पिथौरागढ़ (उत्तराखंड): सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के सरकारी और निजी स्कूलों में शिक्षा के स्तर और बच्चों के हितों को लेकर जिला प्रशासन ने अब कमर कस ली है। जिले के स्कूलों में ‘मैजिकल शो’ (जादुई तमाशा) के नाम पर अभिभावकों की जेब ढीली करने और शैक्षिक वातावरण को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। जिलाधिकारी की इस ‘डिजिटल स्ट्राइक’ और कड़क रवैये ने शिक्षा विभाग के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
मनोरंजन के नाम पर ‘उगाही’ का पूरा मामला
पिछले कुछ समय से शिकायतें मिल रही थीं कि जिले के विभिन्न स्कूलों में जादुई शो आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के नाम पर छात्रों और उनके अभिभावकों से मोटी धनराशि वसूली जा रही थी। हैरानी की बात यह है कि इन कार्यक्रमों को सामाजिक जागरूकता का चोला पहनाकर स्कूलों के भीतर प्रवेश दिया गया था।
मामला तब गरमाया जब यह पता चला कि हरियाणा के एक जादूगर ने किसी संस्था की सहायता का हवाला देकर जिले के सभी स्कूलों में शो करने की अनुमति मांगी थी। Pithoragarh School Magic Show Ban की कार्रवाई के पीछे का मुख्य कारण शैक्षिक घंटों का दुरुपयोग और अनधिकृत रूप से धन का संकलन करना बताया जा रहा है।
एडीएम की चिट्ठी और सीईओ का स्पष्टीकरण
इस पूरे प्रकरण की परतें तब खुलीं जब मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) ने जानकारी दी कि 24 मार्च को अपर जिलाधिकारी (ADM) कार्यालय से एक पत्र जारी हुआ था। पत्र में उल्लेख था कि उक्त मैजिक शो के जरिए छात्रों को तंबाकू, पान मसाला, बीड़ी-सिगरेट जैसे नशों और अंधविश्वास के खिलाफ जागरूक किया जाना है।
हालांकि, मुख्य शिक्षा अधिकारी का कहना है कि उन्होंने स्कूलों को केवल ‘स्वेच्छा’ से यह कार्यक्रम कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन धरातल पर यह अनिवार्य वसूली और शैक्षिक कार्यों में बाधा का रूप लेने लगा था। डीएम ने इस प्रक्रिया में हुई चूक पर कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों से लिखित में जवाब तलब किया है।
डीएम की दो टूक: “लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं”
जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने मामले का संज्ञान लेते हुए न केवल इन कार्यक्रमों पर रोक लगाई, बल्कि एक कड़ा संदेश भी दिया। डीएम ने कहा कि:
“विद्यालयों में संचालित होने वाली कोई भी गतिविधि विद्यार्थियों के शैक्षिक, नैतिक और मानसिक विकास के मापदंडों पर खरी उतरनी चाहिए। शिक्षा के मंदिर में किसी भी ऐसी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी जो बच्चों के हितों से खिलवाड़ करती हो या अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालती हो।”
डीएम ने सख्त निर्देश दिए हैं कि भविष्य में जिले के किसी भी निजी या सरकारी स्कूल में इस प्रकार की कोई भी गतिविधि बिना विस्तृत जांच और ठोस आधार के संचालित नहीं होगी। यदि कोई स्कूल प्रबंधन या अधिकारी आदेश की अवहेलना करता पाया गया, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी और विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
Pithoragarh School Magic Show Ban: प्रशासन के 4 बड़े फैसले
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तत्काल प्रतिबंध: जिले के समस्त राजकीय और निजी स्कूलों में चल रहे मैजिक शो को तुरंत बंद करने का आदेश।
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जवाबदेही तय: एडीएम कार्यालय से जारी पत्र और शिक्षा विभाग की भूमिका की जांच के साथ अधिकारियों से स्पष्टीकरण।
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निरंतर निगरानी: सभी स्कूलों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के लिए एक निगरानी टीम का गठन।
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शैक्षिक गुणवत्ता पर फोकस: स्कूलों को निर्देश कि वे केवल उन्हीं गतिविधियों को बढ़ावा दें जो पाठ्यक्रम और छात्र के चरित्र निर्माण से जुड़ी हों।
विभिन्न संगठनों और अभिभावकों ने किया स्वागत
प्रशासन के इस कदम की चौतरफा सराहना हो रही है। पिथौरागढ़ के विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने डीएम के फैसले को ‘देर आए दुरुस्त आए’ बताया है। अभिभावकों का कहना है कि अक्सर स्कूलों में छोटे-छोटे कार्यक्रमों के नाम पर 50 से 100 रुपये या उससे अधिक की मांग की जाती है, जो निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए बोझ बन जाता है।
अभिभावक संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि “जादू के नाम पर जागरूकता फैलाना केवल एक बहाना है, असल में यह एक व्यावसायिक गतिविधि है जिसे स्कूलों में बंद होना ही चाहिए।”
भविष्य की रणनीति और निगरानी
डीएम आशीष भटगांई ने जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया है कि वे सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (BEOs) को सक्रिय करें। जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित स्कूलों में भी यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी बाहरी संस्था को शैक्षिक समय के दौरान व्यावसायिक लाभ के लिए मंच न मिले। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पिथौरागढ़ की शिक्षा व्यवस्था में ‘पारदर्शिता और छात्र हित’ ही सर्वोपरि है।
Pithoragarh School Magic Show Ban के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि जिले के स्कूलों में पढ़ाई का माहौल सुधरेगा और बिना किसी दबाव के छात्र अपनी नियमित शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
पिथौरागढ़ जिला प्रशासन का यह निर्णय उत्तराखंड के अन्य जनपदों के लिए भी एक नजीर बन सकता है। शिक्षा और मनोरंजन के बीच की धुंधली रेखा का फायदा उठाकर होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों पर लगाम लगाना समय की मांग थी, जिसे डीएम आशीष भटगांई ने पूरी दृढ़ता से लागू किया है।



