रुद्रपुर (उधम सिंह नगर): उत्तराखंड के शैक्षिक केंद्र पंतनगर से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय परिसर में एक 12 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म की जघन्य वारदात को अंजाम दिया गया है। घटना का आरोप विश्वविद्यालय के सुरक्षा विभाग में ठेके पर तैनात एक गार्ड पर लगा है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस घटना ने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और मासूमों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
घटना का विवरण: विश्वास और सुरक्षा का हनन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी सुरक्षा गार्ड ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर परिसर के ही एक सुनसान और बंद पड़े कमरे में ले गया। वहाँ आरोपी ने मासूम के साथ जबरन दुष्कर्म किया। घटना की भनक जैसे ही स्थानीय लोगों को लगी, उन्होंने तुरंत इसकी सूचना विश्वविद्यालय के सुरक्षा विभाग को दी।
मौके पर पहुँचे सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह नाबालिग को सुरक्षित कमरे से बाहर निकाला, लेकिन पुलिस के पहुँचने से पहले ही आरोपी मौके का फायदा उठाकर फरार होने में कामयाब रहा। इस घटना के बाद से ही पूरे उधम सिंह नगर जिले में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों में गहरा रोष व्याप्त है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पंतनगर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। पंतनगर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक नंदन सिंह बिष्ट के नेतृत्व में कई टीमों का गठन किया गया। परिजनों की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
आरोपी की तलाश में दबिश दे रही पुलिस को सूचना मिली कि वह अपने एक रिश्तेदार के घर में छिपा हुआ है। पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को दबोच लिया। बताया जा रहा है कि आरोपी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले का निवासी है और यहाँ ठेके पर सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात था।
कानूनी प्रक्रिया और मेडिकल परीक्षण
पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद की वैधानिक कार्यवाही शुरू कर दी है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण जिला अस्पताल में कराया गया है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार है। इसके साथ ही, पीड़िता का बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष (धारा 164 के तहत) दर्ज करा लिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों को मजबूती से संकलित किया जा रहा है ताकि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।
परिसर की सुरक्षा पर उठे सवाल
एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय परिसर, जहाँ हजारों छात्र और परिवार रहते हैं, वहाँ इस तरह की घटना होना सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक मानी जा रही है। स्थानीय निवासियों और छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि ठेके पर रखे जाने वाले कर्मचारियों का सत्यापन (Verification) सही तरीके से नहीं किया जा रहा है, जिसका खामियाजा मासूमों को भुगतना पड़ रहा है।
प्रशासन की अपील: पहचान गुप्त रखें
पुलिस प्रशासन ने इस संवेदनशील मामले में आम जनता और सोशल मीडिया यूजर्स से विशेष अपील की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि:
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पीड़िता की पहचान उजागर करना कानूनन अपराध है।
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किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी या अफवाह न फैलाएं।
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कानून को अपने हाथ में न लें, पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है।
यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि हमारे समाज और संस्थानों की नैतिक विफलता का प्रतीक है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय की गुहार और भी तीव्र हो जाती है। अब सबकी नजरें न्यायालय और पुलिस की चार्जशीट पर टिकी हैं, ताकि पीड़ित मासूम को न्याय मिल सके।


