
देहरादून, 21 नवंबर। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में लंबे समय से लंबित अधिवक्ता समस्याओं के समाधान के लिए शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण पहल तब दर्ज की गई, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से संघर्ष समिति बार एसोसिएशन और बार एसोसिएशन देहरादून के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। बैठक के दौरान अधिवक्ताओं ने नये जिला न्यायालय परिसर तथा पुराने जिला जजी परिसर में चैंबर निर्माण, भूमि आवंटन और अधोसंरचना संबंधी कई मुद्दों पर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। मुख्यमंत्री धामी ने सभी मांगों को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई और एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का आश्वासन दिया।
न्यायिक ढांचे की मजबूती को लेकर अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगें
प्रतिनिधिमंडल में शामिल संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रेमचंद शर्मा और देहरादून बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि नये जिला न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के लिए चैंबर निर्माण हेतु आवंटित भूमि पर विकास कार्य तत्काल प्रारंभ किया जाना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही पुराने जिला जज़ी परिसर की भूमि अधिवक्ताओं के पक्ष में आवंटित करने और दोनों परिसरों में संरचनात्मक विकास हेतु सरकारी सहयोग की जरूरत है।
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जिला न्यायालयों में रोजाना हजारों मुकदमों की पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं को उपयुक्त कार्यस्थल न मिलना न केवल असुविधाजनक है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की सुगमता पर भी असर डालता है। इसलिए दोनों परिसरों में चैंबर निर्माण, पार्किंग सुविधा, रिकॉर्ड रूम और मीटिंग हॉल जैसी सुविधाओं का विकास समय की मांग है।
मुख्यमंत्री धामी का आश्वासन — “संवाद से ही समाधान संभव”
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार अधिवक्ताओं की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार संवाद और सहयोग की भावना के साथ सभी पक्षों को साथ लेकर चलने में विश्वास करती है, क्योंकि समाधान उसी से निकलता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन के समय से ही अधिवक्ताओं का योगदान राज्य निर्माण में महत्वपूर्ण रहा है और सरकार न्याय व्यवस्था को मजबूत करने तथा अधिवक्ताओं के कार्यस्थल को व्यवस्थित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने अधिवक्ताओं से अपना चल रहा आंदोलन समाप्त करने का अनुरोध करते हुए भरोसा दिलाया कि समस्याओं का शीघ्र समाधान निकाला जाएगा।
समिति गठन का फैसला— अधिकारी, अधिवक्ता और आर्किटेक्ट होंगे शामिल
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह रहा कि सरकार एक संयुक्त समिति गठित करेगी, जिसमें जिला प्रशासन के अधिकारी, बार एसोसिएशन के प्रतिनिधि और एक अनुभवी आर्किटेक्ट शामिल होंगे। यह समिति दोनों परिसरों की उपलब्ध भूमि, आवश्यक संरचनाओं, निर्माण की ब्लूप्रिंट और वित्तीय संसाधनों से संबंधित सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श कर एक सर्वमान्य हल खोजेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति की रिपोर्ट और जिलाधिकारी द्वारा प्रस्तुत आख्या को कैबिनेट में रखा जाएगा, ताकि सभी तकनीकी व प्रशासनिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लिया जा सके।
चैंबर निर्माण के लिए सरकारी और जनप्रतिनिधियों का सहयोग
मुख्यमंत्री धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं के चैंबर निर्माण के लिए राज्य सरकार आर्थिक सहयोग देने को तैयार है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस पहल में सांसदों और विधायकों से भी सहयोग लिया जाना चाहिए, ताकि न्यायालय परिसर के विकास को व्यापक रूप से समर्थन मिले।
उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी इस परियोजना के लिए सक्रिय पहल करेंगे और न्यायिक प्रक्रिया को सुगम और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
अधिवक्ता प्रतिनिधिमंडल संतुष्ट — मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया
मुख्यमंत्री से विस्तृत चर्चा और आश्वासन के बाद प्रतिनिधिमंडल संतुष्ट नजर आया। संघर्ष समिति और बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री धामी का धन्यवाद करते हुए कहा कि राज्य सरकार का यह सकारात्मक रवैया न्याय व्यवस्था के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा और अधिवक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करेगा।
बैठक में मौजूद रहे अधिकारी और अधिवक्ता
बैठक में सचिव शैलेश बगौली, जिलाधिकारी सविन बंसल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह के साथ बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता राजबीर सिंह बिष्ट, मनमोहन लांबा, चन्द्रशेखर तिवारी, राजीव शर्मा, राजेश कुमार आर्य, अनुज शर्मा, अनिल पंडित, रंजन सोलंकी और भानू प्रताप सिसोदिया उपस्थित रहे।



