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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > चमोली में बारिश का कहर! कल्पेश्वर महादेव मंदिर परिसर में घुसा पहाड़ का मलबा, पौड़ी-देवप्रयाग मार्ग भी ठप; कई जगह जनजीवन प्रभावित
उत्तराखंडफीचर्ड

चमोली में बारिश का कहर! कल्पेश्वर महादेव मंदिर परिसर में घुसा पहाड़ का मलबा, पौड़ी-देवप्रयाग मार्ग भी ठप; कई जगह जनजीवन प्रभावित

The Hill India News
Last updated: August 18, 2026 6:35 am
The Hill India News
Published: August 18, 2026
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उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश से आफत बढ़ी, उफन रहे नदी-नाले और जगह-जगह भूस्खलन; कल्पेश्वर मंदिर के ऊपर पहाड़ी दरकी, गौशाला ध्वस्त, सड़क पर घंटों फंसे वाहन

चमोली/पौड़ी: उत्तराखंड में पिछले चार-पांच दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पहाड़ से लेकर मैदानी इलाकों तक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भारी बारिश के कारण नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं, जबकि कई पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं। चमोली जिले में बारिश ने पंच केदारों में शामिल कल्पेश्वर महादेव मंदिर परिसर के आसपास भी खतरा बढ़ा दिया। देर रात मंदिर के ऊपर पहाड़ी से भारी भूस्खलन हुआ और कई टन मलबा सीधे मंदिर परिसर में जा घुसा।

Contents
उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश से आफत बढ़ी, उफन रहे नदी-नाले और जगह-जगह भूस्खलन; कल्पेश्वर मंदिर के ऊपर पहाड़ी दरकी, गौशाला ध्वस्त, सड़क पर घंटों फंसे वाहनगनीमत रही, नहीं हुई जनहानिमशीन से मलबा हटाने का काम शुरू

भूस्खलन की घटना के बाद आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत और सफाई का काम शुरू किया। राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि घटना के समय मंदिर परिसर में किसी व्यक्ति के मौजूद होने या किसी तरह की जनहानि की सूचना नहीं है। हालांकि, मंदिर परिसर को काफी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

वहीं दूसरी ओर पौड़ी जिले में भी भारी बारिश के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। पौड़ी-देवप्रयाग मोटरमार्ग पर सौड़ के समीप पहाड़ी से भारी मलबा और पेड़ सड़क पर आ गिरने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को काफी देर तक रास्ता खुलने का इंतजार करना पड़ा।

कल्पेश्वर मंदिर के ऊपर दरकी पहाड़ी, परिसर में घुसा मलबा

चमोली जिले के ज्योतिर्मठ ब्लॉक में स्थित कल्पेश्वर महादेव मंदिर पंच केदारों में शामिल है और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। लगातार हो रही बारिश के बीच देर रात मंदिर के ऊपर स्थित पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक दरक गया।

भूस्खलन के दौरान भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और पेड़ नीचे की ओर आए और मंदिर परिसर में जा घुसे। अचानक हुए इस भूस्खलन से आसपास के लोगों में दहशत फैल गई।

कल्पेश्वर मंदिर के सचिव लक्ष्मण नेगी के मुताबिक, देर रात से लगातार बारिश हो रही थी। इसी दौरान मंदिर के ऊपर पहाड़ी से कई टन मलबा नीचे आ गया। मलबे की चपेट में मंदिर परिसर का हिस्सा भी आया है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। फिलहाल प्रशासन की टीम भी घटनास्थल का निरीक्षण करने की तैयारी में है।

गनीमत रही, नहीं हुई जनहानि

भूस्खलन की घटना भले ही काफी बड़ी थी, लेकिन राहत की बात यह रही कि इसमें किसी व्यक्ति की जान नहीं गई। मंदिर परिसर में मलबा आने के बावजूद घटना के दौरान किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

चमोली जिलाधिकारी गौरव कुमार ने घटना की जानकारी मिलने के बाद तहसील प्रशासन की टीम को मौके पर भेजने के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक टीम घटनास्थल पर पहुंचकर भूस्खलन से हुए नुकसान का जायजा लेगी। इसके बाद स्थिति के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन की प्राथमिकता मंदिर परिसर की सुरक्षा और आसपास के क्षेत्र में किसी अन्य भूस्खलन के खतरे का आकलन करना है।

गैरसैंण में भारी बारिश से गौशाला ध्वस्त

चमोली जिले में बारिश का असर केवल कल्पेश्वर क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। विकासखंड गैरसैंण के अंतर्गत कुनीगाड़ क्षेत्र के कल्याणा मल्ला गांव में भी मूसलाधार बारिश के कारण एक गौशाला ध्वस्त हो गई।

देर रात हुई तेज बारिश के चलते गौशाला की संरचना कमजोर हुई और वह अचानक ढह गई। हालांकि, यहां भी एक बड़ा हादसा होने से बच गया।

