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ओडिशा: ढेंकानाल में उत्सव के बीच पसरा मातम; ‘दंड यात्रा’ की तैयारियों के दौरान करंट लगने से 3 की मौत, 2 घायल

ढेंकानाल (ओडिशा): ओडिशा के ढेंकानाल जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ पारंपरिक आस्था और उत्सव का माहौल पल भर में चीख-पुकार और मातम में बदल गया। रविवार शाम जिले के हिंदोल क्षेत्र के बालिमी थाना अंतर्गत पाताला गांव में आयोजित होने वाली ‘दंड यात्रा’ की तैयारियों के दौरान बिजली का करंट लगने से तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। इस भीषण हादसे में दो अन्य युवक भी गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए कटक रेफर किया गया है।

कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पाताला गांव में पारंपरिक ‘दंड यात्रा’ (Danda Jatra) के उपलक्ष्य में एक भव्य डांस कार्यक्रम का आयोजन किया जाना था। रविवार शाम करीब 8 बजे गांव के उत्साही युवक कार्यक्रम के लिए मंच और टेंट तैयार करने में जुटे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवक टेंट लगाने के लिए लोहे के पाइप खड़े कर रहे थे।

इसी दौरान, एक लंबा लोहे का पाइप अचानक असंतुलित होकर ऊपर से गुजर रही 11 केवी (11KV) की हाई-वोल्टेज बिजली लाइन के संपर्क में आ गया। जैसे ही पाइप ने बिजली के तारों को छुआ, उसमें भयंकर करंट दौड़ गया। पाइप पकड़े हुए तीनों युवक इसकी चपेट में आ गए और बिजली के भीषण झटकों के कारण उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

मृतकों और घायलों की पहचान

इस हादसे में अपनी जान गंवाने वाले युवकों की पहचान सुधाकर साहू, पिंटू साहू और मिलन महालिक के रूप में हुई है। ये तीनों ही गांव के सक्रिय युवा थे और बड़े उत्साह के साथ इस धार्मिक आयोजन की तैयारियों में हाथ बंटा रहे थे।

वहीं, इस हादसे में दो अन्य युवक, प्रफुल्ल साहू और निर्मल साहू भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्हें आनन-फानन में पहले अंगुल जिला मुख्यालय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद कटक के प्रसिद्ध एससीबी (SCB) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों के अनुसार, दोनों घायलों की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है और वे विशेषज्ञों की निगरानी में हैं।


Dhenkanal Electrocuting Incident Odisha: लापरवाही या सिर्फ इत्तेफाक?

इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा मानकों और बिजली विभाग की संवेदनशीलता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। Dhenkanal Electrocuting Incident Odisha की सूचना मिलते ही बालिमी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

पुलिस प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि रिहायशी इलाकों और जहां सार्वजनिक आयोजन होते हैं, वहां से गुजरने वाली हाई-वोल्टेज लाइनों की ऊंचाई और सुरक्षा को लेकर अक्सर शिकायतें की जाती हैं, लेकिन समाधान नहीं होने की वजह से ऐसे हादसे होते हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या टेंट लगाने की अनुमति ली गई थी और क्या वहां बिजली के नंगे तारों को लेकर कोई चेतावनी दी गई थी।

पूरे गांव में शोक की लहर, उत्सव पड़ा ठंडा

ओडिशा में ‘दंड यात्रा’ का अपना विशेष सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। पाताला गांव में भी इस साल इसे धूमधाम से मनाने की योजना थी। लेकिन इस हादसे के बाद गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है। मृतकों के घर से आ रही चीख-पुकार कलेजा चीर देने वाली है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने गांव में ऐसा भयावह मंजर पहले कभी नहीं देखा।

अस्पताल परिसर में मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के अन्य युवाओं में भी इस घटना के बाद गहरा सदमा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त किया है और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।


सावधानी: सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुरक्षा गाइडलाइन

इस हादसे ने यह सबक दिया है कि उत्सवों के दौरान सुरक्षा से समझौता करना कितना भारी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार:

  • टेंट या मंच बनाते समय हमेशा ऊपर से गुजरने वाली बिजली की लाइनों का ध्यान रखना चाहिए।

  • लोहे के पाइप या अन्य धातु के उपकरणों के इस्तेमाल के वक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

  • स्थानीय बिजली विभाग को बड़े आयोजनों की पूर्व सूचना दी जानी चाहिए ताकि वे आवश्यक सुरक्षा कदम उठा सकें।

प्रशासनिक रुख और आगे की कार्रवाई

जिला प्रशासन ने घटना पर दुख जताते हुए घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद और गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद कानून सम्मत कार्रवाई की जाएगी। इलाके में तनाव न फैले, इसके लिए एहतियात के तौर पर पुलिस बल की तैनाती भी की गई है।

ढेंकानाल की यह घटना हमें याद दिलाती है कि जिंदगी कितनी क्षणभंगुर है। Dhenkanal Electrocuting Incident Odisha ने तीन घरों के चिराग बुझा दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस घटना से क्या सीख लेता है और क्या भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए कड़े सुरक्षा नियम लागू किए जाएंगे ताकि किसी और ‘उत्सव’ का अंत इस तरह की ‘त्रासदी’ में न हो।

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