
ऋषिकेश: देवभूमि उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है। ऋषिकेश के गंगा बैराज जलाशय में 19-सीटर सी-प्लेन का दूसरा ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस परीक्षण ने न केवल तकनीकी रूप से परियोजना की व्यवहारिकता को साबित किया है, बल्कि यह भी
संकेत दिया है कि आने वाले समय में उत्तराखंड में हवाई पर्यटन का एक नया दौर शुरू हो सकता है।
इस बार का ट्रायल कई मायनों में खास रहा। सी-प्लेन ने गंगा की मुख्य धारा के साथ-साथ विपरीत धारा में भी सफलतापूर्वक टेक-ऑफ और लैंडिंग की। कुल मिलाकर विमान ने दो बार पानी से उड़ान भरी और दो बार सुरक्षित लैंडिंग की। विपरीत धारा में संचालन को विशेषज्ञ काफी चुनौतीपूर्ण मानते हैं, लेकिन इस परीक्षण ने यह स्पष्ट कर दिया कि ऋषिकेश की भौगोलिक परिस्थितियां इस तकनीक के लिए अनुकूल हैं।
इस पूरे ट्रायल के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मौके पर पुलिस, एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड और यूजेवीएनएल (UJVNL) की टीमें तैनात रहीं। प्रशासन की निगरानी में सभी प्रक्रियाएं पूरी सतर्कता के साथ संपन्न कराई गईं। अधिकारियों के अनुसार, यह ट्रायल पूरी तरह सफल रहा और इससे भविष्य में नियमित सेवा शुरू करने का रास्ता काफी हद तक साफ हो गया है।
इस परियोजना की प्रोजेक्ट मैनेजर मनीषा झा ने बताया कि ऋषिकेश बैराज में दोबारा सफल ट्रायल के बाद अब अगला चरण टिहरी झील में परीक्षण का होगा। इसके साथ ही क्रू मेंबर्स की ट्रेनिंग भी जल्द शुरू की जाएगी, ताकि संचालन के दौरान किसी भी तरह की तकनीकी या मानवीय त्रुटि की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।
गौरतलब है कि 6 अप्रैल को जौलीग्रांट एयरपोर्ट से इस परियोजना की शुरुआत हुई थी। तब से लेकर अब तक लगातार परीक्षण किए जा रहे हैं, जिनमें हर बार सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सेवा शुरू होती है, तो इससे खासतौर पर विदेशी और उच्च आय वर्ग के पर्यटकों को काफी सुविधा मिलेगी। वे सीधे ऋषिकेश के प्रमुख स्थानों तक पहुंच सकेंगे, जिससे उनका समय बचेगा और यात्रा अधिक आरामदायक होगी।
सी-प्लेन सेवा के शुरू होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। टैक्सी चालकों, टूर गाइड्स, होटल व्यवसायियों और स्थानीय बाजारों को इससे नई ऊर्जा मिलेगी। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से ऋषिकेश बैराज तक का सफर जो अब तक सड़क मार्ग से समय लेने वाला होता था, वह अब कुछ ही मिनटों में तय किया जा सकेगा। इससे ट्रैफिक जाम की समस्या में भी कमी आएगी।
सी-प्लेन एक विशेष प्रकार का विमान होता है, जिसे पानी की सतह से उड़ान भरने और वहीं उतरने के लिए डिजाइन किया जाता है। यह नदियों, झीलों और समुद्र जैसे जलाशयों में आसानी से ऑपरेट कर सकता है। आमतौर पर इसमें 12 से 19 यात्रियों के बैठने की क्षमता होती है। इसकी खासियत यह है कि इसे टेक-ऑफ और लैंडिंग के लिए बहुत लंबी रनवे की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि 300 से 500 मीटर का जल क्षेत्र ही पर्याप्त होता है। कुछ सी-प्लेन ऐसे भी होते हैं जो जमीन और पानी दोनों पर उतरने में सक्षम होते हैं।
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में, जहां कई पर्यटन स्थल दुर्गम इलाकों में स्थित हैं, वहां सी-प्लेन सेवा एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि राज्य की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। सरकार और संबंधित एजेंसियां इस परियोजना को लेकर काफी आशान्वित हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही यह सेवा आम लोगों के लिए उपलब्ध हो सकेगी।
कुल मिलाकर, ऋषिकेश में सी-प्लेन का सफल ट्रायल उत्तराखंड के पर्यटन और परिवहन क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। अब सबकी निगाहें टिहरी झील में होने वाले अगले ट्रायल पर टिकी हैं, जो इस महत्वाकांक्षी परियोजना को एक कदम और आगे बढ़ाएगा।



