
देहरादून (12 फरवरी, 2026): उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में दिनदहाड़े हुए चर्चित अर्जुन शर्मा हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने एक साहसिक ऑपरेशन में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। बुधवार रात और गुरुवार तड़के हुई दो अलग-अलग मुठभेड़ों के बाद हत्यारे सगे भाई, पंकज राणा और राजीव राणा पुलिस की गिरफ्त में हैं। इस गिरफ्तारी ने न केवल शहर में व्याप्त दहशत को कम किया है, बल्कि राजधानी में पनप रहे ‘सुपारी किलिंग’ (Contract Killing) के खतरनाक ट्रेंड को भी उजागर कर दिया है।
दिनदहाड़े हत्या और पुलिस की जवाबी कार्रवाई
11 फरवरी की सुबह करीब 10 बजे, जब देहरादून का परेड ग्राउंड इलाका अपनी सामान्य रफ़्तार पकड़ रहा था, तभी बदमाशों ने कारोबारी अर्जुन शर्मा की हत्या कर सनसनी फैला दी थी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अजय सिंह के नेतृत्व में गठित विशेष टीमों ने 24 घंटे के भीतर आरोपियों को ट्रैक किया।
गुरुवार तड़के जब पुलिस ने नाकेबंदी की, तो बदमाशों ने सरेंडर करने के बजाय फायरिंग शुरू कर दी। पहली मुठभेड़ रायपुर के लाडपुर जंगल में हुई, जबकि दूसरी लालतप्पर क्षेत्र की एक खंडहर फैक्ट्री में। जवाबी कार्रवाई में दोनों आरोपियों (पंकज और राजीव) के पैरों में गोलियां लगी हैं। फिलहाल दोनों का उपचार कोरोनेशन अस्पताल में पुलिस की कड़ी निगरानी में चल रहा है।
15 लाख की सुपारी: मौत का सौदा
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। दून के चक्खुवाला निवासी दोनों भाइयों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अर्जुन शर्मा को रास्ते से हटाने के लिए 12 से 15 लाख रुपये की सुपारी ली थी। यह महज एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था, जिसे पेशेवर अंदाज में अंजाम दिया गया।
करोड़ों का खेल और सफेदपोशों पर गहराता शक
सूत्रों के अनुसार, इस हत्याकांड के तार करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन और जमीनी विवादों से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस ने इस मामले में विनोद उनियाल, संगीता उनियाल और डॉ. अजय खन्ना के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। चर्चा यह भी है कि इस पूरे खेल के पीछे कुछ ‘सफेदपोश’ चेहरों का हाथ हो सकता है, जो पर्दे के पीछे से इस ‘सुपारी किलिंग’ को वित्तपोषित कर रहे थे। पुलिस अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और बैंक ट्रांजेक्शन खंगाल रही है ताकि मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।
मुठभेड़ का घटनाक्रम: दो मोर्चों पर पुलिस की घेराबंदी
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रायपुर-लाडपुर एनकाउंटर: नाकेबंदी के दौरान जब पुलिस ने एक संदिग्ध को रुकने का इशारा किया, तो उसने फायरिंग कर दी। आत्मरक्षार्थ पुलिस ने गोली चलाई, जो बदमाश पंकज राणा के पैर में लगी।
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लालतप्पर एनकाउंटर: दूसरा आरोपी राजीव उर्फ राजू स्कूटी से भागने की कोशिश कर रहा था। पुलिस के पीछा करने पर वह एक पुरानी फैक्ट्री में छिप गया और वहां से गोलियां बरसाईं। पुलिस की जवाबी फायरिंग में वह भी घायल हो गया।
बरामदगी और अभियुक्तों का प्रोफाइल
पुलिस ने मौके से निम्नलिखित सामान बरामद किया है:
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दो अवैध देसी तमंचे (फायर किए हुए कारतूसों के साथ)।
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वारदात में इस्तेमाल की गई स्कूटी।
अभियुक्तों का विवरण:
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पंकज राणा (52 वर्ष): निवासी इंदिरा कॉलोनी, चक्खुवाला, देहरादून।
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राजीव उर्फ राजू (50 वर्ष): निवासी इंदिरा कॉलोनी, चक्खुवाला, देहरादून।
एसएसपी की सख्त चेतावनी
एसएसपी अजय सिंह ने कोरोनेशन अस्पताल पहुंचकर घायलों की स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस मामले से जुड़े किसी भी साजिशकर्ता को बख्शा न जाए। उन्होंने कहा, “देहरादून की शांति भंग करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। हम इस मामले की तह तक जाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि सुपारी देने वाले ‘सफेदपोश’ भी सलाखों के पीछे हों।”
शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म
अर्जुन शर्मा हत्याकांड ने शहर के व्यापारिक और रसूखदार तबकों में खलबली मचा दी है। तिब्बती मार्केट के सामने हुई इस वारदात ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने विभाग की साख बचाई है। अब सबकी नजरें गुरुवार शाम होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जहां पुलिस कुछ बड़े नामों का खुलासा कर सकती है।
देहरादून पुलिस द्वारा की गई यह मुठभेड़ अपराधियों के मनोबल को तोड़ने वाली साबित होगी। हालांकि, ‘सुपारी किलिंग’ का यह मामला उत्तराखंड जैसे शांत राज्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है। क्या पुलिस उन रसूखदारों को बेनकाब कर पाएगी जिनके इशारे पर यह खूनी खेल खेला गया? यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।



