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‘खामेनेई का अंत, नए ईरान का उदय’: क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने पेश किया ‘सत्ता परिवर्तन’ का 100 दिवसीय रोडमैप

वॉशिंगटन/तेहरान। मध्य-पूर्व (Middle East) की राजनीति में एक ऐसा भूचाल आया है जिसने दशकों पुरानी सत्ता के समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बाद, निर्वासन में रह रहे ईरान के क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने इसे वह “ऐतिहासिक मोड़” करार दिया है, जिसका ईरानी जनता पिछले कई दशकों से इंतजार कर रही थी।

अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ और ‘फॉक्स न्यूज’ को दिए अपने विशेष साक्षात्कार और लेख में पहलवी ने न केवल मौजूदा शासन के अंत की घोषणा की, बल्कि एक नए, लोकतांत्रिक और समृद्ध ईरान का पूरा खाका भी दुनिया के सामने रखा है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका की सराहना करते हुए इसे ईरान के भीतर “शक्ति संतुलन” बदलने वाला कदम बताया है।

“मिस्टर प्रेसिडेंट, धन्यवाद”: ट्रंप के नाम पहलवी का संदेश

रेजा पहलवी ने अपने लेख में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति आभार व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्रशासन के कड़े रुख ने ईरानी जनता को वह साहस दिया है, जिसकी उन्हें लंबे समय से तलाश थी। उन्होंने लिखा, मिस्टर प्रेसिडेंट: धन्यवाद। आपके शब्दों और निर्णयों ने ईरान के उन करोड़ों लोगों को ताकत दी है जो दमनकारी शासन से मुक्ति चाहते थे। मुझे अटूट विश्वास है कि ईरानी जनता इस सुनहरे मौके का डटकर सामना करेगी।”

पहलवी के अनुसार, ट्रंप द्वारा दिए गए आदेशों ने ईरान के भीतर सत्ता की उस नींव को हिला दिया है जो अब तक अजेय मानी जा रही थी। उन्होंने फॉक्स न्यूज से कहा कि इसमें अब कोई संदेह नहीं रह गया है कि ईरान एक बड़े और सकारात्मक बदलाव की दहलीज पर खड़ा है।

‘ईरान प्रॉस्पर्टी प्रोजेक्ट’: अराजकता नहीं, स्थिरता पर जोर

अक्सर यह डर जताया जाता है कि किसी भी तानाशाही शासन के गिरने के बाद देश में गृहयुद्ध या अराजकता की स्थिति पैदा हो जाती है। इस आशंका को खारिज करते हुए रेजा पहलवी ने अपने “ईरान प्रॉस्पर्टी प्रोजेक्ट” (Iran Prosperity Project) का जिक्र किया।

पहलवी ने जोर देकर कहा कि उनका लक्ष्य सत्ता के खालीपन (Power Vacuum) को भरना है, न कि देश को अराजकता में धकेलना। उनके रोडमैप की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • पहले 100 दिन: सत्ता परिवर्तन के शुरुआती 100 दिन देश को स्थिर करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होंगे।

  • संस्थानों का संरक्षण: उन्होंने आश्वासन दिया कि कोई भी मौजूदा संस्थान पूरी तरह खत्म नहीं होगा, बल्कि उन्हें लोकतांत्रिक ढांचे के अनुरूप सुधारा जाएगा।

  • नया संविधान: सबसे पहले एक समावेशी और आधुनिक संविधान का निर्माण किया जाएगा।

  • जनमत संग्रह और चुनाव: संविधान बनने के बाद देश में जनमत संग्रह कराया जाएगा और उसके बाद अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की देखरेख में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संपन्न होंगे।

पहलवी ने अनुमान जताया कि सत्ता परिवर्तन से लेकर अंतिम जनमत संग्रह तक की यह पूरी प्रक्रिया अधिकतम दो साल के भीतर पूरी कर ली जाएगी।

IRGC और 603 अमेरिकी सैनिकों की मौत का हिसाब

अपने साक्षात्कार में पहलवी ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भूमिका पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संगठन न केवल ईरानियों के दमन के लिए जिम्मेदार है, बल्कि इसने दुनिया भर में आतंकवाद को बढ़ावा दिया है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि IRGC कम से कम 603 अमेरिकी सैनिकों और कई निर्दोष नागरिकों की मौत का जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि न्याय की स्थापना के लिए इन कृत्यों का हिसाब होना अनिवार्य है।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर का फायदा?

राजनीतिक बदलाव के साथ-साथ रेजा पहलवी ने आर्थिक संभावनाओं का भी एक बड़ा कार्ड खेला है। उन्होंने दावा किया कि भविष्य का लोकतांत्रिक ईरान अमेरिका का एक मजबूत ‘रणनीतिक और आर्थिक साझेदार’ बनेगा।

पहलवी के अनुसार, यदि ईरान के बंद बाजार फिर से वैश्विक व्यापार के लिए खुलते हैं, तो इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लगभग एक ट्रिलियन डॉलर का सीधा लाभ हो सकता है। यह साझेदारी न केवल ऊर्जा क्षेत्र में बल्कि तकनीक, विनिर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास में भी क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

लाखों ईरानियों का समर्थन और नेतृत्व का दावा

निर्वासन में रहने के बावजूद रेजा पहलवी ने दावा किया कि वह ईरान के भीतर चल रहे सत्ता परिवर्तन के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं और उन्हें लाखों ईरानियों का मौन समर्थन प्राप्त है। उन्होंने खुद को एक ऐसे सेतु के रूप में पेश किया जो पुराने राजतंत्र के गौरव और भविष्य के लोकतंत्र के बीच कड़ी का काम कर सकता है।

इतिहास के पन्नों में ट्रंप का स्थान

लेख के अंत में पहलवी ने एक भावुक टिप्पणी करते हुए कहा कि जब ईरान की आने वाली पीढ़ियां अपनी आजादी का जश्न मनाएंगी, तो वे डोनाल्ड ट्रंप को उस नेता के रूप में याद रखेंगी जिसने उनके सबसे कठिन समय में उनका हाथ थामा था।

ईरान इस समय एक दोराहे पर खड़ा है। जहाँ एक तरफ दशकों पुराने धार्मिक शासन का अंत होता दिख रहा है, वहीं दूसरी तरफ रेजा पहलवी का ‘लोकतांत्रिक ईरान’ का सपना वैश्विक राजनीति में नई चर्चा छेड़ चुका है। यदि यह ईरान सत्ता परिवर्तन सफल होता है, तो यह न केवल मध्य-पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की भू-राजनीतिक स्थिति (Geopolitics) को हमेशा के लिए बदल देगा।

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