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नई दिल्ली : हिमाचल प्रदेश के दूर-दराज के इलाकों में दूरसंचार कनेक्टिविटी/बुनियादी ढांचे में सुधार कि जरुरत -ट्राई

The Hill India News
Last updated: December 13, 2022 3:47 pm
The Hill India News
Published: December 12, 2022
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भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने आज हिमाचल प्रदेश के सुदूरवर्ती और दूर-दराज के जिलों में दूरसंचार कनेक्टिविटी/बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए सिफारिशें जारी की हैं।

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में खराब दूरसंचार कनेक्टिविटी की स्थिति और राज्य में डिजिटल डिवाइड को दूर करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, प्राधिकरण ने हिमाचल प्रदेश सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (डीआईटी),स्थानीय राज्य सरकार के अधिकारियों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड (बीबीएनएल) और स्थानीय उपभोक्ता प्रतिनिधियों जैसे महत्‍वूपर्ण हितधारकों के साथ स्वत: परामर्श शुरू किया था।

दूरसंचार बुनियादी ढांचा अंतर की वर्तमान स्थिति का आकलन करने और साथ ही राज्य में मौजूदा डिजिटल डिवाइड को पाटने के लिए, ट्राई ने राज्य में लाहौल और स्पीति, चंबा, कुल्लू और मंडी में चार सबसे बुरी तरह प्रभावित प्रशासनिक जिलों की पहचान की। ट्राई ने गैप विश्लेषण के लिए राज्‍य में संचालित टीएसपी, बीबीएनएल, यूएसओएफ, बिजली उत्‍पादन/ट्रांसमिशन कंपनियों से हिमाचल प्रदेश के इन चार सबसे बुरी तरह प्रभावित जिलों में उपलब्ध दूरसंचार नेटवर्क बुनियादी ढांचे की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की। अंतर विश्लेषण के आधार पर, प्राधिकरण ने अपनी सिफारिशें की हैं जिसमें हिमाचल प्रदेश के उपर्युक्त जिलों में दूरसंचार कनेक्टिविटी में सुधार का सुझाव दिया गया है।

इन सिफारिशों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

क. हिमाचल प्रदेश (एचपी) के 25 बिना कनेक्‍टिविटी वाले गांवों (तीन प्रशासनिक जिलों के अंतर्गत आने वाले लाहौल और स्पीति, कुल्लू और चंबा) को दूरसंचार अवसंरचना और कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए आवश्यक पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) और परिचालन व्यय (ओपेक्स) को यूएसओएफ के माध्यम से सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जाना चाहिए।

ख. जैसा कि यूएसओएफ प्रायोजित मौजूदा प्रावधानों में “देश भर के बिना कनेक्‍टिविटी वाले गांवों में 4जी मोबाइल सेवाओं की परिपूर्णता” में इसके वर्तमान दायरे के तहत अतिरिक्त 20 प्रतिशत समुदायों को शामिल करने की अनुमति है, यह सिफारिश की गई है कि यूएसओएफ बिना कनेक्‍टिविटी वाले गांवों (तीन प्रशासनिक जिलों के अंतर्गत आने वाले लाहौल और स्पीति, कुल्लू और चंबा) का जमीनी सर्वेक्षण करने के बाद 4जी प्रदान करने के लिए 20 प्रतिशत अतिरिक्त गुंजाइश के तहत इन 25 बिना कनेक्‍टिविटी वाले गांवों को तुरंत इसके तहत शामिल करे।

ग. गैर-4जी आधारित कवरेज वाले 38 गांवों में सेलुलर मोबाइल बुनियादी ढांचे को भी 20 प्रतिशत अतिरिक्त गुजांइश के तहत 4जी आधारित दूरसंचार सेवा में अपग्रेड करने की सिफारिश की गई है, जो यूएसओएफ प्रायोजित “देश भर के बिना कनेक्‍टिविटी वाले गांवों में 4जी मोबाइल सेवाओं की परिपूर्णता” में मौजूद है।

