
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में उच्च सदन (राज्यसभा) की खाली हो रही छह सीटों के लिए सस्पेंस अब पूरी तरह खत्म हो गया है। सोमवार को निर्वाचन प्रक्रिया के अंतिम चरणों के बाद, सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) गठबंधन और मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक (AIADMK) गठबंधन के सभी छह उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।
विधानसभा सचिवालय के निर्वाचन अधिकारी एवं अतिरिक्त सचिव आर. शांति ने विधिवत रूप से निर्वाचित सदस्यों के नामों की घोषणा की और उन्हें प्रमाण पत्र सौंपे। इस चुनाव में किसी भी अन्य प्रस्तावक के न होने और नामांकन पत्रों की जांच के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
उच्च सदन पहुंचने वाले 6 सांसदों की आधिकारिक सूची
तमिलनाडु से राज्यसभा पहुंचने वाले इन छह चेहरों में अनुभवी राजनेताओं के साथ-साथ नए नाम भी शामिल हैं। निर्वाचित सदस्यों की सूची इस प्रकार है:
-
तिरुचि शिवा (DMK): द्रमुक के कद्दावर नेता और अनुभवी सांसद, जिन्हें एक बार फिर पार्टी ने सदन में अपनी आवाज बनाने के लिए भेजा है।
-
कांस्टेंटाइन रविंद्रन (DMK): द्रमुक के प्रमुख चेहरे और प्रखर वक्ता।
-
एल. के. सुधीश (DMK/DMDK): द्रमुक गठबंधन के कोटे से सदन पहुंचेंगे।
-
क्रिस्टोफर मणिकम (INC): कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार, जिन्हें द्रमुक गठबंधन का समर्थन प्राप्त था।
-
एम. थंबी दुरई (AIADMK): अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता और पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष, जिनकी राज्यसभा में वापसी हुई है।
-
अंबुमणि रामदास (PMK): पीएमके (पट्टाली मक्कल काची) के नेता, जो अन्नाद्रमुक गठबंधन के सहयोगी के रूप में निर्वाचित हुए हैं।
अनुभवी चेहरों पर फिर जताया भरोसा: शिवा और थंबीदुरई की वापसी
इस चुनाव की सबसे खास बात यह रही कि द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों ही प्रमुख दलों ने अपने सबसे अनुभवी योद्धाओं पर दोबारा दांव लगाया है। तिरुचि शिवा (DMK) और एम. थंबीदुरई (AIADMK) दोनों ही अपनी सीटों को बरकरार रखने में सफल रहे हैं। तिरुचि शिवा की सदन में मौजूदगी द्रमुक के लिए केंद्र में मजबूती प्रदान करती है, जबकि थंबीदुरई का अनुभव अन्नाद्रमुक के लिए दिल्ली की राजनीति में सेतु का काम करता है।
निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, प्राप्त सभी नामांकनों की गहन जांच की गई। पीएमके संस्थापक एस. रामदास के सहयोगी स्वामीनाथन समेत कुछ अन्य निर्दलीय आवेदन नियमों की कसौटी पर खरे नहीं उतरे और उन्हें खारिज कर दिया गया। केवल इन्हीं छह उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाए गए, जिसके बाद उन्हें ‘निर्विरोध’ विजेता घोषित किया गया।
किनका कार्यकाल हो रहा समाप्त?
तमिलनाडु से राज्यसभा के छह मौजूदा सांसदों का कार्यकाल 2 अप्रैल, 2026 को समाप्त हो रहा है। सेवानिवृत्त होने वाले सांसदों में शामिल हैं:
-
द्रमुक (DMK): एनआर एलंगो, तिरुचि एन. शिवा, एंथियूर पी. सेल्वारासु और कनिमोझी एनवीएन सोमू।
-
अन्नाद्रमुक (AIADMK): एम. थंबीदुरई।
-
टीएमसी (मूपनार): जीके वासन।
इन रिक्तियों को भरने के लिए हुई इस चुनावी प्रक्रिया में सत्तापक्ष ने अपनी ताकत बरकरार रखी है, वहीं विपक्ष ने अपने सहयोगियों के साथ तालमेल बिठाते हुए अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
गठबंधन की राजनीति का असर: DMK और AIADMK का शक्ति प्रदर्शन
तमिलनाडु की राज्यसभा सीटों का गणित हमेशा से विधानसभा में दलों की संख्या बल पर निर्भर करता है। इस बार भी गठबंधन धर्म का पालन बखूबी देखा गया:
-
द्रमुक गठबंधन: सत्ताधारी दल ने अपने सहयोगियों, विशेषकर कांग्रेस और डीएमडीके के साथ समन्वय बिठाकर चार सीटें अपने पाले में रखीं। क्रिस्टोफर मणिकम का चुना जाना कांग्रेस के लिए दक्षिण में एक बड़ी जीत है।
-
अन्नाद्रमुक गठबंधन: मुख्य विपक्षी दल ने अपने पास उपलब्ध संख्या बल के आधार पर दो सीटें सुनिश्चित कीं। इसमें एक सीट खुद अन्नाद्रमुक के खाते में गई, जबकि दूसरी सीट सहयोगी दल PMK के अंबुमणि रामदास को मिली।
राजनीतिक विश्लेषण: उच्च सदन में तमिलनाडु की आवाज
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन छह सांसदों का चयन तमिलनाडु के क्षेत्रीय मुद्दों को संसद में उठाने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से अंबुमणि रामदास और तिरुचि शिवा जैसे नेताओं की उपस्थिति से कावेरी जल विवाद, भाषाई गौरव और राज्यों के अधिकारों जैसे मुद्दों पर प्रखर बहस देखने को मिल सकती है।
अन्नाद्रमुक के लिए एम. थंबीदुरई की जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी वर्तमान में राज्य में नेतृत्व और सांगठनिक बदलावों के दौर से गुजर रही है। दिल्ली में एक अनुभवी चेहरे की मौजूदगी पार्टी के राष्ट्रीय रसूख को बचाए रखने में मदद करेगी।
तमिलनाडु राज्यसभा चुनाव 2026 के इन परिणामों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राज्य की राजनीति में गठबंधन के समीकरण कितने गहरे हैं। बिना किसी विरोध और ड्रामे के संपन्न हुई यह निर्वाचन प्रक्रिया लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सटीक उदाहरण पेश करती है। अब 2 अप्रैल के बाद ये नवनिर्वाचित सदस्य आधिकारिक रूप से अपना कार्यभार संभालेंगे और उच्च सदन में ‘स्टालिन बनाम पलानीस्वामी’ की जंग का दिल्ली संस्करण देखने को मिलेगा।



