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Modi-Macron Meeting: मुंबई में मोदी-मैक्रों का ‘जादुई’ मिलन; 114 राफेल और महाशक्तिशाली मिसाइलों की डील से कांपेंगे दुश्मन

मुंबई (ब्यूरो): भारत और फ्रांस की अटूट दोस्ती आज एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी मजबूती का अहसास करा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष निमंत्रण पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचे हैं। इस यात्रा का आगाज महाराष्ट्र की राजधानी और देश की आर्थिक नगरी मुंबई से हुआ है, जहाँ प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति मैक्रों का ‘लोकभवन’ में गर्मजोशी के साथ गले लगाकर स्वागत किया।

यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि ‘साउथ ब्लॉक’ से लेकर ‘पेरिस’ तक चल रही उन बड़ी डिफेंस डील्स की गवाह बनने वाली है, जिसने बीजिंग से लेकर इस्लामाबाद तक बेचैनी बढ़ा दी है। 17 से 19 फरवरी तक चलने वाले इस दौरे में न केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर मंथन होगा, बल्कि भारत की हवाई ताकत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले समझौतों पर अंतिम मुहर लगने की पूरी संभावना है।

मुंबई के लोकभवन में ‘पावर मीट’

मंगलवार दोपहर जब राष्ट्रपति मैक्रों मुंबई पहुंचे, तो पीएम मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच ‘लोकभवन’ में द्विपक्षीय वार्ता का दौर शुरू हो चुका है। गौरतलब है कि मैक्रों की यह चौथी भारत यात्रा है, लेकिन वह पहली बार मायानगरी मुंबई के दौरे पर हैं। इस दौरान AI इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit) में दोनों नेता शामिल होंगे, जो यह दर्शाता है कि भारत और फ्रांस अब केवल पारंपरिक रक्षा समझौतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भविष्य की तकनीक में भी एक-दूसरे के रणनीतिक साझेदार हैं।

114 राफेल विमान: आसमान में भारत की बादशाहत

इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रक्षा गलियारे (Defense Corridor) से आ रहा है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, भारतीय वायुसेना की ताकत को कई गुना बढ़ाने के लिए 114 राफेल विमानों (Multi-Role Fighter Aircraft) की विशाल डील पर बातचीत निर्णायक मोड़ पर है। पहले खरीदे गए 36 राफेल विमानों की सफलता के बाद, भारत अब ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इन 114 विमानों के निर्माण और तकनीक हस्तांतरण (ToT) को लेकर फ्रांस के साथ समझौते को अंतिम रूप दे सकता है। अगर यह डील फाइनल होती है, तो यह दुनिया के सबसे बड़े रक्षा समझौतों में से एक होगा।

डिफेंस रोडमैप: अगले 10 साल का खाका

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा संबंधों की गहराई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पुराने रक्षा समझौतों को अगले 10 साल तक विस्तार (Extension) देने की तैयारी है। इसके तहत:

  1. घातक मिसाइलें: सुखोई और राफेल जैसे विमानों के लिए नई पीढ़ी की मिसाइलों का साझा विकास।

  2. नौसेना की ताकत: स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों और समुद्री सुरक्षा को लेकर नए प्रोजेक्ट्स।

  3. इंजन निर्माण: फाइटर जेट्स के इंजन भारत में ही बनाने को लेकर फ्रांसीसी कंपनी सैफ्रन (Safran) के साथ अहम बातचीत।

चीन और पाकिस्तान की बढ़ी धड़कनें

पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की इस केमिस्ट्री पर चीन और पाकिस्तान की पैनी नजर है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में फ्रांस, भारत का सबसे विश्वसनीय साझेदार बनकर उभरा है। 114 राफेल की संभावित डील और घातक मिसाइलों के जखीरे से भारत की सामरिक बढ़त को कम करना पड़ोसियों के लिए नामुमकिन होगा। यही कारण है कि इस बैठक के हर मिनट की अपडेट पर वैश्विक मीडिया की नजरें टिकी हुई हैं।

AI और भविष्य की तकनीक पर जोर

रक्षा समझौतों के इतर, राष्ट्रपति मैक्रों की इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य AI इम्पैक्ट समिट है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा डेटा मार्केट है और फ्रांस के पास उच्च स्तरीय तकनीक है। दोनों देश मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक उपयोग और इसके जरिए गवर्नेंस को सुधारने पर एक साझा घोषणापत्र (Declaration) जारी कर सकते हैं।

द्विपक्षीय संबंधों का नया अध्याय

प्रधानमंत्री मोदी ने मैक्रों के स्वागत में ट्वीट करते हुए कहा कि भारत और फ्रांस के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि भरोसे और साझा मूल्यों की बुनियाद पर टिके हैं। जानकारों का मानना है कि मुंबई में हो रही यह बैठक साल 2026 की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत साबित हो सकती है। शाम तक दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों की ओर से साझा बयान जारी किया जा सकता है, जिसमें अरबों डॉलर के समझौतों का आधिकारिक ऐलान होने की उम्मीद है।

‘विश्वमित्र’ की भूमिका में भारत

मैक्रों की यह यात्रा यह भी स्पष्ट करती है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व के तनाव के बीच भारत किस तरह वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलन बनाकर अपनी जरूरतों को पूरा कर रहा है। फ्रांस के साथ यह ‘डिफेंस पार्टनरशिप’ भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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