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बिहार की बेटियों पर अमर्यादित टिप्पणी मामला: उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या के पति की बढ़ीं मुश्किलें, मुजफ्फरपुर कोर्ट ने भेजा नोटिस

मुजफ्फरपुर/देहरादून: उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई राजनीतिक उपलब्धि नहीं बल्कि एक ‘शर्मनाक’ विवाद है। बिहार की लड़कियों को लेकर दिए गए उनके आपत्तिजनक बयान ने अब कानूनी रूप ले लिया है। मुजफ्फरपुर की एक अदालत ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए गिरधारी लाल साहू को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। 13 जनवरी को हुई सुनवाई के बाद कोर्ट के इस कड़े रुख से उत्तराखंड की राजनीति में भी हड़कंप मच गया है।


क्या है पूरा विवाद? (The Controversy)

मामला जनवरी 2026 की शुरुआत का है, जब सोशल मीडिया पर गिरधारी लाल साहू का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में वे अपने एक कार्यकर्ता से शादी को लेकर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर कहा था, “शादी नहीं हुई है तुम्हारी? क्या बुढ़ापे में करोगे? अब तक तो तुम्हारे तीन से चार बच्चे हो गए होते। तुम्हारे लिए हम बिहार से लड़की ले आते। बिहार में 20–25 हजार रुपये में लड़कियां मिल जाती हैं। मेरे साथ आओ, तुम्हारी शादी करवा देते हैं।”

इस बयान के सार्वजनिक होते ही बिहार से लेकर उत्तराखंड तक भारी आक्रोश देखा गया। Bihar Girls Remark Case को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इसे स्त्री समाज की गरिमा पर गहरा प्रहार बताया।


मुजफ्फरपुर कोर्ट का कड़ा रुख और नोटिस

वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने इस बयान के खिलाफ मुजफ्फरपुर की एडीजे प्रथम (ADJ-1) की अदालत में एक परिवाद (Complaint) दायर किया था। 13 जनवरी, मंगलवार को इस पर सुनवाई हुई।

कोर्ट की कार्यवाही के मुख्य बिंदु:

  • नोटिस जारी: कोर्ट ने प्रथम दृष्टया साक्ष्यों को गंभीर मानते हुए गिरधारी लाल साहू को नोटिस जारी किया है।

  • अगली सुनवाई: इस मामले की अगली सुनवाई अब 26 फरवरी को मुकर्रर की गई है।

  • एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी: परिवादी सुधीर ओझा ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित तिथि तक आरोपी का जवाब नहीं आता है, तो कोर्ट एकतरफा सुनवाई (Ex-parte hearing) शुरू कर सकता है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

अधिवक्ता सुधीर ओझा ने गिरधारी लाल साहू को मुख्य अभियुक्त बनाते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। इनमें धारा 192, 298, 352, 351, 328, 52, 95, 86, 74 और 75 शामिल हैं। ये धाराएं मुख्य रूप से मानहानि, स्त्री गरिमा को ठेस पहुँचाने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने से संबंधित हैं।


“यह पूरे स्त्री समाज का अपमान है”

परिवादी सुधीर कुमार ओझा ने अपनी याचिका में दलील दी है कि गिरधारी लाल साहू का यह बयान न केवल बिहार की बेटियों का घोर अपमान है, बल्कि यह मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों को सामान्य बनाने जैसा है।

सुधीर ओझा का बयान:

“एक जिम्मेदार पद पर बैठी मंत्री के पति द्वारा बिहार की लड़कियों की ‘कीमत’ लगाना अत्यंत निंदनीय है। इससे न केवल बिहार की छवि धूमिल हुई है, बल्कि आम लोगों की भावनाएं भी बुरी तरह आहत हुई हैं। हम इस मामले में कानूनी अंजाम तक लड़ेंगे।”


गिरधारी लाल साहू की सफाई और माफी

विवाद के तूल पकड़ने और चौतरफा घिरने के बाद गिरधारी लाल साहू ने रक्षात्मक रुख अपनाया। उन्होंने एक बयान जारी कर सफाई दी कि उनके शब्दों को गलत संदर्भ में लिया गया है।

उन्होंने कहा:

“मैंने मजाक-मजाक में एक दोस्त/कार्यकर्ता से शादी की बात की थी। विरोधियों ने इसे काट-छांट कर पेश किया है। मेरा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था। फिर भी, यदि किसी को बुरा लगा हो तो मैं हाथ जोड़कर माफी मांगता हूँ।”

हालांकि, बिहार में इस माफी को अपर्याप्त माना जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ‘मजाक’ की आड़ में महिलाओं की गरिमा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


उत्तराखंड की राजनीति पर असर

यह मामला अब Rekha Arya Husband Controversy के रूप में उत्तराखंड की राजनीति में भी गरमा गया है। विपक्ष ने धामी सरकार को घेरते हुए सवाल पूछा है कि क्या महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली सरकार के मंत्रियों के परिजन इस तरह की सोच रखते हैं? सोशल मीडिया पर भी ‘Boycott’ के हैशटैग चल रहे हैं, जिससे सरकार की छवि पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।


क्या बढ़ेगी मुश्किलें?

कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि Girdhari Lal Sahu Statement मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया, तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से मुजफ्फरपुर कोर्ट में पेश होना पड़ सकता है। 26 फरवरी की तारीख उनके लिए काफी अहम होने वाली है। यह मामला एक सबक है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों को अपने शब्दों का चयन कितनी संजीदगी से करना चाहिए।

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