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फरीदाबाद की नीमका जेल में आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या: अयोध्या दहलाने की साजिश का हुआ था खुलासा, साथी कैदी ने सिर पर किया वार

फरीदाबाद: हरियाणा के फरीदाबाद स्थित नीमका जेल से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अयोध्या में राम मंदिर को दहलाने की साजिश रचने के आरोप में बंद आतंकी अब्दुल रहमान की जेल के भीतर ही हत्या कर दी गई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जेल में ही बंद एक अन्य कैदी अरुण चौधरी ने अब्दुल के सिर पर नुकीली चीज से हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना ने जेल प्रशासन और उच्च सुरक्षा वाले सेल की चौकसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

देर रात हुई वारदात: नुकीली चीज से किया हमला

जेल सूत्रों के मुताबिक, हत्या की यह वारदात देर रात अंजाम दी गई। आरोपी कैदी अरुण चौधरी को कुछ समय पहले ही जम्मू-कश्मीर से नीमका जेल शिफ्ट किया गया था। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद अरुण ने किसी पैनी और नुकीली वस्तु से अब्दुल के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए।

घटना की सूचना मिलते ही जेल परिसर में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस बल मौके पर पहुँचा और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया गया है। एसीपी अशोक कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि हत्या के संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मामले की ज्यूडिशियल इंक्वायरी (न्यायिक जांच) के आदेश दिए गए हैं।

कौन था अब्दुल रहमान? अयोध्या को दहलाने की थी साजिश

20 वर्षीय अब्दुल रहमान उत्तर प्रदेश के मिल्कीपुर का रहने वाला था। उसे 2 मार्च 2025 को एक संयुक्त ऑपरेशन में गुजरात एसटीएफ और हरियाणा एसटीएफ ने फरीदाबाद के पाली गांव के पास से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के वक्त उसके पास से दो जिंदा हैंड ग्रेनेड बरामद हुए थे, जिन्हें बाद में बम निरोधक दस्ते ने निष्क्रिय किया था।

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि अब्दुल रहमान के पास अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ी अत्यंत संवेदनशील जानकारियों वाले वीडियो और नक्शे मौजूद थे। उसका प्लान 4 अप्रैल को अयोध्या पहुँचकर बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देना था, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते उसे दबोच लिया।

AQIS और ISKP से जुड़ाव: ऑनलाइन हुआ था ब्रेनवॉश

सुरक्षा एजेंसियों की पूछताछ में अब्दुल रहमान के अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से संबंधों की पुष्टि हुई थी। वह अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) के कुख्यात आतंकी अबू सूफियान के सीधे संपर्क में था।

  • सोशल मीडिया का जाल: अब्दुल पिछले डेढ़ साल से सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा फैला रहा था। पहले टिकटॉक और फिर इंस्टाग्राम पर भड़काऊ वीडियो अपलोड करने के कारण वह सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आया था।

  • ऑनलाइन ट्रेनिंग: उसे ऑनलाइन माध्यम से ही हथियारों और विस्फोटकों की ट्रेनिंग दी गई थी। अबू सूफियान के इशारे पर ही उसने फरीदाबाद की बांस रोड पर एक खेत में गड्ढा खोदकर ग्रेनेड और डेटोनेटर छिपाए थे।

जेल प्रशासन पर उठ रहे सवाल

एक आतंकी की जेल के भीतर हत्या होना जेल सुरक्षा में बड़ी चूक माना जा रहा है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी अरुण चौधरी के पास नुकीली चीज कहाँ से आई? साथ ही, जेल कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है कि क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं।

एसीपी अशोक कुमार ने कहा, “मृतक के परिजनों को सूचित कर दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हत्या के सटीक समय और हथियार के प्रकार की पुष्टि हो सकेगी। दोषी पाए जाने वाले किसी भी कर्मचारी या कैदी को बख्शा नहीं जाएगा।”

अब्दुल रहमान की मौत के साथ ही उससे जुड़े कई राज भी दफन हो गए हैं। हालांकि एजेंसियां उसके नेटवर्क को पहले ही ध्वस्त कर चुकी थीं, लेकिन जेल के भीतर इस तरह की हिंसा भविष्य के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

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