
मुंबई/पुणे, 28 नवंबर 2025: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत एक अहम कार्रवाई करते हुए 25 और 26 नवंबर को पुणे में 12 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई एसबीआई पुणे की यूनिवर्सिटी रोड शाखा में हुए हाई-वैल्यू कार लोन फ्रॉड मामले से जुड़ी है, जिसमें करोड़ों रुपये के लोन फर्जी दस्तावेजों और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से मंजूर किए जाने का आरोप है।
यह जांच सीबीआई, एसीबी पुणे और शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी।
कैसे हुआ करोड़ों का कार लोन घोटाला?
ईडी की जांच में सामने आया है कि वर्ष 2017 से 2019 के बीच, एसबीआई की यूनिवर्सिटी रोड शाखा में तैनात तत्कालीन चीफ मैनेजर अमर कुलकर्णी ने ऑटो लोन काउंसलर आदित्य सेठिया और कुछ चुनिंदा ग्राहकों के साथ मिलकर बैंक को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया।
आरोपियों ने महंगी कारों के लिए नकली दस्तावेज, फर्जी कोटेशन और गलत इनकम पेपर्स जमा कराए, जिसके आधार पर बड़े-बड़े लोन बिना उचित वेरिफिकेशन के पास कर दिए गए।
फर्जीवाड़े का पूरा खेल — ऐसे लगाया बैंक को चूना
ईडी के अनुसार, आरोपियों ने बैंक की लेंडिंग पॉलिसी और आवश्यक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर निम्न तरीके से फर्जीवाड़ा किया—
- नकली एवं बढ़े हुए कार कोटेशन तैयार कराए गए, ताकि लोन की राशि अधिक दिखे।
- बैंक के अंदर बैठे अधिकारी ने इन फर्जी दस्तावेजों को सही मानकर बिना फिजिकल वेरिफिकेशन लोन पास कर दिया।
- कई मामलों में उधारकर्ताओं की इनकम का कोई वास्तविक आधार नहीं था, लेकिन फिर भी लाखों-करोड़ों रुपये के लोन जारी कर दिए गए।
- ऑटो लोन काउंसलर और बैंक अधिकारी की मिलीभगत के कारण पूरा सिस्टम बिना रुकावट चलता रहा।
ईडी ने पाया कि इस घोटाले में न केवल बैंक अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है, बल्कि कुछ कार डीलर्स और उधारकर्ताओं की सीधी संलिप्तता भी सामने आई है।
महंगी कारों का जाल — फर्जी दस्तावेज, लग्ज़री गाड़ियां
जांच में जिन कारों की खरीदारी सामने आई, उनमें देश-विदेश की कई लग्ज़री ब्रांड शामिल हैं। आरोपी इन कारों को पाने के लिए बैंक लोन को अपना हथियार बनाते थे और फर्जी कागजातों के सहारे मंजूरी हासिल कर लेते थे।
फर्जीवाड़े से खरीदी गई महंगी कारें—
- बीएमडब्ल्यू (BMW)
- वोल्वो (Volvo)
- मर्सिडीज-बेंज (Mercedes)
- लैंड रोवर (Land Rover)
इन कारों के लिए लाखों-करोड़ों रुपये के लोन मंजूर किए गए, जिनका भुगतान या तो समय पर नहीं किया गया या लोन हासिल करने के बाद कई आरोपी गायब हो गए।
ईडी छापेमारी में बरामद हुए अहम सबूत
पुणे के 12 ठिकानों पर चलाए गए सर्च ऑपरेशन में ईडी को कई महत्वपूर्ण और incriminating दस्तावेज मिले। इनमें शामिल हैं—
- कई उधारकर्ताओं द्वारा खरीदी गई जमीन और अन्य संपत्तियों के दस्तावेज
- महंगी गाड़ियों की जब्ती की सूची
- भारी मात्रा में फर्जी कोटेशन,
- नकली आईटीआर,
- फर्जी पहचान पत्र,
- और बैंक से पास हुए लोन संबंधी अन्य संवेदनशील रिकॉर्ड।
ईडी के मुताबिक, यह सब सामग्री मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों और बैंक को नुकसान पहुंचाने की साजिश की पुष्टि करती है।
कई अधिकारियों पर गिर सकती है गाज
जांच एजेंसी ने संकेत दिया है कि यह घोटाला सिर्फ एक-दो लोगों तक सीमित नहीं है। दस्तावेज बताते हैं कि—
- कई बैंक अधिकारी इस नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं,
- कुछ कार डीलर्स ने भी फर्जी बिल और बढ़े हुए कोटेशन तैयार करवाए,
- कई उधारकर्ता इस गैंग का हिस्सा थे, जिन्होंने नकली दस्तावेजों पर करोड़ों के कार लोन लिए।
ईडी ने कहा है कि यह मामला अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में अधिक गिरफ्तारियां और कई बड़े खुलासे होने की संभावना है।
बैंक को करोड़ों का नुकसान — जिम्मेदारी तय होगी
एसबीआई की ओर से पहले ही इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली गई थी, जिसके आधार पर सीबीआई और स्थानीय पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।
ईडी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि:
- बैंक को कुल कितना वित्तीय नुकसान हुआ,
- उस नुकसान में किस अधिकारी की क्या भूमिका रही,
- और क्या इस रकम को किसी और आपराधिक गतिविधि में इस्तेमाल किया गया।
PMLA के तहत कार्रवाई — जब्ती और पूछताछ जारी
ईडी ने छापेमारी में मिली सारी संपत्ति और दस्तावेजों को PMLA की धारा 17 के तहत जब्त किया है।
जांच एजेंसी आने वाले दिनों में—
- आरोपी बैंक अधिकारी,
- कार डीलर्स,
- और संदिग्ध उधारकर्ताओं से पूछताछ करेगी।
इसके साथ ही ईडी यह भी जांच कर रही है कि क्या इस घोटाले का संबंध किसी बड़े आर्गेनाइज्ड फाइनेंशियल नेटवर्क या हवाला चैन से तो नहीं था।
नतीजा
एसबीआई पुणे कार लोन फ्रॉड मामला देश की बैंकिंग प्रणाली में जारी खामियों और भ्रष्टाचार की एक और बानगी है। लाखों-करोड़ों रुपये की इस ठगी ने न सिर्फ बैंक की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि आंतरिक निगरानी सिस्टम में लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। ईडी की शुरुआती कार्रवाई ने मामले की दिशा बदल दी है और माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस घोटाले की असली परतें पूरी तरह खुलकर सामने आ जाएंगी।



