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असम में चुनावी रैली के दौरान गिरा टीएमसी का मंच, भाषण देते वक्त औंधे मुंह गिरे नेता, मची अफरा-तफरी

गुवाहाटी: असम में चुनावी माहौल के बीच एक बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की एक जनसभा के दौरान मंच अचानक भरभराकर गिर गया। इस हादसे में मंच पर मौजूद नेता और कार्यकर्ता जमीन पर गिर पड़े, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर रहा है।

यह घटना असम के मांडिया विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक चुनावी सभा के दौरान हुई। इस सभा में टीएमसी के उम्मीदवार शेरमन अली अहमद सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। बताया जा रहा है कि शेरमन अली अहमद मंच से लोगों को संबोधित कर रहे थे और जनता से सवाल-जवाब कर रहे थे। बड़ी संख्या में लोग उन्हें सुनने के लिए एकत्र हुए थे।

इसी दौरान, जब सभा अपने चरम पर थी, मंच अचानक से हिलने लगा और कुछ ही सेकंड में पूरी तरह से ढह गया। मंच पर मौजूद सभी लोग अचानक नीचे गिर पड़े। शेरमन अली अहमद भी मुंह के बल जमीन पर गिर गए। इस घटना के बाद वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कुछ लोग तुरंत मंच की ओर दौड़कर नेताओं को उठाने में जुट गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंच पर करीब 10 से 12 लोग मौजूद थे। इतने कम लोगों के होने के बावजूद मंच का गिर जाना इस बात की ओर इशारा करता है कि उसकी संरचना मजबूत नहीं थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मंच को अस्थायी रूप से बनाया गया था और संभवतः निर्माण में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया।

घटना के बाद राहत की बात यह रही कि किसी के गंभीर रूप से घायल होने की खबर सामने नहीं आई है। हालांकि कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं को हल्की चोटें जरूर आई हैं। स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच के संकेत दिए हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर मंच गिरने के पीछे क्या कारण थे।

इस घटना ने चुनावी रैलियों में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनावी सभाओं में बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं और ऐसे में मंच की मजबूती और सुरक्षा बेहद जरूरी होती है। लेकिन इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि कई बार आयोजक इन महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज कर देते हैं।

यह पहली बार नहीं है जब किसी राजनीतिक सभा में मंच गिरने की घटना सामने आई हो। इससे पहले भी देश के विभिन्न राज्यों में इस तरह के हादसे हो चुके हैं। साल 2023 में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कांग्रेस के ‘लोकतंत्र बचाओ कार्यक्रम’ के दौरान मंच गिर गया था, जिसमें कुछ नेताओं को मामूली चोटें आई थीं। वहीं साल 2020 में बिहार के सोनपुर में जनता दल यूनाइटेड के नेता चंद्रिका राय के कार्यक्रम के दौरान भी मंच टूट गया था, जिसमें वे खुद भी घायल हो गए थे।

ऐसी घटनाएं बार-बार यह चेतावनी देती हैं कि चुनावी आयोजनों में सुरक्षा मानकों को लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थायी मंच बनाते समय गुणवत्ता वाले सामग्री का उपयोग, उचित तकनीकी जांच और भार क्षमता का ध्यान रखना अनिवार्य है। इसके अलावा, मंच पर एक सीमित संख्या में ही लोगों को चढ़ने की अनुमति दी जानी चाहिए।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मंच गिरते ही लोग घबरा गए और वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि कुछ ही देर में स्थिति को संभाल लिया गया, लेकिन यह घटना एक बड़ा संदेश छोड़ गई है।

चुनावी रैलियां लोकतंत्र का अहम हिस्सा होती हैं, जहां नेता जनता से सीधे संवाद करते हैं। लेकिन अगर इन आयोजनों में सुरक्षा को नजरअंदाज किया जाएगा, तो इस तरह के हादसे भविष्य में भी हो सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि सभी राजनीतिक दल और आयोजक इस घटना से सबक लें और आने वाले कार्यक्रमों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करें, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके।

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