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बिहार: MLC पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा की राह पर नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री पद पर फिलहाल बने रहेंगे

पटना: नीतीश कुमार ने सोमवार को बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, जिससे राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। यह कदम उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने की प्रक्रिया के तहत उठाया है। नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं और 10 अप्रैल को औपचारिक रूप से सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं।

विधान परिषद से उनके इस्तीफे की पुष्टि करते हुए Awadhesh Narayan Singh ने बताया कि मुख्यमंत्री ने सुबह उनसे शिष्टाचार भेंट के दौरान अपना त्यागपत्र सौंपा। उन्होंने कहा कि इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है और अब संबंधित सीट को रिक्त घोषित करने की प्रक्रिया शुरू होगी। सभापति ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार के जाने से परिषद में एक खालीपन महसूस होगा, क्योंकि उन्होंने लंबे समय तक इस सदन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई है।

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए जदयू के एमएलसी संजय गांधी ने कहा कि यह कोई भावुक क्षण नहीं था, बल्कि मुख्यमंत्री पूरी तरह सहज और नियमों का पालन करने वाले नेता के रूप में नजर आए। उन्होंने बताया कि वे करीब 20 वर्षों से नीतीश कुमार के साथ विधान परिषद में रहे हैं और यह निर्णय पूरी तरह संवैधानिक दायित्वों के तहत लिया गया है।

वहीं बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री अवधेश नारायण सिंह ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं, इसलिए उन्हें विधान परिषद की सदस्यता छोड़ना अनिवार्य था। उन्होंने बताया कि त्यागपत्र सभापति कार्यालय को भेज दिया गया था और औपचारिक स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

संविधान के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति राज्यसभा के लिए चुना जाता है तो उसे 14 दिनों के भीतर किसी अन्य विधायी सदन की सदस्यता से इस्तीफा देना होता है। यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो उसकी राज्यसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो सकती है। इसी संवैधानिक बाध्यता का पालन करते हुए नीतीश कुमार ने समय रहते 30 मार्च को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

नीतीश कुमार का विधान परिषद के साथ लंबा जुड़ाव रहा है। वे पहली बार 2006 में MLC बने थे और उसके बाद 2012, 2018 और 2024 में लगातार चार बार इस सदन के सदस्य रहे। इस तरह उन्होंने करीब दो दशकों तक विधान परिषद में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल क्रमशः 2006-2012, 2012-2018, 2018-2024 और 2024 से अब तक रहे। अब इस्तीफा देकर उन्होंने इस लंबे अध्याय को विराम दिया है।

राज्यसभा की सदस्यता लेने के साथ ही नीतीश कुमार भारतीय लोकतंत्र के चारों प्रमुख सदनों—विधानसभा, लोकसभा, विधान परिषद और राज्यसभा—के सदस्य रह चुके नेताओं की विशेष श्रेणी में शामिल हो जाएंगे। यह उपलब्धि उनके लंबे और विविध राजनीतिक अनुभव को दर्शाती है।

हालांकि, विधान परिषद की सदस्यता छोड़ने के बाद उनके मुख्यमंत्री पद को लेकर सवाल उठने लगे हैं। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार, कोई भी व्यक्ति बिना विधायक या विधान परिषद सदस्य बने अधिकतम छह महीने तक मुख्यमंत्री पद पर रह सकता है। इस अवधि के भीतर उन्हें किसी एक सदन की सदस्यता प्राप्त करनी होगी, अन्यथा उन्हें पद छोड़ना पड़ सकता है।

नीतीश कुमार के इस कदम को उनके राजनीतिक करियर में एक नए मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। 1985 में शुरू हुए उनके राजनीतिक सफर में यह एक अहम पड़ाव है, जहां वे अब राज्यसभा के जरिए राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में अपनी भूमिका को और मजबूत कर सकते हैं। 10 अप्रैल को जब वे राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे, तब उनके सार्वजनिक जीवन का एक नया अध्याय औपचारिक रूप से शुरू होगा।

 

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