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उत्तराखंड: क्रिकेट लीग ठगी मामला: ‘अवैध कस्टडी’ के आरोपों के बीच हाईकोर्ट सख्त, पुलिस से मांगी विकास ढाका की रिमांड शीट

नैनीताल। उत्तराखंड के खेल जगत और सियासत में भूचाल लाने वाले ‘एपिक विक्ट्री क्रिकेट लीग’ (EVCL) ठगी कांड में अब कानूनी पेच फंसता नजर आ रहा है। हल्द्वानी के गौलापार स्टेडियम में आयोजित होने वाली इस प्रस्तावित लीग के नाम पर पूर्व विधायक समेत कई लोगों से करीब 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी के आरोपी आयोजक विकास ढाका की गिरफ्तारी पर नैनीताल हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को न्यायालय में ‘रिमांड शीट’ की प्रतिलिपि दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी, जिसमें पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया की वैधता पर फैसला हो सकता है।

गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल: ‘अवैध कस्टडी’ का आरोप

विकास ढाका के अधिवक्ता सौरभ पांडे ने हाईकोर्ट के समक्ष पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि पुलिस ने इस मामले में कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया है। अधिवक्ता के अनुसार:

  • विकास ढाका को पुलिस ने सुबह 11:30 बजे ही थाने में बैठा लिया था, जबकि एफआईआर रात 9 बजे दर्ज की गई।

  • पुलिस ने रिमांड शीट में गिरफ्तारी का समय अगले दिन शाम 4 बजे दिखाया, जो कि तथ्यों के साथ छेड़छाड़ है।

  • याचिकाकर्ता का तर्क है कि जिन धाराओं (बीएनएस 318-4) के तहत मामला दर्ज है, उनमें 7 वर्ष से कम की सजा का प्रावधान है, ऐसे में गिरफ्तारी के निर्धारित नियमों (अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले के दिशा-निर्देशों) की अनदेखी की गई है।

न्यायालय ने इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए रिमांड शीट का अवलोकन करने का निर्णय लिया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पुलिस की कार्रवाई दबाव में थी या नियमानुसार।

क्या है पूरा EVCL ठगी कांड?

हल्द्वानी के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, गौलापार में 1 फरवरी 2026 से ‘एपिक विक्ट्री क्रिकेट लीग’ का भव्य शुभारंभ होना था। इस लीग के लिए उत्तराखंड सोल्जर्स, दिल्ली नाइट्स, मसूरी किंग्स, यूपी वॉरियर्स, हल्द्वानी टाइगर्स और वाराणसी वाइपर्स जैसी टीमों के बीच मुकाबले तय किए गए थे। ओपनिंग सेरेमनी के लिए उत्तराखंड के नामी लोक गायकों और कलाकारों को भी आमंत्रित किया गया था, जिससे खेल प्रेमियों के बीच भारी उत्साह था।

हालांकि, मैच वाले दिन देर शाम तक जब खेल शुरू नहीं हुआ, तो आयोजक विकास ढाका ने एक हैरान करने वाला दावा किया। उन्होंने बताया कि उनके मुख्य पार्टनर प्रमोद सिंह की हल्द्वानी आते वक्त हार्ट अटैक से मौत हो गई है, जिसके कारण शोक स्वरूप मैच स्थगित किए जा रहे हैं।

पूर्व विधायक और व्यापारियों से लाखों की ठगी

प्रतियोगिता रद्द होने के बाद जब खिलाड़ियों और निवेशकों ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आयोजक की नीयत पर शक होने लगा। 5 फरवरी 2026 को सितारगंज के पूर्व विधायक नारायण पाल और हरियाणा के झज्जर निवासी हेमंत शर्मा ने काठगोदाम थाने में तहरीर दी। तहरीर में आरोप लगाया गया कि विकास ढाका ने लीग के नाम पर और बड़े खिलाड़ियों की भागीदारी का झांसा देकर उनसे 32 लाख रुपये की रकम हड़प ली है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (4) के तहत धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया और 6 फरवरी को विकास को गिरफ्तार कर लिया।

क्रिकेट और ग्लैमर के नाम पर ‘खेल’

इस ठगी मामले ने उत्तराखंड में क्रिकेट आयोजनों की पारदर्शिता पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। आरोप है कि विकास ढाका ने स्थानीय रसूखदारों और क्रिकेट प्रेमियों को बड़े मंच का सपना दिखाकर निवेश कराया था। उद्घाटन समारोह के लिए की गई भारी-भरकम तैयारी और नामी कलाकारों की मौजूदगी ने इस आयोजन को विश्वसनीय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी, जिसका फायदा उठाकर इस बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया।

12 फरवरी पर टिकी निगाहें

फिलहाल विकास ढाका की जमानत याचिका टल गई है और वह सलाखों के पीछे है। हाईकोर्ट द्वारा रिमांड शीट मांगे जाने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पुलिस की थ्योरी अदालत में टिक पाती है या विकास ढाका को तकनीकी आधार पर राहत मिलती है।

अगली सुनवाई के मुख्य बिंदु:

  1. क्या गिरफ्तारी के समय पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन किया?

  2. रिमांड शीट में दर्ज समय और याचिकाकर्ता के दावों के बीच के अंतर का स्पष्टीकरण।

  3. पूर्व विधायक और अन्य पीड़ितों के बयानों की सत्यता की जांच।


उत्तराखंड क्रिकेट लीग के नाम पर हुई यह धोखाधड़ी उन सभी के लिए एक चेतावनी है जो खेलों में निवेश करते हैं। नैनीताल हाईकोर्ट की सक्रियता ने इस मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। न्याय की इस प्रक्रिया पर न केवल पीड़ितों की, बल्कि पूरे उत्तराखंड के खेल जगत की नजरें जमी हुई हैं।

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