घ. यह सिफारिश की गई है कि 4जी परिपूर्णता योजना के लिए, यूएसओएफ को शुरू में ऐसे सभी गांवों के लिए वीसेट आधारित बैकहॉल कनेक्टिविटी की योजना बनानी चाहिए जहां ओएफसी या अन्य बैकहॉल मीडिया वर्तमान में उपलब्ध नहीं है। वीसेट उपकरण साझा बैंडविड्थ मॉडल सहित मासिक किराये के मॉडल या अन्य प्रचलित मॉडल सहित लिया जा सकता है। ओएफसी बैकहॉल उपलब्ध होते ही वीसेट कनेक्टिविटी को छोड़ा जा सकता है।

ङ. दूरसंचार विभाग को भारतनेट परियोजना के तहत राज्य में दूर-दराज या सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित गांवों में दूरसंचार कवरेज (ब्रॉडबैंड सेवाओं सहित) का विस्तार करने के लिए एनएफएस नेटवर्क पर एक/दो जोड़ी ओएफसी के आवंटन के लिए इस मामले को रक्षा मंत्रालय (एमओडी) के सामने रखना चाहिए। यदि यह व्यवहार्य नहीं है, तो ऐसे गांवों में दूरसंचार कवरेज का विस्तार करने के लिए अपने मौजूदा चालू ओएफसी पर उपयुक्त बैंडविड्थ आवंटित करने के लिए रक्षा मंत्रालय से संपर्क किया जा सकता है।

च. हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक जिलों जैसे चंबा, कुल्लू, लाहौल और स्पीति और मंडी के लिए, जिन गांवों को भारत नेट परियोजना के तहत जोड़ा जाना बाकी है, उन्हें तुरंत वीसेट मीडिया पर जोड़ा जाना चाहिए। ओएफसी बैकहॉल उपलब्ध होते ही वीसेट कनेक्टिविटी को छोड़ा जा सकता है।

छ. हिमाचल प्रदेश के चिन्हित जिलों के लिए, बिना कनेक्टिविटी वाले गांवों को मोबाइल कवरेज प्रदान करने के अलावा, सभी तहसीलों/तालुकों को कवर करने वाली एक रिंग संरचना में कोर ट्रांसमिशन बैकहॉल नेटवर्क को भी यूएसओएफ के माध्यम से वित्तपोषित किया जाना चाहिए। ट्राई इसके लिए एक विस्तृत निवेश योजना पर काम करेगा और अलग से इसकी अनुशंसा करेगा।

ज. दूरसंचार विभाग लाहौल और स्पीति, मंडी, कुल्लू और चंबा के चार जिलों के सभी स्थानों सहित राज्य के सुदूरवर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों को जोड़ने के लिए टीएसपी/आईपी-आईएस पर कोई आरओडब्ल्यू शुल्क नहीं लगाने के लिए हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकार के साथ इस मामले को उठा सकता है। राज्य के आरओडब्ल्यू नियमों को भी डीओटी द्वारा आरओडब्ल्यू नियम 2016 में किए गए नवीनतम संशोधनों के साथ तुरंत जोड़ा जाना चाहिए।

झ.दूरसंचार विभाग को उपयोगिता/औद्योगिक टैरिफ पर प्राथमिकता (कनेक्शन अनुरोध के 15 दिनों के भीतर) पर दूरसंचार स्‍थलों को बिजली प्रदान करने पर विचार करने के लिए राज्य सरकार के साथ बात करनी चाहिए। दूरसंचार विभाग को सुदूरवर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों (लाहौल और स्पीति, मंडी, कुल्लू और चंबा जिलों में सभी स्थानों सहित) में दूरसंचार स्‍थलों के लिए बिजली कनेक्शन का विस्तार करने के लिए अंतिम मील की स्थापना शुल्क छूट देने पर विचार करने के लिए हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकार के साथ भी बात करनी चाहिए क्योंकि इससे इन क्षेत्रों में दूरसंचार सेवाएं शीघ्र शुरू होने की सुविधा होगी और डिजिटल डिवाइड की खाई को पाटने में मदद मिलेगी।

