देहरादून। उत्तराखंड की नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। एक ओर नर्सिंग एकता मंच और बेरोजगार अभ्यर्थी भर्ती परीक्षा की निष्पक्षता, पारदर्शिता और वर्षवार भर्ती की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर करीब 32 लाख रुपये के कथित लेन-देन और धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। हालांकि, पुलिस ने इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अब तक की जांच में कथित धोखाधड़ी के मामले और नर्सिंग भर्ती परीक्षा अथवा परीक्षा प्रक्रिया के बीच किसी तरह का सीधा संबंध सामने नहीं आया है।
देहरादून के एकता विहार में नर्सिंग एकता मंच का आंदोलन 269वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने नर्सिंग लिखित परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए हैं। मंच का कहना है कि अभ्यर्थी लंबे समय से वर्षवार भर्ती सहित विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं और शासन स्तर से उनकी मांगों पर विचार किए जाने का आश्वासन भी दिया गया था। इसी बीच 25 जुलाई को नर्सिंग भर्ती की लिखित परीक्षा आयोजित किए जाने को लेकर आंदोलनकारियों ने सवाल खड़े किए।
शासन के जवाब से पहले परीक्षा कराने पर उठे सवाल
नर्सिंग एकता मंच का कहना है कि उनकी मांगों और भर्ती से जुड़े मुद्दों पर शासन स्तर से जवाब आने की प्रक्रिया चल रही थी। मंच के अनुसार, जब संबंधित पत्राचार और मांगों पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होना बाकी था, तब भर्ती परीक्षा आयोजित करने की जल्दबाजी क्यों की गई। आंदोलनकारियों ने इसे लेकर सरकार और संबंधित विभागों से स्पष्ट जवाब मांगा है।
मंच का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को बिना पर्याप्त जांच और प्रमाण के दोषी ठहराना नहीं है। हालांकि, संगठन ने दावा किया है कि उसके पास भर्ती प्रक्रिया और कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े कुछ दस्तावेज तथा ट्रांजेक्शन से संबंधित साक्ष्य उपलब्ध हैं। इन दावों की सत्यता को लेकर मंच ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
आंदोलनकारियों ने सरकार से 25 जुलाई को आयोजित लिखित परीक्षा समेत पूरी भर्ती प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है। मंच का कहना है कि जांच पूरी होने तक परीक्षा परिणाम और आगे की नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाई जानी चाहिए। साथ ही यदि किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
32 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज
इसी विवाद के बीच देहरादून पुलिस रिकॉर्ड से एक अलग मामला सामने आया है, जिसमें करीब 32 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। शिकायत के आधार पर 17 अगस्त 2026 को थाना नेहरू कॉलोनी में मुकदमा दर्ज किया गया।
शिकायतकर्ता महिला एक निजी अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के पद पर कार्यरत बताई गई है। शिकायत के अनुसार महिला की मुलाकात चारू चंद्र जोशी नाम के व्यक्ति से एक वैवाहिक वेबसाइट के माध्यम से हुई थी। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने खुद को स्वास्थ्य विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर बताते हुए महिला से संपर्क स्थापित किया।
महिला ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया कि आरोपी ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से अच्छे संपर्क होने का भरोसा दिलाया। साथ ही शादी करने और स्वास्थ्य विभाग में नौकरी लगवाने का झांसा दिया गया। शिकायत के अनुसार अलग-अलग तारीखों पर विभिन्न माध्यमों से महिला से करीब 32 लाख रुपये लिए जाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत के आधार पर थाना नेहरू कॉलोनी में मुकदमा अपराध संख्या 331/26 दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अभियोग पंजीकृत कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस की जांच में क्या सामने आया?
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू नर्सिंग भर्ती परीक्षा से इसके कथित संबंध को लेकर सामने आया है। आंदोलनकारी संगठनों की ओर से भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाने के बाद पुलिस ने भी अपनी जांच की स्थिति स्पष्ट की है।
पुलिस के अनुसार विवेचना के दौरान शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच हुए वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है। इसके साथ ही बैंक खातों, धनराशि के हस्तांतरण, आरोपी के कथित संपर्कों और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा है।
अब तक सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला व्यक्तिगत स्तर पर नौकरी दिलाने और अन्य आश्वासन देकर कथित धोखाधड़ी करने से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है। पुलिस जांच में फिलहाल ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया है, जिससे आरोपी का किसी परीक्षा एजेंसी, चयन प्रक्रिया से जुड़े व्यक्ति या नर्सिंग भर्ती परीक्षा के संचालन से सीधा संबंध स्थापित हो सके।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब तक की जांच में प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा में संगठित गड़बड़ी या किसी सुनियोजित भर्ती घोटाले से संबंधित कोई ठोस साक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में पुलिस के मुताबिक 32 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले को सीधे नर्सिंग भर्ती परीक्षा की शुचिता से जोड़ना फिलहाल उचित नहीं होगा।
नैनीताल में भी दर्ज बताए गए हैं कई मुकदमे
पुलिस विवेचना के दौरान आरोपी के खिलाफ पहले से दर्ज अन्य मामलों की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार जनपद नैनीताल में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नौकरी लगवाने का झूठा आश्वासन देकर लोगों से कथित धोखाधड़ी करने के आरोपों से जुड़े तीन मुकदमे दर्ज हैं।
इसके अलावा आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म से संबंधित एक मामला भी दर्ज होने की जानकारी पुलिस जांच में सामने आई है। पुलिस इन मामलों की पृष्ठभूमि और वर्तमान मामले से जुड़े तथ्यों की भी जांच कर रही है। हालांकि, हर मामले में आरोपों की कानूनी स्थिति और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायालय की प्रक्रिया के आधार पर ही तय होंगे।
एसपी सिटी ने स्पष्ट किया पुलिस का रुख
एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वर्तमान में दर्ज मामला व्यक्तिगत स्तर पर कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक की विवेचना में इसे किसी भर्ती परीक्षा की शुचिता या नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया से जोड़ने वाला कोई साक्ष्य नहीं मिला है।
पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों तथा आरोपी के अन्य कथित संपर्कों से जुड़े सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। यदि जांच के दौरान कोई नया तथ्य या साक्ष्य सामने आता है तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर, नर्सिंग एकता मंच और आंदोलनकारी अभ्यर्थी अपनी मांगों पर कायम हैं। वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं तथा वर्षवार भर्ती और अन्य मुद्दों पर सरकार से स्पष्ट निर्णय चाहते हैं। ऐसे में एक तरफ आंदोलनकारी भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि 32 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले और भर्ती परीक्षा के बीच फिलहाल कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है।
अब इस पूरे मामले में आगे की पुलिस जांच और शासन की ओर से नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को लेकर लिए जाने वाले निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित वित्तीय लेन-देन के आरोपों में और कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल पुलिस ने साफ कर दिया है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस व्यक्तिगत धोखाधड़ी के मामले को नर्सिंग भर्ती परीक्षा में किसी संगठित गड़बड़ी या प्रश्नपत्र लीक से जोड़ने का कोई आधार अभी तक नहीं मिला है।
