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उत्तराखंड: सेम गांव तक सड़क पहुंचने का सपना साकार, दो दशक के इंतजार के बाद शुरू हुआ निर्माण कार्य

रुद्रप्रयाग जिले के जखोली ब्लॉक स्थित सेम गांव के लोगों के लिए आखिरकार वह ऐतिहासिक पल आ ही गया, जिसका वे पिछले लगभग दो दशकों से इंतजार कर रहे थे। लंबे संघर्ष, कई बार की मांग और लगातार प्रयासों के बाद अब गांव तक सड़क निर्माण का कार्य औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी ने रतनपुर-दरमोला मोटरमार्ग से सेम-डुंगरी तक बनने वाली लगभग ढाई किलोमीटर लंबी सड़क का विधिवत शिलान्यास किया। इस मौके पर ग्रामीणों में उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला।

जानकारी के अनुसार इस सड़क परियोजना के लिए लगभग 151.14 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही अब यह उम्मीद भी मजबूत हो गई है कि आने वाले कुछ ही महीनों में सेम गांव तक वाहनों की आवाजाही संभव हो जाएगी। फिलहाल ग्रामीणों को गांव तक पहुंचने के लिए कठिन पहाड़ी रास्तों और लंबी पैदल दूरी का सामना करना पड़ता है, जिससे खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता क्षेत्र के हर गांव को सड़क सुविधा से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि अब तक उनके कार्यकाल में लगभग 200 सड़कों का निर्माण पूरा किया जा चुका है, जबकि 150 से अधिक सड़क परियोजनाएं वर्तमान में प्रगति पर हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले समय में और भी कई नई सड़क परियोजनाएं शुरू की जाएंगी, जिससे क्षेत्र में विकास की गति और तेज होगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं मजबूत होंगी।

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने इस सड़क निर्माण कार्य को क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है। सड़क निर्माण संघर्ष समिति के अध्यक्ष कृष्णानंद डिमरी ने कहा कि सेम गांव के लोग पिछले 20 वर्षों से लगातार सड़क की मांग कर रहे थे। कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अनुरोध के बावजूद यह कार्य अटका हुआ था, लेकिन अब जाकर यह सपना साकार होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क बनने के बाद न केवल आवागमन आसान होगा बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने के कारण उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में देरी होती थी, कृषि उत्पादों को बाजार तक ले जाना बेहद मुश्किल होता था और कई बार जरूरी सामान लाने के लिए घंटों पैदल चलना पड़ता था। खासकर बरसात के मौसम में स्थिति और भी खराब हो जाती थी, जब रास्ते फिसलन भरे और खतरनाक हो जाते थे।

स्थानीय निवासी लक्ष्मी प्रसाद डिमरी ने बताया कि सड़क के अभाव में ग्रामीणों को खड़ी चढ़ाई और कठिन रास्तों से गुजरना पड़ता था, जिससे कई बार दुर्घटनाओं का भी डर बना रहता था। लेकिन अब सड़क निर्माण शुरू होने से लोगों में एक नई उम्मीद जगी है कि जल्द ही उनका गांव मुख्य मार्ग से सीधे जुड़ जाएगा और जीवन आसान हो जाएगा।

इस सड़क परियोजना को क्षेत्रीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि सड़क बनने से न केवल आवागमन सुगम होगा बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोग अपने उत्पादों को बेहतर बाजार तक पहुंचा सकेंगे।

कुल मिलाकर सेम गांव के लिए सड़क निर्माण कार्य का शुरू होना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिसने वर्षों पुराने इंतजार को समाप्त करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिया है। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर टिकी है कि निर्माण कार्य समय पर पूरा हो और जल्द से जल्द वे अपने गांव में सड़क सुविधा का लाभ उठा सकें।

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