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उत्तराखंड: किच्छा में रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार हुआ ज्येष्ठ उद्यान निरीक्षक, 12 हजार की घूस मांगने का मामला उजागर

उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले के किच्छा क्षेत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ज्येष्ठ उद्यान निरीक्षक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई न केवल विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत करने पर प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

मामले के अनुसार, आरोपी ज्येष्ठ उद्यान निरीक्षक बादल पाण्डे ने पेड़ों की कटाई की अनुमति देने के एवज में शिकायतकर्ता से 12,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता, जो पिछले 5-6 वर्षों से लकड़ी के ठेकेदार के रूप में कार्य कर रहा है, ने बताया कि उसने ग्राम गऊघाट में काश्तकारों से निजी आम के पेड़ खरीदे थे। इन पेड़ों की कटाई के लिए नियमानुसार संबंधित विभाग से अनुमति लेना आवश्यक होता है।

शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने कुल 26 आम के पेड़ों की कटाई के लिए आवेदन किया था। आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी आवश्यक दस्तावेज उद्यान विभाग तक पहुंच गए थे और अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण भी किया जा चुका था। इसके बावजूद आरोपी अधिकारी ने केवल 16 पेड़ों की कटाई की अनुमति देने के बदले 12,000 रुपये की रिश्वत की मांग की।

जब शिकायतकर्ता ने इस अवैध मांग को पूरा करने में असमर्थता जताई, तो उसने सतर्कता अधिष्ठान से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी दी। शिकायत मिलने के बाद सतर्कता विभाग ने प्रारंभिक जांच की, जिसमें आरोपों की पुष्टि हुई। इसके बाद थाना सतर्कता अधिष्ठान, हल्द्वानी में मामला दर्ज कर लिया गया।

पुलिस अधीक्षक, सतर्कता अधिष्ठान के निर्देश पर एक विशेष ट्रैप टीम का गठन किया गया। इस टीम को पूरी योजना के साथ कार्रवाई करने का जिम्मा सौंपा गया। 9 अप्रैल को ट्रैप टीम ने सुनियोजित तरीके से कार्रवाई करते हुए आरोपी को उसके किच्छा स्थित उद्यान सचल दल केंद्र कार्यालय में शिकायतकर्ता से 12,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान बादल पाण्डे पुत्र बची राम पाण्डे के रूप में हुई है, जो शक्ति विहार तल्ली हल्द्वानी का निवासी बताया जा रहा है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही, मामले में आगे की जांच भी जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इस तरह के और भी मामले तो सामने नहीं हैं।

इस कार्रवाई के बाद सतर्कता विभाग के निदेशक डॉ. वी. मुरूगेशन ने आम जनता से अपील की है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार की रिश्वतखोरी या भ्रष्टाचार से जुड़ी जानकारी रखता है, तो वह बिना डर के आगे आए और संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दे।

उन्होंने यह भी बताया कि सतर्कता अधिष्ठान द्वारा भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1064 और व्हाट्सएप नंबर 9456592300 जारी किए गए हैं, जिनके माध्यम से लोग अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि शिकायतकर्ताओं की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। साथ ही, यह कार्रवाई उन लोगों के लिए भी एक संदेश है जो अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध लाभ लेने की कोशिश करते हैं।

कुल मिलाकर, किच्छा में हुई यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सशक्त संदेश देती है और आम जनता को यह भरोसा दिलाती है कि यदि वे हिम्मत करके आगे आएं, तो भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई संभव है।

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