BIS के 79वें स्थापना दिवस पर बोले CM धामी- ‘उत्तराखंड में गुणवत्ता आधारित संस्कृति को जन-आंदोलन बनाना जरूरी’
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय मानक ब्यूरो के स्थापना दिवस कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने राज्य की पहली 'विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2025' और 175 करोड़ की लागत से बनने वाली 'साइंस सिटी' का रोडमैप साझा किया।

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता और मानकीकरण को केवल एक सरकारी पैमाना नहीं, बल्कि एक आदत और संस्कृति के रूप में विकसित करना होगा। मंगलवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के 79वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की औद्योगिक और वैज्ञानिक प्रगति का नया विजन प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “गुणवत्ता ही पहचान” का मंत्र आज आत्मनिर्भर भारत की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। उन्होंने बीआईएस की आठ दशकों की यात्रा को देश की औद्योगिक, वैज्ञानिक और आर्थिक प्रगति की आधारशिला बताया।
1947 से 2026: औद्योगिक प्रगति की मजबूत रीढ़
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 1947 में एक छोटी संस्था के रूप में शुरू हुआ भारतीय मानक ब्यूरो आज कृषि, स्वास्थ्य, सड़क सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं तक विस्तृत हो चुका है। उन्होंने कहा:
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वैश्विक प्रतिस्पर्धा: बीआईएस ने भारतीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के योग्य बनाया है।
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भविष्य की तकनीक: ड्रोन, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), डिजिटल सुरक्षा और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बीआईएस द्वारा तय किए जा रहे मानक भविष्य के भारत की दिशा तय करेंगे।
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ईकोलॉजी और इकॉनमी: मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के लिए पर्यावरण (Ecology) और अर्थव्यवस्था (Economy) के बीच संतुलन जरूरी है, जिसमें बीआईएस अहम भूमिका निभा रहा है।
उत्तराखंड की पहली ‘विज्ञान एवं नवाचार नीति 2025’ लागू
शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कई ऐतिहासिक घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति 2025’ लागू कर दी है।
तकनीकी विकास के मुख्य बिंदु:
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साइंस सिटी का निर्माण: देहरादून में 175 करोड़ रुपये की लागत से देश की पाँचवीं ‘साइंस सिटी’ का निर्माण तेज गति से चल रहा है।
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ब्लॉक स्तर पर प्रयोगशालाएं: राज्य के सभी 95 ब्लॉकों में 180 से अधिक विज्ञान, तकनीक और गणित आधारित लैब स्थापित की गई हैं।
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लैब-ऑन-व्हील्स: पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों के लिए हर जिले में ‘लैब-ऑन-व्हील्स’ (चलती-फिरती प्रयोगशाला) का संचालन किया जा रहा है।
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पेटेंट सूचना केंद्र: विभिन्न विश्वविद्यालयों में 60 पेटेंट केंद्र स्थापित किए गए हैं ताकि स्थानीय नवाचारों को कानूनी सुरक्षा मिल सके।
‘हाउस ऑफ हिमालयाज’: वैश्विक बाजार में पहाड़ की धाक
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप राज्य सरकार स्थानीय हस्तशिल्प, जैविक कृषि और औषधीय जड़ी-बूटियों के लिए उच्च मानक स्थापित कर रही है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाई जा रही है। उन्होंने बीआईएस से आग्रह किया कि वे स्थानीय उत्पादों के प्रमाणीकरण में राज्य के साथ मिलकर काम करें ताकि ‘वन नेशन, वन स्टैंडर्ड’ की नीति सफल हो सके।
सिलक्यारा रेस्क्यू मॉडल को अंतरराष्ट्रीय पहचान
मुख्यमंत्री ने सिलक्यारा सुरंग हादसे के दौरान अपनाए गए तकनीक-आधारित रेस्क्यू मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तराखंड की वैज्ञानिक क्षमता को अब वैश्विक मान्यता मिल रही है। इसी सफलता के आधार पर राज्य में विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रम में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस गौरवशाली अवसर पर राजपुर विधायक खजान दास, उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर के साथ भारतीय मानक ब्यूरो के निदेशक सौरभ तिवारी और यू-कॉस्ट (U-COST) के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत भी मौजूद रहे। उद्योग एवं व्यापार संघ के प्रतिनिधियों ने भी मानकीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने पर मुख्यमंत्री के साथ चर्चा की।
2047 के विकसित भारत का रोडमैप
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि विज्ञान और गुणवत्ता का यह संगम वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने में मील का पत्थर साबित होगा। उत्तराखंड अब केवल पर्यटन ही नहीं, बल्कि विज्ञान और मानकीकरण के क्षेत्र में भी देश का अग्रणी राज्य बनने की ओर अग्रसर है।



