अंकिता भंडारी केस: CM धामी की बड़ी घोषणा- ‘अंकिता के माता-पिता जैसा कहेंगे, वैसी होगी जांच’, उर्मिला सनावर के वीडियो पर भी तोड़ी चुप्पी
देहरादून के मीडिया सेंटर में प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड पर पहली बार विस्तार से पक्ष रखा। सीएम ने कहा कि सरकार दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और वे जल्द ही अंकिता के परिजनों से मुलाकात करेंगे।

देहरादून: उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर जारी सियासी घमासान और जन आक्रोश के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा बयान सामने आया है। मंगलवार को देहरादून स्थित सचिवालय के मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इस मामले में पारदर्शिता और न्याय के साथ कोई समझौता नहीं करेगी।
मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि अंकिता भंडारी पूरे प्रदेश की बेटी थी और उसे न्याय दिलाना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने घोषणा की कि वे जल्द ही अंकिता के माता-पिता से व्यक्तिगत रूप से मिलेंगे और यदि वे वर्तमान जांच से संतुष्ट नहीं हैं, तो उनकी इच्छानुसार किसी भी एजेंसी से जांच कराने पर विचार किया जाएगा।
सरकार किसी भी प्रकार की जांच से पीछे हटने वाली नहीं है। अंकिता भंडारी हमारी बेटी है और उसके न्याय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसी प्रतिबद्धता के साथ अपराधियों के विरुद्ध ऐसी सख़्त कार्रवाई सुनिश्चित की गई, जिससे वे आज उम्र कैद की सजा काट रहे हैं। pic.twitter.com/VXFNQTNaST
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) January 6, 2026
“VIP” एंगल और SIT जांच पर क्या बोले CM?
मीडिया के तीखे सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने SIT (Special Investigation Team) की भूमिका का बचाव किया। उन्होंने कहा:
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पारदर्शी जांच: “जब यह दुखद घटना हुई थी, हमने तुरंत महिला अधिकारी रेणुका देवी के नेतृत्व में SIT का गठन किया था। आज वही अधिकारी सीबीआई में प्रतिनियुक्त (Deputation) हैं, जो उनकी योग्यता और निष्पक्षता को दर्शाता है।”
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न्यायालय का फैसला: सीएम ने याद दिलाया कि SIT की ठोस पैरवी के कारण ही निचली अदालत ने तीनों मुख्य आरोपियों (पुलकित आर्य, सौरभ और अंकित) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी अब तक की जांच पर संतोष व्यक्त किया है।
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VIP का सच: सीएम ने कहा कि ‘VIP’ को लेकर समय-समय पर भ्रम फैलाया गया है, जबकि SIT ने हर उस व्यक्ति की जांच की है जिसने उस दौरान रिजॉर्ट में कदम रखा था।
उर्मिला सनावर का वीडियो: ‘विरोधाभासों का पुलिंदा’
हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए उर्मिला सनावर के वीडियो और कथित ऑडियो क्लिप ने प्रदेश की राजनीति में उबाल ला दिया है। इस वीडियो में एक ‘VIP’ के नाम का जिक्र होने का दावा किया जा रहा है। इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा:
“यह घटनाक्रम दो लोगों के बीच की निजी बातचीत का है। इसमें कई तरह के विरोधाभास हैं। इस बातचीत को कितना प्रामाणिक माना जाए, यह बड़ा सवाल है। जांच एजेंसियां हर पहलू पर नजर रख रही हैं, लेकिन महज एक ऑडियो क्लिप के आधार पर किसी को भी निशाना बनाना न्यायोचित नहीं है।”
ज्ञात हो कि इस मामले में भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर के बीच चल रहे विवाद ने अब अंकिता केस को नई हवा दे दी है। मुख्यमंत्री ने इसे राजनीतिक स्वार्थ के लिए उठाया गया कदम बताया।
राज्य का मुख्य सेवक होने के नाते संबंधित प्रकरण में बहन अंकिता के माता-पिता से बात करूंगा और वे बेटी के न्याय के लिए जो भी चाहेंगे उसे कानून सम्मत आगे बढ़ाएँगे। pic.twitter.com/4Uf7N2tB1g
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) January 6, 2026
विपक्ष की घेराबंदी और CBI जांच की मांग
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा प्रदेश भर में किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर सीएम ने कहा कि विपक्ष लाशों पर राजनीति करना बंद करे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अदालत दोषियों को सजा दे चुकी है, तो अब साक्ष्यों के बिना माहौल खराब करने की कोशिश क्यों की जा रही है?
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि “बेटियों के सम्मान से बढ़कर कुछ नहीं है। यदि अंकिता के माता-पिता को लगता है कि सीबीआई जांच जरूरी है, तो सरकार उनकी भावनाओं का सम्मान करेगी।”
मुख्य बिंदु: अब तक क्या हुआ? (Quick Glance)
| तिथि/घटना | विवरण |
| सितंबर 2022 | अंकिता भंडारी की ऋषिकेश के वनन्तरा रिजॉर्ट में हत्या। |
| मई 2025 | ट्रायल कोर्ट ने पुलकित आर्य समेत तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई। |
| दिसंबर 2025 | उर्मिला सनावर का वीडियो वायरल, ‘गट्टू’ नामक VIP का जिक्र। |
| जनवरी 2026 | विपक्षी दलों का जोरदार प्रदर्शन, CBI जांच की मांग तेज। |
न्याय की अग्नि परीक्षा
अंकिता भंडारी केस उत्तराखंड के लिए केवल एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि एक भावनात्मक मुद्दा बन चुका है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद कि वे परिजनों की मांग पर किसी भी जांच के लिए तैयार हैं, अब गेंद अंकिता के माता-पिता के पाले में है। क्या उत्तराखंड सरकार वास्तव में सीबीआई जांच की सिफारिश करेगी? या यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी की भेंट चढ़ जाएगा? इस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं।



