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डिजिटल ठगी का ‘पेट्रोल पंप’ कनेक्शन: मुंबई पुलिस ने उजागर किया मनी लॉन्ड्रिंग का नया और खतरनाक पैंतरा

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में साइबर अपराधियों ने कानून की नजरों से बचने के लिए एक ऐसा तरीका ईजाद किया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। अब तक आपने सुना होगा कि साइबर ठग पैसे को ‘म्यूल अकाउंट्स’ (फर्जी बैंक खाते) में ट्रांसफर करते हैं, लेकिन मुंबई की जेजे मार्ग पुलिस ने एक ऐसे संगठित सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है जो पेट्रोल पंपों का इस्तेमाल कर ठगी की काली कमाई को ‘सफेद’ यानी नकद (Cash) में तब्दील कर रहा था।

पुलिस ने इस मामले में राजस्थान के पाली निवासी 23 वर्षीय राहुल कुमार शैतानमल सेन को गिरफ्तार किया है, जो इस पूरे नेटवर्क में ‘कैश कन्वर्जन एजेंट’ के रूप में सक्रिय था।

कैसे काम करता था यह ‘कैश कन्वर्जन’ मॉड्यूल?

पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी थ्रिलर फिल्म की पटकथा जैसे लगते हैं। यह गिरोह सीधे बैंक से पैसे निकालने के बजाय उसे एक जटिल चक्र (Layering) में घुमाता था।

सबसे पहले, गिरोह ऑनलाइन धोखाधड़ी या ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे अपराधों के जरिए शिकार से पैसे ऐंठता था। इसके बाद, उस रकम को तुरंत 4-5 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था ताकि मुख्य स्रोत का पता न चल सके। अंत में, इस रकम को पेट्रोल पंपों के बैंक खातों में भेजा जाता था।

नकद में बदलने का गणित: गिरोह के सदस्य पेट्रोल पंपों पर तैनात कुछ संदिग्धों के साथ सांठगांठ करते थे। जब ग्राहक पेट्रोल भरवाने के बाद नकद भुगतान करते, तो गिरोह का एजेंट उस नकद राशि को अपने पास रख लेता और उसके बदले में उतनी ही रकम अपने ‘संदिग्ध बैंक खाते’ से पेट्रोल पंप के आधिकारिक खाते में डिजिटल रूप से ट्रांसफर कर देता था। इस प्रक्रिया से अपराधियों को बिना एटीएम जाए या बैंक की नजर में आए ‘क्लीन कैश’ मिल जाता था।

जेजे मार्ग पुलिस की बड़ी कार्रवाई

इस सनसनीखेज मामले का खुलासा तब हुआ जब तकनीकी विश्लेषण और बैंक ट्रांजेक्शन की सघन जांच के दौरान कुछ संदिग्ध लेन-देन पैटर्न दिखाई दिए। जेजे मार्ग पुलिस की टीम ने जाल बिछाकर राहुल कुमार सेन को दबोच लिया। आरोपी के पास से पुलिस ने 47,000 रुपये नकद, कई स्मार्टफोन और बैंक ट्रांजेक्शन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं।

पुलिस ने इस मामले में आफताब इमरान सय्यद, मोहम्मद शादाब अशफाक खान, अब्दुल कादिर अल्लाउद्दीन, अमित सुभाषचंद्र मिश्रा और सनोज उर्फ पिंटू सिंह नामक अन्य संदिग्धों से भी लंबी पूछताछ की है। फिलहाल इन्हें सीआरपीसी की धाराओं के तहत नोटिस देकर छोड़ा गया है, लेकिन पुलिस की रडार पर ये सभी बने हुए हैं।

मुंबई साइबर फ्रॉड पेट्रोल पंप नेटवर्क: राष्ट्रीय स्तर पर फैले हो सकते हैं तार

जांच अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक स्थानीय मामला नहीं है। गिरफ्तार आरोपी राहुल कुमार सेन का राजस्थान से संबंध होना इस बात की ओर इशारा करता है कि इस मुंबई साइबर फ्रॉड पेट्रोल पंप नेटवर्क के तार अंतरराज्यीय स्तर पर जुड़े हुए हैं।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, पेट्रोल पंपों पर भारी मात्रा में नकद लेनदेन होता है, जिसका फायदा उठाकर अपराधी अपनी डिजिटल चोरी को भौतिक मुद्रा में बदल रहे हैं। यह तरीका इसलिए भी सुरक्षित माना जाता है क्योंकि पेट्रोल पंपों का टर्नओवर ज्यादा होता है और वहां होने वाले डिजिटल ट्रांजेक्शन पर बैंक या इनकम टैक्स विभाग को सामान्यतः संदेह नहीं होता।

बैंक खातों को किया गया फ्रीज, मुख्य साजिशकर्ता की तलाश

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस सिंडिकेट से जुड़े दर्जनों बैंक खातों की पहचान की है और उनमें मौजूद संदिग्ध जमा राशि को फ्रीज कर दिया है। तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल फॉरेंसिक की मदद से अब पुलिस उस ‘मास्टरमाइंड’ तक पहुँचने की कोशिश कर रही है, जो इन ‘कैश कन्वर्जन एजेंट्स’ को निर्देश दे रहा था।

मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “साइबर अपराधी अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर तकनीक और स्थानीय व्यवसायों का सहारा ले रहे हैं। पेट्रोल पंपों के जरिए नकद निकासी का यह तरीका पुलिस को चकमा देने की एक सोची-समझी कोशिश है। हम इस नेटवर्क की गहराई तक जाएंगे।”

आम नागरिकों और व्यापारियों के लिए चेतावनी

इस घटनाक्रम के बाद पुलिस ने पेट्रोल पंप मालिकों और छोटे व्यापारियों को भी आगाह किया है। किसी भी अनजान व्यक्ति से भारी मात्रा में नकद के बदले डिजिटल ट्रांसफर लेना उन्हें कानूनी पचड़े में डाल सकता है। यदि उस व्यक्ति का खाता साइबर अपराध से जुड़ा पाया जाता है, तो व्यापारी का बैंक खाता भी ब्लॉक किया जा सकता है और उन्हें आपराधिक साजिश का हिस्सा माना जा सकता है।

बदलती चुनौतियों के बीच सजगता जरूरी

मुंबई का यह मामला इस बात का प्रमाण है कि मुंबई साइबर फ्रॉड पेट्रोल पंप नेटवर्क जैसे नए-नए मॉड्यूल पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं। हालांकि, जेजे मार्ग पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अपराधी चाहे कितनी भी लेयरिंग कर लें, डिजिटल साक्ष्य कभी पीछे नहीं छूटते।

फिलहाल, पुलिस की टीमें फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े नामों के खुलासे होने की उम्मीद है।

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