
नई दिल्ली। अमेरिका और भारत के बीच चल रही व्यापार वार्ता निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम (USISPF) के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुकेश अघी ने मंगलवार को संकेत दिया कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते से जुड़े अधिकांश मुद्दे सुलझ चुके हैं और अंतिम निर्णय अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निर्भर है।
अघी ने कहा, “व्यापार वार्ता काफी अच्छी तरह आगे बढ़ी है और मेरे भारत के दृष्टिकोण से लगभग सभी बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है। शर्तें राष्ट्रपति के पास हैं और हम उनके निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।”
इस बयान के बाद उम्मीदें बढ़ गई हैं कि लंबे समय से लंबित ‘लिमिटेड ट्रेड डील’ को दोनों देश जल्द ही अंतिम रूप दे सकते हैं। यह समझौता द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में नया अध्याय खोल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं और आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन के दौर से गुजर रहा है।
अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों का महत्व
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2023–24 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार लगभग 200 अरब डॉलर को पार कर गया। तकनीक, सुरक्षा, रक्षा, ऊर्जा और कृषि—सभी प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी तेजी से गहरी हुई है।
पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच टैरिफ, मार्केट एक्सेस और रेगुलेटरी मुद्दों को लेकर तनाव जरूर देखने को मिला, लेकिन रणनीतिक हितों और बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य ने आपसी संवाद को बनाए रखा है।
माना जा रहा है कि संभावित ‘लिमिटेड ट्रेड पैकेज’ में निम्न मुद्दे शामिल हो सकते हैं—
- कुछ भारतीय कृषि, इंजीनियरिंग और औद्योगिक उत्पादों को अमेरिकी बाजार में अधिक पहुंच
- अमेरिकी कृषि और तकनीकी उत्पादों को भारत में आसान मार्केट एक्सेस
- कुछ विशेष टैरिफ छूट
- ई-कॉमर्स और डिजिटल व्यापार से जुड़े प्रारंभिक समझौते
- मेडिकल डिवाइस प्राइसिंग और आईटी सेवाओं पर नियमों पर सहयोग
हालांकि दोनों देशों की आधिकारिक एजेंसियों द्वारा अभी कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन USISPF प्रमुख का यह संकेत दर्शाता है कि वार्ता में गतिरोध काफी हद तक खत्म हो चुका है।
भारत को मिल सकती है ‘टैरिफ राहत’—GTRI का विश्लेषण
इसी बीच, भारतीय थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने कहा है कि अमेरिका द्वारा इस वर्ष लागू किए गए रेसिप्रोकल टैरिफ से कुछ कृषि उत्पादों को हटाने का निर्णय भारत के लिए लाभकारी हो सकता है।
GTRI के अनुसार—
- अमेरिका ने कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लागू किए थे, जिसका उद्देश्य व्यापार संतुलन सुधारना था।
- लेकिन हाल ही में अमेरिकी प्रशासन ने कुछ कृषि उत्पादों को इस सूची से बाहर कर दिया है।
- इससे भारतीय कृषि वस्तुओं पर अब केवल MFN (Most Favoured Nation) यानी सामान्य शुल्क दरें लागू होंगी।
इसके परिणामस्वरूप भारत के मसाले, चाय, कॉफी, कुछ फल-सब्जियां, समुद्री खाद्य और अन्य एग्री-बेस्ड उत्पादों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी बढ़त मिल सकती है।
GTRI ने यह भी कहा कि यदि व्यापार समझौते में कृषि उत्पादों से जुड़े और प्रावधान शामिल किए जाते हैं, तो भारत की कृषि निर्यात क्षमता और बढ़ सकती है।
भारत के लिए संभावित लाभ
1. कृषि निर्यात में बढ़ोतरी
रेसिप्रोकल टैरिफ से छूट मिलने के बाद भारतीय किसानों और कृषि निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अधिक पहुंच और बेहतर दाम मिलने की संभावना है।
2. तकनीक और विनिर्माण को बढ़ावा
वार्ता के अंतर्गत यदि कुछ अमेरिकी हाई-टेक उत्पादों पर टैरिफ में कमी आती है, तो भारत में विनिर्माण और स्टार्टअप सेक्टर को गति मिल सकती है।
3. सेवाओं का क्षेत्र मजबूत होगा
भारत की IT और पेशेवर सेवाएं अमेरिकी बाजार में पहले से ही प्रभावी हैं। डिजिटल व्यापार से जुड़े नियमों में लचीलापन मिलने पर भारतीय कंपनियों की अमेरिकी उपस्थिति और मजबूत हो सकती है।
4. रणनीतिक गठबंधन को मजबूती
रक्षा, सेमीकंडक्टर, सप्लाई चेन और क्लीन एनर्जी साझेदारी दोनों देशों के राजनीतिक-रणनीतिक संबंधों को नई दिशा दे सकती है।
कहां अटकी है डील?
वार्ताकारों के अनुसार कुछ प्रमुख मुद्दों पर अभी भी अंतिम सहमति आवश्यक है—
- मेडिकल डिवाइसेज़ की प्राइसिंग नियम
- अमेरिकी बादाम, डेयरी और कृषि उत्पादों पर भारतीय टैरिफ
- भारतीय स्टील-एल्युमिनियम पर अमेरिकी अतिरिक्त शुल्क
- डेटा लोकलाइज़ेशन और डिजिटल नियम
इन मुद्दों पर ‘मध्य मार्ग’ निकालने की कोशिशें जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्णय के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
विशेषज्ञों की राय—यह डील क्यों महत्वपूर्ण है?
विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत और अमेरिका दोनों ऐसे समय में व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना चाहते हैं जब—
- चीन से आपूर्ति श्रृंखला हटाने की वैश्विक प्रवृत्ति तेज है
- तकनीकी और रक्षा सहयोग पहले से उच्च स्तर पर है
- दोनों देश आर्थिक स्थिरता और निवेश आकर्षण बढ़ाना चाहते हैं
- लंबे समय से कोई द्विपक्षीय व्यापार समझौता नहीं हुआ है
कई विश्लेषकों का कहना है कि यह एक लिमिटेड समझौता होगा, लेकिन इसका प्रतीकात्मक और रणनीतिक महत्व बहुत बड़ा है।
राष्ट्रपति ट्रंप के निर्णय पर टिकी निगाहें
मुकेश अघी के बयान के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि भारत की ओर से अधिकांश औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और अब अंतिम हस्ताक्षर अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले पर निर्भर होंगे।
यदि यह समझौता जल्द होता है, तो यह—
- अमेरिकी-भारतीय व्यापार संबंधों में नया अध्याय खोलेगा
- दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को सकारात्मक संकेत देगा
- निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगा
- भारत के कृषि, विनिर्माण और सेवाओं क्षेत्र के लिए अवसर पैदा करेगा
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता अब निर्णायक क्षण में है। कृषि उत्पादों पर टैरिफ राहत और वार्ता में प्रगति दोनों संकेत देते हैं कि समझौता बनना लगभग तय है। अब सभी की निगाहें व्हाइट हाउस पर टिकी हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप कब अंतिम मुहर लगाते हैं।
एक बार डील पर हस्ताक्षर होते ही भारत के निर्यात, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिलने की संभावना है।



