इस्लामाबाद। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख और भारत के लिए लंबे समय से वांछित आतंकी मसूद अजहर को लेकर बड़ा कदम उठाया है। FIA ने उसे अपनी 2026 की ‘रेड बुक ऑफ मोस्ट वांटेड हाई-प्रोफाइल टेररिस्ट्स’ में भगोड़े के तौर पर शामिल किया है। इसके साथ ही मसूद अजहर की गिरफ्तारी या उसके बारे में विश्वसनीय जानकारी देने पर घोषित इनाम को बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया गया है।
मसूद अजहर का नाम भारत में कई बड़े आतंकी मामलों से जुड़ा रहा है और वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। पाकिस्तान की अपनी एजेंसी द्वारा उसे मोस्ट वांटेड आतंकवादियों की सूची में शामिल किया जाना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस कदम से उसके पाकिस्तान में होने या न होने को लेकर लंबे समय से चल रहे दावों पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख किया इनाम
रिपोर्टों के मुताबिक, मसूद अजहर पर पहले 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित था। अब इसे बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया गया है। यानी इनाम की राशि में 20 लाख पाकिस्तानी रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
FIA की वेबसाइट पर 2026 की रेड बुक का आधिकारिक उल्लेख किया गया है। इस रेड बुक में ऐसे हाई-प्रोफाइल आतंकवादियों को शामिल किया जाता है, जिन्हें एजेंसी अपनी प्राथमिकता वाली वांछित सूची में रखती है।
इनाम बढ़ाए जाने का मतलब यह है कि पाकिस्तानी एजेंसी अब मसूद अजहर के बारे में विश्वसनीय जानकारी हासिल करने या उसकी गिरफ्तारी में मदद करने के लिए पहले की तुलना में अधिक आर्थिक प्रोत्साहन देने की बात कर रही है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि केवल इनाम बढ़ाए जाने को किसी विशेष अंतरराष्ट्रीय दबाव का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं माना जा सकता।
FIA की रेड बुक क्या है?
पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की काउंटर टेररिज्म विंग हाई-प्रोफाइल आतंकवादियों की रेड बुक तैयार और प्रकाशित करती है। एजेंसी की जिम्मेदारियों में आतंकवाद और आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े मामलों की जांच भी शामिल है।
रेड बुक में किसी व्यक्ति का नाम होना यह दर्शाता है कि संबंधित एजेंसी उसे गंभीर अपराधों या आतंकवाद से जुड़े मामलों में वांछित मानती है और उसकी तलाश कर रही है।
मसूद अजहर का नाम इसी सूची में शामिल होना इसलिए अहम है क्योंकि जैश-ए-मोहम्मद का यह सरगना भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के मामले में सबसे चर्चित नामों में से एक रहा है।
मसूद अजहर के ठिकाने को लेकर फिर उठे सवाल
मसूद अजहर के मामले में सबसे बड़ा सवाल उसके मौजूदा ठिकाने को लेकर है। पाकिस्तान लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि मसूद अजहर पाकिस्तान में नहीं है और वह अफगानिस्तान चला गया है।
लेकिन दूसरी तरफ FIA के मौजूदा रिकॉर्ड में उसका नाम अब भी एक मोस्ट वांटेड हाई-प्रोफाइल आतंकवादी के तौर पर मौजूद है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि वह पाकिस्तान में नहीं है, तो उसकी गिरफ्तारी के लिए पाकिस्तान की एजेंसी द्वारा इनाम क्यों बढ़ाया गया है?
यही विरोधाभास मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान के पुराने दावों पर चर्चा को फिर तेज कर सकता है।
हालांकि, FIA की सूची में नाम शामिल होने और इनाम बढ़ाए जाने से यह स्वतः साबित नहीं होता कि मसूद अजहर वर्तमान में पाकिस्तान में ही मौजूद है। उसके वास्तविक ठिकाने की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी से नहीं होती।
FATF की बैठक से पहले आया कदम
मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाए जाने का घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब FATF की अक्टूबर 2026 की प्लेनरी बैठक प्रस्तावित है। आधिकारिक कैलेंडर के मुताबिक बैठक 26 से 30 अक्टूबर के बीच पेरिस में प्रस्तावित है।
FATF यानी Financial Action Task Force आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ वैश्विक स्तर पर काम करने वाली संस्था है। पाकिस्तान पहले भी FATF की निगरानी और अनुपालन प्रक्रिया के केंद्र में रह चुका है।
ऐसे में पाकिस्तान की ओर से हाई-प्रोफाइल आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई दिखाने वाले कदमों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रहना स्वाभाविक है।
हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है कि पाकिस्तान को दोबारा FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल किया जा रहा है। इसलिए मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाए जाने को सीधे FATF के दबाव का परिणाम बताना उचित नहीं होगा।
इसे पाकिस्तान की आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय अनुपालन से जुड़े प्रयासों के व्यापक संदर्भ में देखना ज्यादा सही होगा।
भारत के लिए क्यों अहम है मसूद अजहर?
मसूद अजहर का नाम भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद से जुड़े विवादों में लंबे समय से सामने आता रहा है। वह पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख है और भारत की सुरक्षा एजेंसियां उसे एक महत्वपूर्ण आतंकी सरगना के तौर पर देखती रही हैं।
भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर अपनी जमीन से संचालित आतंकी संगठनों और उनके नेताओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने का दबाव बनाता रहा है। ऐसे में पाकिस्तान की जांच एजेंसी द्वारा मसूद अजहर को अपनी मोस्ट वांटेड सूची में बनाए रखना और उस पर इनाम बढ़ाना निश्चित तौर पर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
लेकिन अब निगाह इस बात पर होगी कि पाकिस्तान केवल कागजी रिकॉर्ड और रेड बुक तक सीमित रहता है या वास्तव में मसूद अजहर की तलाश और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर कोई ठोस कदम भी उठाता है।
क्या पाकिस्तान का रुख बदला है?
मसूद अजहर पर बढ़े इनाम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पाकिस्तान का उसके प्रति आधिकारिक रुख बदल रहा है? एक तरफ पाकिस्तान का दावा रहा है कि वह देश में मौजूद नहीं है, जबकि दूसरी तरफ उसकी एजेंसी उसे अपनी मोस्ट वांटेड सूची में रख रही है और उसकी गिरफ्तारी के लिए इनाम बढ़ा रही है।
यही वजह है कि आने वाले समय में पाकिस्तान की ओर से इस मामले में और क्या जानकारी सामने आती है, उस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मसूद अजहर का नाम पाकिस्तान की 2026 रेड बुक में बरकरार है और उसके बारे में सूचना देने पर इनाम 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये किया गया है। यह कदम आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के आधिकारिक रिकॉर्ड और उसके अंतरराष्ट्रीय अनुपालन प्रयासों के संदर्भ में महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसे FATF की संभावित कार्रवाई से जोड़ने के लिए अभी किसी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना होगा।
आने वाले हफ्तों में FATF की बैठक और पाकिस्तान की आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई से जुड़े कदम इस पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना सकते हैं। सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि क्या मसूद अजहर के खिलाफ पाकिस्तान का यह कदम सिर्फ रेड बुक तक सीमित रहेगा या उसकी तलाश और कार्रवाई वास्तव में किसी ठोस नतीजे तक पहुंचेगी?
