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उत्तराखंड: सिलक्यारा टनल में फिर दर्दनाक हादसा, शॉटक्रीट लाइनिंग गिरने से 21 वर्षीय श्रमिक की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

The Hill India News
Last updated: July 16, 2026 6:39 am
The Hill India News
Published: July 16, 2026
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उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में निर्माणाधीन सिलक्यारा-बड़कोट टनल में गुरुवार  एक बार फिर बड़ा हादसा हो गया। सुरंग के भीतर निर्माण कार्य के दौरान शॉटक्रीट (कंक्रीट) लाइनिंग का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आने से 21 वर्षीय श्रमिक की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक श्रमिक झारखंड का निवासी बताया जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर निर्माणाधीन टनल में सुरक्षा मानकों और श्रमिकों की कार्य परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2023 में इसी सुरंग में हुए ऐतिहासिक हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किए गए दावों पर भी अब सवाल उठने लगे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार हादसा बड़कोट साइड से लगभग 900 मीटर अंदर उस समय हुआ, जब टनल में नियमित निर्माण कार्य जारी था। श्रमिक अपने निर्धारित कार्य में लगे हुए थे कि तभी अचानक शॉटक्रीट लाइनिंग का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया। घटना इतनी अचानक हुई कि वहां मौजूद श्रमिकों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। भारी मलबे की चपेट में आने से एक युवा श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गया।

हादसे के तुरंत बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। साथी श्रमिकों ने बिना समय गंवाए राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और मलबे में दबे श्रमिक को बाहर निकालने का प्रयास किया। हालांकि जब तक उसे बाहर निकाला गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। घटना के बाद निर्माण कार्य कुछ समय के लिए रोक दिया गया और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा की दृष्टि से सील कर दिया गया।

सूचना मिलते ही बड़कोट पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी तथा संबंधित विभागों की टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अधिकारियों ने बताया कि मृतक के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है तथा नियमानुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि मृतक के परिवार को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) ने हादसे की विस्तृत तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार विशेषज्ञों की टीम यह पता लगाएगी कि शॉटक्रीट लाइनिंग गिरने के पीछे तकनीकी खामी, निर्माण प्रक्रिया में लापरवाही, भू-वैज्ञानिक कारण अथवा अन्य कोई वजह जिम्मेदार थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित एजेंसी या जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि सिलक्यारा-बड़कोट टनल पहले भी वर्ष 2023 में हुए बड़े हादसे के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रही थी। 12 नवंबर 2023 को चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत निर्माणाधीन इस सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने से 41 श्रमिक अंदर फंस गए थे। लगभग 17 दिनों तक चले देश के सबसे चुनौतीपूर्ण और चर्चित रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। उस घटना के बाद सरकार और निर्माण एजेंसियों ने भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाने का भरोसा दिया था।

ताजा हादसे ने उन दावों की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। स्थानीय लोगों, श्रमिक संगठनों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाता, नियमित तकनीकी निरीक्षण होता और संभावित जोखिमों का समय रहते आकलन किया जाता, तो शायद इस प्रकार की घटना को टाला जा सकता था। उन्होंने मांग की है कि जांच केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक कारणों का पता लगाकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुरंग निर्माण अत्यंत जटिल और जोखिमपूर्ण कार्य होता है। ऐसे निर्माण स्थलों पर लगातार भू-वैज्ञानिक निगरानी, मजबूत तकनीकी परीक्षण, आधुनिक सुरक्षा उपकरणों का उपयोग, नियमित निरीक्षण और श्रमिकों के लिए प्रभावी सुरक्षा प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक होता है। किसी भी स्तर पर छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए निर्माण एजेंसियों को सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

इस दुखद घटना ने एक युवा श्रमिक की जान ले ली और उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। साथ ही इसने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में केवल निर्माण कार्य की गति ही नहीं, बल्कि श्रमिकों की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अब सभी की निगाहें NHIDCL की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि हादसे के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाए जाएंगे। पूरे प्रदेश में इस हादसे को लेकर शोक का माहौल है और लोग मृतक श्रमिक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दोषियों पर कठोर कार्रवाई तथा निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों को और अधिक सख्ती से लागू करने की मांग कर रहे हैं।

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