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दिल्ली में 48 घंटे की रिकॉर्ड कार्रवाई: साइबर अपराध से जुड़े 800 से अधिक आरोपी गिरफ्तार, 4,400 संदिग्धों से पूछताछ

नई दिल्ली, 21 नवंबर: साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और संगठित कार्रवाई को अंजाम देते हुए दिल्ली पुलिस ने राजधानी में चल रहे “साई-हॉक” (Cy-Hawk) अभियान के तहत 48 घंटे में 800 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया है या उन्हें कानूनी नियंत्रण में लिया गया है। यह ऑपरेशन केंद्रीय गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के सहयोग से चलाया गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस व्यापक कार्रवाई में 4,400 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ की गई, जबकि देश में फैले बड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क, हवाला-जैसे कैश आउट मॉड्यूल और अवैध कॉल सेंटरों को निशाने पर लिया गया। इस अभियान को दिल्ली पुलिस की अब तक की सबसे आक्रामक और व्यापक साइबर-एन्फोर्समेंट कवायद माना जा रहा है।


अभियान का दायरा: दिल्ली के हर जिले में एक साथ दबिश

पुलिस सूत्रों का कहना है कि “साई-हॉक” ऑपरेशन को अत्यंत गुप्त तरीके से तैयार किया गया था और इसे अचानक लागू किया गया, ताकि साइबर अपराध गैंग को किसी भी तरह की तैयारी का समय न मिल सके।

इस दौरान —

  • दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल,
  • इंटेलिजेंस यूनिट,
  • जिला साइबर पुलिस स्टेशन,
  • और I4C की संयुक्त मॉनिटरिंग टीम

ने राजधानी के हर जिले में एक साथ छापेमारी की।

कार्रवाई उन साइबर अपराध मॉड्यूल्स पर केंद्रित थी, जिनसे देशभर में आने वाले फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक, नकदी निकासी चैनल और डिजिटल धोखाधड़ी नेटवर्क संचालित होते हैं।


केंद्र और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि I4C की तकनीकी सहायता के चलते उन संदिग्ध मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिवाइसों की पहचान करना आसान हुआ, जिनका इस्तेमाल —

  • KYC फ्रॉड,
  • ऑनलाइन खरीद-फरोख्त धोखाधड़ी,
  • ओटीपी हैकिंग,
  • फेक इन्वेस्टमेंट स्कीम,
  • लोन ऐप ब्लैकमेलिंग
  • और रोमांस स्कैम

जैसे साइबर अपराधों में किया जा रहा था।

अधिकारी ने कहा कि “I4C ने हजारों फोन नंबर, फर्जी डिजिटल आईडी और संदिग्ध खातों की लिस्ट साझा की थी। इन्हीं लीड्स के आधार पर दिल्ली पुलिस ने 4,400 से अधिक लोगों से पूछताछ की और 800 से अधिक को गिरफ्तार या हिरासत में लिया।”


अवैध कॉल सेंटरों पर बड़ी कार्रवाई

अभियान के दौरान कई ऐसे स्थानों पर छापेमारी की गई, जहां से अवैध कॉल सेंटर चलाए जा रहे थे। ये कॉल सेंटर विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे और खुद को —

  • यूएस टैक्स विभाग (IRS)
  • कनाडा इमिग्रेशन
  • बैंक और क्रेडिट कंपनियां
  • फेडरल कम्युनिकेशन विभाग

बताकर कॉल करते थे।

इन कॉल सेंटरों से —

  • VOIP सर्वर,
  • 500 से अधिक मोबाइल फोन,
  • कंप्यूटर सिस्टम
  • और रिकॉर्डिंग सॉफ्टवेयर

बरामद किए गए।


कैश-आउट एजेंटों पर शिकंजा

साइबर अपराध मॉड्यूल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह नेटवर्क होता है जो धोखाधड़ी से मिले पैसों को नकद में बदलने, खाते से खाते में ट्रांसफर करने और क्रिप्टोकरेंसी में कन्वर्ट करने का काम करता है।

इस अभियान में पुलिस ने ऐसे 300 से अधिक कैश-आउट एजेंटों को भी गिरफ्तार किया है, जो फर्जी या किराए के बैंक खातों का इस्तेमाल कर साइबर अपराधियों को “मनी म्यूल” सेवा प्रदान कर रहे थे।

एक अधिकारी ने बताया कि “कई आरोपी 2,000 से 5,000 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन के हिसाब से साइबर ठगों को नकदी उपलब्ध कराते थे। ये नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था।”


कितनी बरामदगी हुई?

अभियान के दौरान पुलिस ने—

  • बड़ी संख्या में स्मार्टफोन और फीचर फोन,
  • लैपटॉप,
  • सिम कार्ड,
  • फर्जी पहचान पत्र,
  • और दर्जनों बैंक खातों के दस्तावेज

जब्त किए। कई डिवाइसों की फॉरेंसिक जांच शुरू हो चुकी है। माना जा रहा है कि इनसे देशभर में फैले दूसरे साइबर गैंग तक भी पहुंचने में मदद मिलेगी।


साइबर अपराधियों का बदलता चेहरा

दिल्ली पुलिस के अनुसार, पिछले दो वर्षों में साइबर अपराध—

  • 200% से अधिक बढ़ चुके हैं
  • इसका सबसे बड़ा कारण डिजिटल भुगतान का विस्तार और फेक ऐप्स का प्रसार है
  • साइबर अपराधी अब अत्यधिक तकनीकी और अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल का हिस्सा बन चुके हैं

पुलिस उपायुक्त (साइबर) ने कहा:“आज साइबर अपराधी सड़क के चोर नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से प्रशिक्षित नेटवर्क का हिस्सा हैं। इन्हें पकड़ने के लिए पारंपरिक पुलिसिंग नहीं, बल्कि डेटा-ड्रिवन स्पेशल ऑपरेशन जरूरी हैं।”


केंद्रीय गृह मंत्रालय की निगरानी में ऑपरेशन

गृह मंत्रालय ने पिछले कुछ महीनों में स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है।

I4C द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार—

  • देश में रोज़ाना 5,000 से अधिक साइबर शिकायतें दर्ज होती हैं
  • 70% मामले फिशिंग, फर्जी ऐप और डिजिटल फ्रॉड से जुड़े होते हैं
  • अकेले दिल्ली में पिछले एक साल में 55,000 से अधिक शिकायतें आई हैं

ऐसे में “साई-हॉक” जैसा अभियान केंद्र सरकार की साइबर-सुरक्षा मिशन का हिस्सा है।


अगला कदम क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान केवल एक शुरुआत है।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि:

  • गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है
  • कई बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना है
  • अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर भी दबिश बढ़ाई जाएगी
  • घरेलू और विदेशी नंबरों पर आधारित साइबर फेक-IP कॉल को रोकने के लिए नया प्रोटोकॉल तैयार हो रहा है

पुलिस का कहना है कि डेटा एनालिसिस के आधार पर अगले चरण के अभियानों की योजना बनाई जा रही है।

दिल्ली में 48 घंटे तक चला “साई-हॉक” ऑपरेशन साइबर अपराध के खिलाफ सबसे बड़ी और संरचित कार्रवाई के रूप में दर्ज हुआ है। इसने न केवल अवैध गतिविधियों में शामिल बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि साइबर अपराध से निपटने के लिए अब स्पेशलाइज्ड, हाई-टेक और इंटेलिजेंस-ड्रिवन कार्रवाई ही कारगर है।

सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि आने वाले समय में ऐसे अभियानों को और तेज किया जाएगा, ताकि डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन गतिविधियों को सुरक्षित बनाया जा सके।

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