नायकों के प्रति हमारी सरकार की कृतज्ञता का एक छोटा सा प्रतीक है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सरकार केवल पेंशन ही नहीं, बल्कि आंदोलनकारियों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अन्य योजनाओं पर भी काम कर रही है। राज्य सरकार चाहती है कि आंदोलनकारियों के परिवारों को सम्मानजनक जीवन मिले।
राज्य आंदोलनकारी संगठनों ने किया फैसले का स्वागत
सरकार के इस फैसले के बाद राज्य के विभिन्न आंदोलनकारी संगठनों ने खुशी जाहिर की है। संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और बुढ़ापे की बीमारियों को देखते हुए पेंशन में यह वृद्धि आवश्यक थी। विशेषकर दिव्यांग और शहीद परिवारों के लिए ली गई पहल की चौतरफा सराहना हो रही है।
विकास और सम्मान का संतुलन
धामी सरकार का यह निर्णय राज्य की भावनात्मक राजनीति और प्रशासनिक कर्तव्य के बीच एक बेहतर संतुलन पेश करता है। एक ओर जहां उत्तराखंड अपनी स्थापना के रजत जयंती वर्ष की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर आंदोलनकारियों के सम्मान में किए गए ये निर्णय राज्य की जड़ों को मजबूत करने का काम करेंगे।



