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खेती की नई तकनीक और बीजों का महाकुंभ: पंतनगर में 13 मार्च से सजेगा 119वां अखिल भारतीय किसान मेला

रुद्रपुर/पंतनगर: भारत के हरित क्रांति की जननी कहे जाने वाले गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर एक बार फिर देश-दुनिया के अन्नदाताओं के स्वागत के लिए तैयार है। आगामी 13 मार्च से 16 मार्च 2026 तक विश्वविद्यालय परिसर में 119वें अखिल भारतीय किसान मेले का भव्य आयोजन किया जा रहा है। चार दिनों तक चलने वाले इस कृषि महाकुंभ में न केवल भारत के विभिन्न राज्यों बल्कि पड़ोसी देश नेपाल से भी हजारों किसानों के पहुँचने की उम्मीद है।

मेले का विधिवत शुभारंभ प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी और क्षेत्रीय सांसद अजय भट्ट सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।

आधुनिक खेती और उन्नत बीजों का संगम

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने मेले की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि इस बार का मेला तकनीकी और संसाधनों की दृष्टि से पहले से कहीं अधिक विशाल होगा। मेले का मुख्य आकर्षण विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उन्नत बीज और फल-फूल व सब्जियों के पौधों की प्रदर्शनी एवं बिक्री होगी।

पंतनगर के बीजों की विश्वसनीयता इतनी अधिक है कि रबी और खरीफ की फसलों से पूर्व लगने वाले इन मेलों में बीज खरीदने के लिए किसानों की लंबी कतारें लगती हैं। इस बार विश्वविद्यालय प्रशासन ने बीजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष काउंटर तैयार किए हैं।

350 से अधिक स्टालों पर दिखेगी आधुनिक कृषि की झलक

इस 119वें मेले में कृषि यंत्रों और नवीन तकनीकों का जबरदस्त प्रदर्शन होने जा रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार:

  • विशाल प्रदर्शनी: कुल 350 से अधिक स्टॉल लगाए जा रहे हैं, जिनमें 150 बड़े कमर्शियल स्टॉल शामिल हैं।

  • आधुनिक यंत्र: ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर, ड्रोन तकनीक, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली और सॉयल टेस्टिंग किट जैसे आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया जाएगा।

  • उद्यान प्रदर्शनी: फूलों और सब्जियों की दुर्लभ प्रजातियों के साथ-साथ गृह वाटिका (Kitchen Garden) के शौकीनों के लिए भी विशेष स्टॉल होंगे।

किसानों की समस्याओं का ‘ऑन द स्पॉट’ समाधान

पंतनगर किसान मेले की सबसे बड़ी विशेषता इसका शैक्षणिक और वैज्ञानिक पक्ष है। मेले के दौरान ऐतिहासिक गांधी हॉल में प्रतिदिन किसान गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा।

इन गोष्ठियों में विश्वविद्यालय के प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक किसानों से सीधा संवाद करेंगे।

  1. वैज्ञानिक पद्धति: किसानों को कम लागत में अधिक पैदावार लेने के वैज्ञानिक तरीके सिखाए जाएंगे।

  2. क्षेत्र भ्रमण: किसानों को केवल स्टालों तक सीमित न रखकर उन्हें विश्वविद्यालय के प्रायोगिक खेतों (Research Fields) का भ्रमण कराया जाएगा, ताकि वे आधुनिक फसलों को लाइव देख सकें।

  3. क्लीनिक सेवा: किसानों की फसलों में लगने वाले रोगों और मिट्टी की उर्वरता से जुड़ी समस्याओं का मौके पर ही वैज्ञानिकों की टीम द्वारा समाधान किया जाएगा।

नेपाल सहित कई राज्यों से जुटेंगे 30 हजार किसान

पंतनगर विश्वविद्यालय का यह मेला केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है। तराई और भाबर के इस क्षेत्र में होने वाले मेले में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार और राजस्थान के किसान भी बड़ी संख्या में शिरकत करते हैं। विशेष रूप से नेपाल के सीमावर्ती जिलों के किसान यहाँ से उन्नत किस्म के बीज ले जाने के लिए हर साल पहुँचते हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन का अनुमान है कि इस वर्ष मेले में 25 से 30 हजार किसान अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। दूर-दराज से आने वाले किसानों की सुविधा के लिए विश्वविद्यालय ने उनके रहने और भोजन के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।

कृषि मंत्री और जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति

मेले के महत्व को देखते हुए राज्य सरकार भी इसे लेकर काफी गंभीर है। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय के माध्यम से सरकार का लक्ष्य ‘लैब टू लैंड’ (Lab to Land) की अवधारणा को साकार करना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मेले के माध्यम से किसानों के लिए नई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा भी कर सकते हैं।

आत्मनिर्भर कृषि की ओर एक कदम

पंतनगर का यह 119वां अखिल भारतीय किसान मेला केवल एक व्यापारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह किसानों के सशक्तिकरण का एक सशक्त मंच है। वैश्विक खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में, पंतनगर विश्वविद्यालय द्वारा दी जा रही वैज्ञानिक जानकारी किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

यदि आप भी खेती-किसानी से जुड़े हैं या आधुनिक कृषि तकनीकों को समझना चाहते हैं, तो 13 से 16 मार्च के बीच पंतनगर की इस यात्रा का हिस्सा जरूर बनें।

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