ण. दूरसंचार विभाग को राज्य सरकार, एनएचएआई और बीआरओ को यह बात समझानी चाहिए कि सभी सड़क निर्माण, सड़क चौड़ीकरण या अन्य संबंधित कार्यों में टीएसपी के साथ पूर्व समन्वय (पूर्व सूचना के माध्यम से) किया जाना चाहिए और दूरसंचार नेटवर्क के नुकसान का भुगतान करने की देयता ठेकेदार के ठेके में इन-बिल्ड होनी चाहिए। दूरसंचार सहित भविष्य के सभी सड़क चौड़ीकरण और नई सड़क निर्माण परियोजनाओं में यूटिलिटी डक्ट के निर्माण की संभावना तलाशने के लिए दूरसंचार विभाग को हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकार के साथ भी बात करनी चाहिए। इससे राज्‍य में दूरसंचार सहित सभी प्रकार के उपयोगी बुनियादी ढांचे को शीघ्र शुरू करने में मदद मिलेगी।

ट. प्राधिकरण सिफारिश करता है कि दूर-दराज के पहाड़ी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण रणनीतिक दूरसंचार स्थलों पर सौर पैनलों की स्थापना के लिए धन मुहैया कराने की योजना बनाने के लिए दूरसंचार विभाग को इसे एमएनआरई और हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ उठाना चाहिए।

ठ. दूरसंचार विभाग को ऐसी सभी जगहों का अलग-अलग विश्लेषण करना चाहिए जिन्‍हें बीएसएनएल द्वारा हिमाचल प्रदेश के सुदूरवर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में वीसेट द्वारा चलाया जा रहा है। ऐसी सभी स्‍थलों के लिए जो सरकार की रणनीतिक या सेवा वितरण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए चलाई जा रही हैं, इन स्‍थानों को चलाने की पूरी परिचालन लागत सरकार द्वारा वहन की जानी चाहिए।

ड. ट्राई ने इससे पहले दूरसंचार विभाग को एक डीओ पत्र संख्या एम-5/9/(4)/2021-क्यूओएस दिनांक 07.10.2022 लिखा था, जिसमें सिक्किम में डिजिटल कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए कई बिंदुओं पर डीओटी की ओर से कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया था। दूरसंचार विभाग सिक्किम से जुड़े सभी बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई शुरू करें। पत्र के कुछ कार्य बिन्‍दु इस प्रकार हैं-

  • बीएसएनएल द्वारा भारतनेट/यूएसओएफ वित्त पोषित परियोजना के प्रबंधन के लिए एक अलग एस्क्रो खाते का संचालन,
  • भारतनेट और अन्य यूएसओएफ वित्त पोषित परियोजनाओं के परियोजना कार्यान्वयन और रखरखाव के लिए तकनीकी विशेषज्ञता और अनुभव रखने वाले कर्मियों के साथ एलएसए क्षेत्र इकाइयों के तहत राज्य-वार विशेष परियोजना प्रभाग का निर्माण,
  • राज्यों को लिट जीपीयू के बारे में तत्काल जानकारी के लिए एक तंत्र स्थापित करना,
  • वायर्ड-लाइन सेवा की प्रत्‍येक मांग की प्रतीक्षा सूची बनाए रखने के लिए टीएसपी पर लाइसेंस की शर्त को लागू करना आदि हिमाचल प्रदेश राज्य के लिए भी समान रूप से महत्‍वपूर्ण है। प्राधिकरण ने सिफारिश की है कि उपर्युक्त डी.ओ. पत्र में वर्णित बिन्दुओं को, जहां तक ​​हिमाचल प्रदेश के लिए महत्‍वपूर्ण है, यथाशीघ्र लागू किया जाना चाहिए।

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