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रुद्रपुर: मॉल में संचालित स्पा सेंटरों पर प्रशासन का बड़ा प्रहार; ताले तोड़कर घुसी पुलिस, मची भगदड़

रुद्रपुर (विशेष संवाददाता): उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के जिला मुख्यालय रुद्रपुर में उस समय हड़कंप मच गया, जब पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने शहर के एक प्रमुख मॉल में चल रहे स्पा सेंटरों पर अचानक धावा बोल दिया। एसएसपी अजय गणपति के कड़े निर्देशों के बाद शुरू हुई इस रुद्रपुर स्पा सेंटर छापेमारी ने शहर के भीतर चल रहे कथित अनैतिक देह व्यापार और अनियमितताओं के सिंडिकेट को हिला कर रख दिया है।

ग्राइंडर से काटे गए ताले, भगदड़ के बीच कार्रवाई

मंगलवार दोपहर हुई इस अचानक कार्रवाई की भनक लगते ही मॉल के भीतर संचालित स्पा सेंटरों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। छापेमारी की सूचना मिलते ही कई स्पा संचालक अपने प्रतिष्ठानों को आनन-फानन में बंद कर मौके से फरार हो गए। हालांकि, प्रशासन इस बार पूरी तैयारी के साथ आया था। जब संचालकों ने सहयोग करने के बजाय सेंटरों पर ताले लटका दिए, तो मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में सख्त रुख अपनाया गया।

प्रशासनिक टीम ने ग्राइंडर मशीन मंगवाई और बंद स्पा सेंटरों के ताले काटकर भीतर प्रवेश किया। जैसे ही पुलिस की टीम अंदर दाखिल हुई, वहां का नजारा चौंकाने वाला था। पुलिस को स्पा सेंटरों के केबिनों में कई युवक और युवतियां आपत्तिजनक स्थिति में मिले। पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और उनके पहचान पत्रों की जांच की जा रही है।

नियमों की उड़ी धज्जियां, दस्तावेजों में मिली भारी कमी

जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मॉल में संचालित अधिकांश स्पा सेंटर बिना वैध मानकों के चल रहे थे। रुद्रपुर स्पा सेंटर छापेमारी के दौरान पाया गया कि कई सेंटरों के पास न तो उचित व्यापार लाइसेंस था और न ही स्पा संचालन के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन। इसके अतिरिक्त, वहां काम करने वाले कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं कराया गया था, जो सुरक्षा की दृष्टि से एक गंभीर चूक है।

एसएसपी अजय गणपति ने इस अभियान को लेकर स्पष्ट किया कि जिले में किसी भी सूरत में अनैतिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस को लंबे समय से इन सेंटरों के खिलाफ शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद खुफिया जानकारी जुटाकर इस संयुक्त ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।


प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठते गंभीर सवाल

इस कार्रवाई ने जहां एक ओर पुलिस की मुस्तैदी को दर्शाया है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन और पूर्व की कार्यवाहियों पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब इन स्पा सेंटरों पर छापेमारी हुई है।

“हर कुछ महीनों में पुलिस आती है, चालान करती है और कुछ दिन बाद वही सेंटर फिर से गुलजार हो जाते हैं। आखिर इन संचालकों को दोबारा काम शुरू करने की अनुमति और हौसला कहाँ से मिलता है?” — एक स्थानीय निवासी

यह सवाल वाजिब है क्योंकि बार-बार होने वाली ‘दिखावटी’ कार्रवाई के बाद ये सेंटर पुनः सक्रिय हो जाते हैं। क्या इनके पीछे किसी रसूखदार सफेदपोश का हाथ है या फिर विभाग के भीतर ही कुछ ‘काली भेड़ें’ इन्हें संरक्षण दे रही हैं, यह अब जांच का विषय है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और भविष्य की रणनीति

छापेमारी के बाद, जिन स्पा सेंटरों के ताले तोड़े गए थे, उन्हें फिलहाल प्रशासन ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। दोबारा अवैध गतिविधियां न हों, इसके लिए उन सेंटरों के बाहर पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि केवल चालानी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है; अब इन सेंटरों के लाइसेंस स्थायी रूप से निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

रुद्रपुर में हुई इस बड़ी कार्रवाई से उन लोगों में खौफ जरूर पैदा हुआ है जो स्पा की आड़ में गलत धंधों को बढ़ावा दे रहे हैं। लेकिन असली चुनौती इस कार्रवाई की निरंतरता बनाए रखने की है। यदि प्रशासन सख्त मॉनिटरिंग और कड़े नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं कराता, तो कुछ समय बाद स्थिति फिर ‘ढाक के तीन पात’ वाली हो सकती है।

रुद्रपुर की जनता अब उम्मीद कर रही है कि एसएसपी अजय गणपति के नेतृत्व में शुरू हुआ यह शुद्धिकरण अभियान केवल एक हेडलाइन बनकर न रह जाए, बल्कि शहर के माहौल को सचमुच सुरक्षित और स्वच्छ बनाए।

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