गौशाला मालिक रतन सिंह को बारिश के कारण पहले ही खतरे का अंदेशा था। उन्होंने अपने मवेशियों को गौशाला से निकालकर दूसरी जगह बांध दिया था। इसी वजह से गौशाला के ढहने के बावजूद मवेशियों की जान बच गई।

यह घटना बताती है कि पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के दौरान पुराने और कमजोर भवनों तथा पशुशालाओं को लेकर विशेष सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

पौड़ी-देवप्रयाग मार्ग पर भारी मलबा, थम गई आवाजाही

उधर, पौड़ी जिले में भी लगातार हो रही बारिश ने सड़क यातायात को प्रभावित कर दिया है। पौड़ी-देवप्रयाग मोटरमार्ग पर सौड़ के समीप देर रात से हो रही बारिश के बीच पहाड़ी से भारी मलबा सड़क पर आ गया।

मलबे के साथ बड़े पत्थर और पेड़ भी सड़क पर गिर गए, जिससे पूरा मार्ग बंद हो गया। सुबह जब यात्री और वाहन चालक इस रास्ते से गुजरे तो उन्हें सड़क बंद मिली। कुछ ही समय में सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।

पौड़ी से देहरादून जा रहे स्थानीय निवासी वैभव रावत ने बताया कि सौड़ के पास पहुंचने पर सड़क पूरी तरह बंद मिली। मलबा हटाने के लिए मशीन मौके पर पहुंची, लेकिन भारी पत्थरों और पेड़ों के कारण रास्ता खोलने में काफी परेशानी हुई।

यात्रियों को सड़क खुलने का इंतजार करना पड़ा और इस दौरान यातायात व्यवस्था प्रभावित रही।

मशीन से मलबा हटाने का काम शुरू

सड़क पर मलबा आने की सूचना मिलते ही लोक निर्माण विभाग की मशीन को मौके पर भेजा गया। इसके बाद सड़क से मलबा और पेड़ हटाने का काम शुरू किया गया।

लेकिन लगातार बारिश के कारण हालात आसान नहीं थे। पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ था और सड़क पर जमा मलबे में बड़े पत्थरों और पेड़ों के शामिल होने के कारण मशीन से सफाई करने में भी काफी समय लगा।

देवप्रयाग थाना प्रभारी अमरजीत सिंह ने बताया कि देर रात से हो रही भारी बारिश के कारण सुबह सौड़ के पास सड़क पर मलबा आ गया था। इसके चलते दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई।

सूचना मिलने के बाद संबंधित विभाग की मशीन को मौके पर भेजा गया और मार्ग खोलने के प्रयास शुरू किए गए। यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए पुलिस टीम भी मौके पर मौजूद रही।

बारिश के बीच पहाड़ों में बढ़ा भूस्खलन का खतरा

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन की घटनाएं आम हो जाती हैं। कई जगह पहाड़ी ढलान कमजोर होने के कारण अचानक मिट्टी, पत्थर और पेड़ सड़क या आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ जाते हैं।

चमोली और पौड़ी में सामने आई घटनाएं इसी खतरे की ओर इशारा कर रही हैं। एक तरफ जहां कल्पेश्वर मंदिर परिसर में मलबा घुस गया, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख मोटरमार्ग पर मलबा आने से यातायात ठप हो गया।

लगातार बारिश के कारण छोटे नदी-नाले भी उफान पर हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों और यात्रियों के लिए प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों का पालन करना बेहद जरूरी है।

यात्रियों से सावधानी बरतने की अपील

बारिश के इस दौर में पहाड़ी सड़कों पर यात्रा करना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर उन स्थानों पर जहां पहले भी भूस्खलन की घटनाएं हो चुकी हैं, वहां अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है।

सड़क पर मलबा दिखाई देने पर वाहन चालक किसी भी तरह आगे बढ़ने की कोशिश न करें। पहाड़ी से पत्थर गिरने की आशंका वाले स्थानों पर वाहन रोकने से भी बचना चाहिए।

वहीं स्थानीय लोगों को भी नदी-नालों के किनारे जाने और तेज बहाव वाले क्षेत्रों को पार करने से बचने की सलाह दी जाती है।

फिलहाल चमोली और पौड़ी में प्रशासन तथा संबंधित विभाग हालात पर नजर बनाए हुए हैं। कल्पेश्वर मंदिर में हुए नुकसान का विस्तृत आकलन प्रशासनिक टीम के मौके पर पहुंचने के बाद किया जाएगा, जबकि पौड़ी-देवप्रयाग मार्ग से मलबा हटाकर यातायात बहाल करने के प्रयास जारी हैं।

उत्तराखंड में लगातार जारी बारिश ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि पहाड़ों में मौसम बदलते ही हालात कितनी तेजी से चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। कल्पेश्वर महादेव मंदिर परिसर में भूस्खलन और पौड़ी-देवप्रयाग मार्ग पर मलबा आने की घटनाओं में फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि किसी जनहानि की सूचना नहीं है। लेकिन लगातार बारिश को देखते हुए आने वाले घंटों में भी भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में प्रशासन की निगरानी के साथ-साथ आम लोगों की सतर्कता भी बेहद जरूरी है।

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